हरतालिका तीज 2026: निर्जला व्रत क्यों रखती हैं महिलाएं, क्या है इसकी मान्यता

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hartalika teej 2026
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नई दिल्ली, 13 सितंबर । hartalika teej 2026 : सुहागिन महिलाएं हरतालिका तीज का पूरे वर्ष इंतजार करती हैं। इस दिन पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए महिलाएं भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा करती हैं। कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए व्रत रखती हैं।

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मां पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी है व्रत की परंपरा

hartalika teej 2026 : इस वर्ष हरतालिका तीज 14 सितंबर (सोमवार) को मनाई जाएगी। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की इसी कठिन साधना और अटूट संकल्प की स्मृति में इस व्रत की परंपरा शुरू हुई। यह व्रत दांपत्य सुख, अखंड सौभाग्य और मनोवांछित जीवनसाथी की कामना से जुड़ा माना जाता है।

शिव-पार्वती के पवित्र मिलन की मान्यता से जुड़ा हरतालिका तीज का व्रत

hartalika teej 2026 : पौराणिक कथाओं के मुताबिक, मां पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में चाहती थीं। भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए उन्होंने कठिन तपस्या शुरु कर दी और शिव को प्रसन्न करने का संकल्प किया। उनकी कठिन तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उनको पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज का व्रत काफी कठिन होता है। पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए महिलाएं रहती हैं, इसी वजह से इसको निर्जला व्रत कहा जाता है।

निर्जला व्रत के बाद शाम को शिव-पार्वती की पूजा;पति की सुख-समृद्धि की कामना

hartalika teej 2026 : पूरे दिन व्रत रहने के बाद महिलाएं शाम को भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा करती हैं। इस व्रत के दौरान रात में जागरण की परंपरा है। हरतालिका तीज के अवसर पर महिलाएं नए कपड़े पहनती हैं और सोलह शृंगार करती हैं। इस दिन सोलह शृंगार का खास महत्व है। इसको पति-पत्नी के रिश्तों की गहराई के तौर पर देखा जाता है। पूजा के दौरान मां पार्वती को सोलह शृंगार का सामान अर्पित किया जाता है।

कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं

hartalika teej 2026 : कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। ज़्यादा जानें प्रवासी नेटवर्क जुड़ें ताजा खबर पढ़ें दैनिक समाचार-पत्र पढ़ें 14 सितंबर को सुबह 5:00 बजे से 7:06 बजे तक पूजा के लिए उत्तम समय रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:32 बजे से 5:19 बजे तक भी पूजा करना शुभ रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा की जा सकती है।


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