चोलामंडलम फायनेंस का चेक बाउंस करना पड़ा भारी, व्यापारी को एक साल की सजा; 5.74 लाख के प्रतिकर (क्षतिपूर्ति) का आदेश

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रायपुर; 12 सितम्बर । cholamandalam finance :  चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फायनेंस कंपनी से लिए गए ऋण की राशि के भुगतान के लिए जारी 5 लाख 74 हजार 39 रुपये का चेक बाउंस होने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायपुर की अदालत ने मां परमेश्वरी ट्रेडर्स के प्रोपराइटर देवेंद्र देवांगन को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने उन्हें एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाने के साथ ही परिवादी को 5,74,039 रुपये प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया है। प्रतिकर की राशि का भुगतान नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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ऋण भुगतान का चेक बाउंस धारा 138 के तहत हुई कार्रवाई

cholamandalam finance : मामले के अनुसार चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फायनेंस कंपनी के प्राधिकृत अधिकारी यादव कांबले ने देवेंद्र देवांगन के खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत परिवाद दायर किया था। आरोप था कि देवेंद्र देवांगन ने कंपनी से ऋण लिया था। ऋण दायित्व के भुगतान के लिए उन्होंने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का चेक क्रमांक 88621, दिनांक 24 जनवरी 2022, राशि 5,74,039 रुपये का जारी किया था।

निर्धारित समय में राशि का भुगतान नहीं किया गया

cholamandalam finance : कंपनी ने यह चेक भुगतान के लिए आईसीआईसीआई बैंक, तेलीबांधा रायपुर में जमा किया। 31 जनवरी 2022 के बैंक मेमो के अनुसार चेक अनादरित होकर वापस आ गया। इसके बाद कंपनी ने 22 फरवरी 2022 को पंजीकृत डाक के माध्यम से देवेंद्र देवांगन को विधिक नोटिस भेजकर चेक की राशि का भुगतान करने की मांग की। नोटिस मिलने के बावजूद निर्धारित समय में राशि का भुगतान नहीं किया गया।

साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने माना चेक अनादरित

cholamandalam finance : भुगतान नहीं होने पर चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फायनेंस कंपनी की ओर से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय ने माना कि अभियुक्त ने ऋण एवं विधिक दायित्व के निर्वहन के लिए 5,74,039 रुपये का चेक जारी किया था, जो बैंक से बिना भुगतान के अनादरित हो गया।

न्यायालय ने दोषी को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई

cholamandalam finance : न्यायालय ने देवेंद्र देवांगन को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357(3) के तहत 5,74,039 रुपये परिवादी को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास खांडे ने खुले न्यायालय में सुनाया फैसला

cholamandalam finance : निर्णय के समय अभियुक्त जमानत पर था। न्यायालय ने अभियुक्त और जमानतदार को जमानत-मुचलके की शर्तों से भारमुक्त कर दिया। अभियुक्त की अभिरक्षा अवधि निरंक दर्ज की गई है। न्यायालय ने निर्णय की निःशुल्क प्रति अभियुक्त को उपलब्ध कराने के साथ ही प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। मामले में निर्णय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रायपुर विकास खांडे ने खुले न्यायालय में घोषित किया।


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