सूरजपुर दोहरा हत्याकांड: कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को फांसी, चौथे को उम्रकैद की सजा; फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला

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रायपुर; 9 अक्टूबर । surajpur dohra hatyakand : बहुचर्चित सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को उम्रकैद की सजा दी गई है। अक्टूबर 2024 में प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की निर्मम हत्या से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। इस मामले में बुधवार को आए फैसले को न्यायिक कार्रवाई का अहम पड़ाव माना जा रहा है। 

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फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई

surajpur dohra hatyakand : फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत में हुई। अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया था। सजा के बिंदु पर अभियोजन और पीड़ित पक्ष की ओर से अधिकतम दंड की मांग की गई थी।  

अदालत ने मामले में तीन दोषियों को फांसी, एक को आजीवन कारावास सजा दी गई है।

कुलदीप साहू                      — मृत्युदंड
चंद्रकांत चौधरी                   — मृत्युदंड
फूल सिंह उर्फ रिंकू               — मृत्युदंड
आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी — उम्रकैद/मरते दम तक कारावास 

पीड़ित पक्ष ने दोषियों के लिए मांगी थी अधिकतम सजा

surajpur dohra hatyakand : पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता सुरेश कुमार शर्मा ने मामले को अत्यंत जघन्य और गंभीर अपराध बताते हुए दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी। मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की गई।

13 अक्टूबर 2024 की रात हुई थी दिल दहला देने वाली वारदात

surajpur dohra hatyakand : यह सनसनीखेज मामला 13 अक्टूबर 2024 की रात का है। सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक उस समय ड्यूटी पर थे। घर में उनकी पत्नी और 11 वर्षीय बेटी मौजूद थीं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुख्य आरोपी कुलदीप साहू अपने साथियों के साथ प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा। आरोप है कि प्रधान आरक्षक की पत्नी के साथ दुष्कर्म करने के बाद धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद नाबालिग बेटी की भी हत्या कर दी गई। वारदात के बाद दोनों शवों को एक वाहन में रखकर घर से करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाया गया और खेत में फेंक दिया गया।

ड्यूटी से लौटे प्रधान आरक्षक के सामने उजागर हुआ खौफनाक मंजर

surajpur dohra hatyakand : रात में ड्यूटी से लौटने पर प्रधान आरक्षक ने घर के भीतर खून के निशान देखे। पत्नी और बेटी के घर पर नहीं मिलने तथा फर्श और दीवारों पर खून के धब्बे देखकर वे घबरा गए। उन्होंने दोनों की तलाश शुरू की, लेकिन रातभर उनका कोई सुराग नहीं मिला।

अगले दिन घर से करीब पांच किलोमीटर दूर दोनों के शव मिलने के बाद इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा हुआ। मां-बेटी की हत्या की खबर फैलते ही पूरे सूरजपुर में आक्रोश फैल गया।

आरोपी के घर और गोदाम के बाहर खड़े वाहनों में लगाई गई आग

surajpur dohra hatyakand : मां-बेटी की हत्या के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए थे। आक्रोश के दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के घर और गोदाम के बाहर खड़े वाहनों में आगजनी की घटना भी हुई थी। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र में मार्च भी किया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए बाद में मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई गई।

हत्या से पहले पुलिसकर्मियों से हुआ था विवाद

surajpur dohra hatyakand : जांच के दौरान हत्या से पहले हुई घटनाओं का भी खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, 9 अक्टूबर 2024 की रात शहनाज अख्तर के जगराता कार्यक्रम के दौरान कुलदीप साहू के भाई संदीप साहू का नवापारा के कुछ युवकों से विवाद हुआ था। इसके बाद पुलिस संदीप साहू को थाने लेकर गई थी। आरोप लगाया गया था कि थाने में उसके साथ मारपीट की गई।

बताया गया कि इस घटना के बाद कुलदीप साहू पुलिस से नाराज था। जांच के दौरान पुलिस ने इस विवाद को हत्याकांड की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा। इसके अलावा, मृतक प्रधान आरक्षक के साथ भी कुलदीप का पुराना विवाद होने की बात सामने आई थी।

वारदात से कुछ घंटे पहले आरक्षक पर खौलता तेल डालने का आरोप

surajpur dohra hatyakand : अभियोजन के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2024 की शाम कुलदीप साहू अपने साथियों आर्यन विश्वकर्मा, चंद्रकांत चौधरी और रिंकू सिंह के साथ सूरजपुर के पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में मौजूद था।

इसी दौरान आरक्षक घनश्याम सोनवानी की नजर कुलदीप पर पड़ी। कुलदीप को जिला बदर किए जाने के कारण उसे पकड़ने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इसी दौरान कुलदीप ने आरक्षक पर खौलता हुआ तेल डाल दिया और तलवार से हमला करने की धमकी देते हुए वहां से भाग गया।

घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने कुलदीप साहू की तलाश शुरू कर दी थी। इसी घटनाक्रम के कुछ घंटे बाद प्रधान आरक्षक के परिवार के साथ हुई वारदात ने पूरे सूरजपुर को झकझोर दिया।

पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश का भी आरोप

surajpur dohra hatyakand : पुलिस के अनुसार, कुलदीप को पकड़ने के लिए हेड कॉन्स्टेबल सहित पुलिसकर्मी उसकी तलाश में निकले थे। इस दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश की।

surajpur dohra hatyakand : इसी घटनाक्रम के कुछ घंटे बाद वह प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा और इसके बाद मां-बेटी की हत्या की वारदात हुई। जांच के दौरान पुलिस ने कुलदीप के साथ आर्यन विश्वकर्मा, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू की भूमिका सामने आने का दावा किया था।

पुलिस टीम पर फायरिंग कर भागने का भी आरोप

surajpur dohra hatyakand : वारदात के बाद पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू पर पुलिस टीम पर फायरिंग करने का आरोप भी लगा। पुलिस के मुताबिक वह कार्रवाई से बचते हुए झारखंड की ओर भाग गया था। बाद में उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी गई। अंततः बलरामपुर पुलिस ने उसे बस से उतरते समय बस स्टैंड से गिरफ्तार किया।

मामले में पुलिस ने कुलदीप साहू के अलावा अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में अभियोजन चलाया गया।

29 सितंबर को दोषी ठहराए गए थे चारों आरोपी

surajpur dohra hatyakand : सूरजपुर दोहरे हत्याकांड की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में पूरी होने के बाद 29 सितंबर को अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद अदालत में सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई, जिसमें अभियोजन और पीड़ित पक्ष ने अपना पक्ष रखा। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने अपराध की गंभीरता, नाबालिग बच्ची की हत्या और मामले की परिस्थितियों का हवाला देते हुए दोषियों को अधिकतम सजा देने की मांग की थी।

surajpur dohra hatyakand : सजा के बिंदु पर बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाने के लिए तारीख निर्धारित की। अंततः अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित तीन दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) और चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को मरते दम तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

फैसला सुनते ही भावुक हुआ पीड़ित परिवार

surajpur dohra hatyakand : अदालत का फैसला सुनाए जाने के बाद प्रधान आरक्षक और उनके परिजन भावुक हो गए। करीब दो वर्ष से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया। पीड़ित परिवार की ओर से कहा गया कि पत्नी और मासूम बेटी की हत्या के बाद परिवार जिस मानसिक पीड़ा से गुजरा, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। अदालत के फैसले से उन्हें न्याय मिलने का भरोसा मजबूत हुआ है।

surajpur dohra hatyakand : परिजनों ने पुलिस विभाग, सहकर्मियों और कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने वाले लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा समय-समय पर परिवार का हालचाल लेने के लिए भी धन्यवाद दिया। परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देते हैं तो वे भी कानूनी लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेंगे।

अदालत परिसर के बाहर दिखा भावनाओं का सैलाब

surajpur dohra hatyakand : फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर के बाहर पीड़ित पक्ष और उनके समर्थकों में भावनाओं का सैलाब दिखाई दिया। परिवार के सदस्यों की आंखों से आंसू छलक पड़े। फैसले के बाद लोगों ने आतिशबाजी कर अदालत के निर्णय का स्वागत किया। दो साल से चले आ रहे इस मामले में अदालत के फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किए जा सकते हैं दोषी

surajpur dohra hatyakand : सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद अंबिकापुर सेंट्रल जेल में बंद मुख्य आरोपी कुलदीप साहू सहित अन्य दोषियों को रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि जेल प्रशासन सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में तैयारी कर रहा है।

surajpur dohra hatyakand : विशेष रूप से मृत्युदंड की सजा पाए कुलदीप साहू को रायपुर सेंट्रल जेल भेजे जाने की चर्चा है। हालांकि मृत्युदंड की सजा पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया और सक्षम उच्च अदालतों में अपील का अधिकार दोषियों को प्राप्त है। इसलिए अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा के बाद भी अंतिम कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी रहेगी।

फैसले के बाद भी जारी रहेगी कानूनी लड़ाई

surajpur dohra hatyakand : सूरजपुर का यह मामला केवल एक आपराधिक वारदात तक सीमित नहीं रहा। मां-बेटी की नृशंस हत्या के बाद जिस तरह पूरे जिले में आक्रोश देखने को मिला, उसने इसे प्रदेश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के बाद अगली नजर इस बात पर रहेगी कि दोषी पक्ष उच्च न्यायालय में क्या कानूनी कदम उठाता है और अपीलीय अदालत इस मामले में क्या निर्णय देती है।

सूरजपुर के इस दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला फिलहाल पीड़ित परिवार के लिए दो वर्षों के लंबे इंतजार के बाद न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

 


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