यादों में नाना : 50 रुपये प्रति शो से करोड़ों दिलों तक, ऐसे बने नाना पाटेकर

सादगी से जीने वाले अभिनेता की कहानी, 750 रुपये में हुई थी शादी; गांव और खेती से रहा गहरा लगाव

Yadoon Me Nana Patekar
Yadoon Me Nana Patekar

मुंबई, 8 अक्टूबर। Yadoon Me Nana Patekar: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी।

उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक चिकित्सकों ने सीपीआर देकर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। उनके निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा जगत में शोक की लहर है। नाना पाटेकर को उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग अंदाज के अभिनय के लिए जाना जाता था।

Yadoon Me Nana Patekar: ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘तिरंगा’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई। ‘वेलकम’ का उदय शेट्टी यानी उदय भाई का किरदार उनकी लोकप्रियता का एक अलग अध्याय बन गया।

Yadoon Me Nana Patekar: कभी एक शो के मिलते थे सिर्फ 50 रुपये

नाना पाटेकर का फिल्मी सफर जितना शानदार रहा, उनकी शुरुआती जिंदगी उतनी ही संघर्षपूर्ण थी। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने थिएटर से अभिनय की शुरुआत की। उस दौर में उनकी कमाई बेहद कम थी। नाना ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें एक थिएटर शो के लिए सिर्फ 50 रुपये मिलते थे। अगर महीने में 15 शो होते थे तो उनकी कमाई करीब 750 रुपये होती थी।

उस समय उनकी पत्नी नीलकांति पाटेकर बैंक अधिकारी के रूप में काम करती थीं और उन्हें करीब 2,500 रुपये महीने का वेतन मिलता था। नाना ने बताया था कि दोनों की संयुक्त आय उस समय उनके लिए पर्याप्त थी और वे बचत भी कर लेते थे।

750 रुपये में हुई थी शादी

Yadoon Me Nana Patekar: नाना पाटेकर और नीलकांति पाटेकर ने 1978 में शादी की थी। नाना के मुताबिक, उनकी शादी में कुल करीब 750 रुपये खर्च हुए थे। शादी के बाद मेहमानों के लिए छोटी सी पार्टी भी रखी गई थी, जिस पर करीब 24 रुपये खर्च हुए थे। नाना ने खुद एक इंटरव्यू में अपने शुरुआती वैवाहिक जीवन और उस दौर की आर्थिक परिस्थितियों का जिक्र किया था।

उनकी जिंदगी का यह दौर बताता है कि बाद में करोड़ों रुपये की लोकप्रियता और शोहरत हासिल करने वाले नाना ने अपने करियर की शुरुआत बेहद सीमित साधनों के साथ की थी।

जेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने से लेकर थिएटर तक

Yadoon Me Nana Patekar: नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ था। आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। अभिनय की दुनिया में आने से पहले उन्होंने विज्ञापन से जुड़े काम भी किए और कुछ समय तक जेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने जैसे कामों से भी आमदनी की।

बाद में उनका झुकाव थिएटर की ओर बढ़ा। रंगमंच ने उनके अभिनय को वह आधार दिया, जिसने आगे चलकर उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में शामिल कर दिया। उनकी पहली फिल्म ‘गमन’ 1978 में आई थी।

मायानगरी में रहे, लेकिन दिल गांव में बसता था

Yadoon Me Nana Patekar: बड़े स्टार बनने के बाद भी नाना पाटेकर ने आलीशान जीवनशैली को अपनी पहचान नहीं बनाया। उनका मुंबई में एक साधारण घर था। इसके अलावा गोवा में उनका आवास और पुणे के पास करीब 27 एकड़ में फैला फार्महाउस भी बताया जाता है, जहां वे खेती-बाड़ी और ग्रामीण जीवन से जुड़े रहना पसंद करते थे।

नाना अक्सर कहते थे कि वह फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनने के बजाय काम के लिए मुंबई आते हैं और फिर वापस अपने गांव चले जाते हैं। गांव की जिंदगी और प्रकृति से उनका लगाव आखिरी वर्षों तक बना रहा।

अमिताभ बच्चन के सामने बताया था गांव लौटने का कारण

Yadoon Me Nana Patekar: अमिताभ बच्चन के साथ ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में बातचीत के दौरान नाना पाटेकर ने गांव में रहने को लेकर अपने विचार साझा किए थे। उन्होंने कहा था कि वह खुद को फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं मानते और काम खत्म होने के बाद वापस गांव लौटना पसंद करते हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि उन्होंने कभी पार्टियों और शहर की चमक-दमक को अपनी जिंदगी का हिस्सा नहीं बनाया।

नाना के मुताबिक, गांव में उन्हें सुकून मिलता था। उन्होंने अपनी जरूरतों को सीमित रखने को आसान बताया था और कहा था कि उन्हें ऐसी चीजों की जरूरत नहीं लगती, जो सिर्फ दिखावे के लिए हों। उनके इस विचार ने उनके सादगीपूर्ण व्यक्तित्व की झलक दी थी।

खेती और प्रकृति से था गहरा जुड़ाव

Yadoon Me Nana Patekar: नाना पाटेकर को खेती में भी काफी रुचि थी। पुणे के पास स्थित उनके फार्महाउस का इस्तेमाल वह ग्रामीण जीवन के करीब रहने और खेती-बाड़ी के लिए करते थे। यही वजह थी कि फिल्मों में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद उनका जुड़ाव गांव से कभी कम नहीं हुआ।

उनकी यही सादगी उन्हें दूसरे फिल्मी सितारों से अलग बनाती थी। बड़े पर्दे पर गुस्सैल और तीखे किरदार निभाने वाले नाना निजी जिंदगी में अपेक्षाकृत शांत, सादगी पसंद और जमीन से जुड़े इंसान के रूप में पहचाने जाते रहे।

‘उदय भाई’ से लेकर ‘नटसम्राट’ तक

Yadoon Me Nana Patekar: नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में लगभग हर तरह के किरदार निभाए। ‘क्रांतिवीर’ ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया, वहीं ‘अग्निसाक्षी’ में उनके अभिनय को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का किरदार उनके करियर के सबसे लोकप्रिय किरदारों में शामिल हुआ। वहीं ‘नटसम्राट’ में उन्होंने अभिनय की गंभीरता और गहराई का एक अलग उदाहरण पेश किया।

उनकी अभिनय शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वह संवाद बोलते नहीं, बल्कि किरदार को जीते हुए दिखाई देते थे। उनकी आवाज, आंखों के भाव और संवाद अदायगी ने उनके किरदारों को दर्शकों की स्मृति में स्थायी जगह दी।

सादगी के साथ छोड़ी बड़ी विरासत

Yadoon Me Nana Patekar: नाना पाटेकर की कहानी एक ऐसे कलाकार की कहानी है, जिसने संघर्ष से शुरुआत की और अपने अभिनय के दम पर भारतीय सिनेमा में अमिट पहचान बनाई। एक समय एक शो के लिए 50 रुपये कमाने वाले नाना ने बाद में राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री जैसे सम्मान हासिल किए।

उनका जीवन यह भी बताता है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी व्यक्ति अपनी जड़ों से जुड़ा रह सकता है। नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार, दमदार आवाज, संवाद और सादगी से भरा व्यक्तित्व लंबे समय तक दर्शकों की यादों में जीवित रहेगा।

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