रायपुर 16 अक्टूबर । vidhansabha satra : विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आगामी विधानसभा सत्रों की अवधि और बैठकों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों, बिजली, कानून-व्यवस्था, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। विधानसभा जनता की समस्याओं को उठाने और सरकार की जवाबदेही तय करने का प्रमुख मंच है।
सदन की कार्यावधि छोटी होने के कारण महत्वपूर्ण ध्यानाकर्षण
विगत सत्रों की सीमित कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने कहा कि सदन की कार्यावधि छोटी होने के कारण महत्वपूर्ण ध्यानाकर्षण, स्थगन और शून्यकाल की सूचनाएं बिना विस्तृत चर्चा के ही समाप्त हो जाती हैं। इससे विपक्ष को जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर नहीं मिल पाता और सदन में संवाद की मूल भावना आहत होती है। vidhansabha satra
बुनियादी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को विवश
डॉ. महंत ने स्पष्ट चेताते हुए कहा, “जब लोकतांत्रिक मंचों पर जनता की आवाज को पर्याप्त समय और संवेदनशीलता के साथ नहीं सुना जाता, तो वे समस्याएं सदन की चारदीवारी से निकलकर सड़कों पर आ जाती हैं। आज स्थिति यह है कि स्कूली छात्र-छात्राएं तक अपनी बुनियादी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को विवश हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए अत्यंत चिंताजनक है। यदि सदन के भीतर संवाद के पर्याप्त अवसर हों, तो जन-असंतोष और विवादों का समय रहते शांतिपूर्ण समाधान निकल सकता है। vidhansabha satra
जनकल्याण के प्रति दोनों की संवैधानिक जवाबदेही समान
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष वैचारिक रूप से भिन्न हो सकते हैं, किंतु जनकल्याण के प्रति दोनों की संवैधानिक जवाबदेही समान है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष, कार्यमंत्रणा समिति और शासन से अपील की है कि सर्वदलीय सहमति बनाकर आगामी सत्रों के कार्यदिवसों में वृद्धि की जाए। सत्र की अवधि बढ़ने से जहां सरकार को जमीनी हकीकत समझने का अवसर मिलेगा, वहीं विपक्ष भी तथ्यों के साथ जनभावनाओं को पटल पर रख सकेगा, जिसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के समग्र विकास और आम नागरिक को मिलेगा। vidhansabha satra
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