“टोल वसूली 100% जिंदगी बचाने का इंतजाम “शून्य” क्यों ?”अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर की RTI से 5 बड़े खुलासे 

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रायपुर;12 अक्टूबर । tol vasuli : रायपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों में घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

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टोल वसूली पूरी, घायलों के इलाज की “शून्य”

tol vasuli :  वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने छत्तीसगढ़ और दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर एनएचएआई से जानकारी मांगी थी। इसमें एंबुलेंस, ट्रॉमा केयर सेंटर, संबद्ध अस्पतालों, डॉक्टरों की तैनाती और 1033 हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली से जुड़े बिंदु शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब फास्टैग के जरिए टोल टैक्स की नियमित वसूली की जा रही है, तो सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर उपचार और जीवनरक्षक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है ।

जनता से पूरा टोल, घायलों को इलाज का भरोसा अधूरा!

tol vasuli : “जब आम जनता से फास्टैग के जरिए एक-एक किलोमीटर का 100% टोल टैक्स वसूला जा रहा है, तो सड़क हादसों में घायल नागरिकों की जान बचाने के लिए बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं पूरी क्यों नहीं हैं?” वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने राजमार्गों पर टोल वसूली के अनुपात में सड़क हादसों में घायलों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत एनएचएआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर जीवन रक्षक सुविधाओं की उपलब्धता और जवाबदेही को लेकर चिंता जताई है।

एम्बुलेंस, डॉक्टर और ट्रॉमा सेंटर का मांगा हिसाब; NHAI की व्यवस्था पर सवाल 

tol vasuli : ठाकुर ने छत्तीसगढ़ के रायपुर-बिलासपुर, रायपुर-नागपुर, रायपुर-जगदलपुर और ओडिशा सीमा से जुड़े राजमार्गों सहित दिल्ली-एनसीआर के हाईवे कॉरिडोर में 24 घंटे एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस, ट्रॉमा केयर सेंटर, संबद्ध अस्पतालों, ड्यूटी पर डॉक्टरों की तैनाती और 1033 हेल्पलाइन के रिस्पॉन्स टाइम की जानकारी मांगी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यात्रियों से नियमित रूप से टोल टैक्स वसूला जा रहा है, तो दुर्घटना के समय घायलों को समय पर जीवन रक्षक चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित क्यों नहीं हैं।

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर की RTI से 5 बड़े खुलासे 

वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत जानकारी मांगी है। प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर की RTI से 5 बड़े खुलासे हुए ।

  1. ​100+ किमी हाईवे, सिर्फ 2 एम्बुलेंस पॉइंट ! tol vasuli : अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर की आरटीआई के जवाब में एनएचएआई बिलासपुर ने लिखित रूप से बताया कि रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-130) पर भोजपुरी (किमी 97.516) और मुडपार (किमी 110.300) में एम्बुलेंस की व्यवस्था है। इस जानकारी के आधार पर हाईवे के शेष हिस्से में आपातकालीन चिकित्सा सहायता की उपलब्धता और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मदद मिलने को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। शेष पूरे 100 किलोमीटर से अधिक लंबे हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था शून्य है।
  2.  न अस्पतालों का ब्योरा, न डॉक्टरों का अता-पता : tol vasuli : जब अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने पूछा कि सड़क हादसे के शिकार पीड़ित को तत्काल किन अनुबंधित अस्पतालों में ले जाया जाएगा और वहां 24 घंटे ड्यूटी पर कितने इमरजेंसी डॉक्टर व प्रशिक्षित पैरामेडिक्स तैनात रहते हैं, तो एनएचएआई ने हाथ खड़े कर दिए। विभाग के पास अनुबंधित अस्पतालों और डॉक्टरों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
  3. ​निजी कंपनी के नाम पर एनएचएआई का गैर-जिम्मेदाराना रवैया : tol vasuli : एनएचएआई ने लिखित जवाब में यह गैर-जिम्मेदाराना दलील दी कि रायपुर-बिलासपुर मार्ग को ‘NHIT Southern Projects Pvt. Ltd.’ को मुद्रीकृत (हस्तांतरित) कर दिया गया है, इसलिए अनुबंध और एसओपी का रिकॉर्ड उनके पास नहीं है। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने इसे नागरिकों के जीवन रक्षा की सरकारी निगरानी से भागने वाला गैर-संवैधानिक कदम करार दिया।
  4. 10 मिनट में मदद का दावा निकला कागजी छलावा : tol vasuli : एनएचएआई के अनुसार 1033 हेल्पलाइन पर कॉल के बाद 10 किमी के दायरे में 10 मिनट के भीतर एम्बुलेंस पहुंचने का नियम है। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने जमीनी हकीकत उजागर करते हुए बताया कि 100 किमी के दायरे में मात्र दो गाड़ियां होने के कारण ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के बाद का पहला घंटा) में एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती और समय पर इलाज न मिलने से घायल दम तोड़ देते हैं।
  5. नागपुर, जगदलपुर और ओडिशा बॉर्डर की जानकारी छिपाई : tol vasuli : नागपुर-रायपुर (NH-53), रायपुर-जगदलपुर (NH-30) और ओडिशा बॉर्डर जैसे दुर्घटना-संभावित मार्गों की जानकारी देने के बजाय एनएचएआई ने क्षेत्राधिकार का बहाना बनाकर आरटीआई कानून की धारा 6(3) का खुला उल्लंघन किया।

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने दर्ज कराई प्रथम विधिक अपील:

tol vasuli : एनएचएआई बिलासपुर द्वारा उपलब्ध कराई गई अपूर्ण जानकारी और कथित टालमटोल के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी एवं एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी, रायपुर के समक्ष प्रथम अपील दायर की है। अपील का पंजीयन क्रमांक NHIN/A/E/26/02643 है।

tol vasuli : “टोल वसूली 100% जिंदगी बचाने का इंतजाम “शून्य” क्यों ?”अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर की RTI से 5 बड़े खुलासे 

अनुच्छेद 21 का हवाला, NHAI की जवाबदेही पर कानूनी सवाल

tol vasuli : अपील में अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने सर्वोच्च न्यायालय के डॉ. एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा है कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। उनका तर्क है कि सड़क का संचालन निजी कंपनी को सौंपने मात्र से एनएचएआई अपनी जवाबदेही से मुक्त नहीं हो सकता। दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना संबंधित प्राधिकरण की जिम्मेदारी है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर का दोटूक सवाल सीधा बयान:

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मनोज सिंह ठाकुर (वरिष्ठ अधिवक्ता)
“टोल प्लाजा पर एक सेकंड की छूट नहीं मिलती, फास्टैग से पूरा टैक्स काटा जाता है—फिर हाईवे पर नागरिकों की जान बचाने के नाम पर यह आपराधिक लापरवाही क्यों? निजीकरण का बहाना बनाकर एनएचएआई जनता की जिंदगी से नहीं खेल सकता। हमने प्रथम अपील (NHAIN/A/E/26/02643) दर्ज करा दी है। यदि तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 50 किमी पर सुसज्जित एम्बुलेंस, 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती और संबद्ध अस्पतालों की पारदर्शी सूची सार्वजनिक नहीं की गई, तो हम सीधे बिलासपुर उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।” 

 

 


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