कोलकाता, 13 अक्टूबर । Shakti Peethas of West Bengal: देशभर में नवरात्र का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी दुर्गा के मंदिरों में पहुंचकर दर्शन-पूजन करते हैं। पश्चिम बंगाल देवी उपासना और शक्तिपीठों की समृद्ध परंपरा के लिए विशेष पहचान रखता है।
यहां स्थित विभिन्न शक्तिपीठों में माता सती के अलग-अलग अंगों से जुड़ी मान्यताएं प्रचलित हैं। इन मंदिरों में देवी को अलग-अलग नामों और स्वरूपों में पूजा जाता है, जबकि भगवान शिव विभिन्न भैरव रूपों में पूजित हैं। नवरात्र के अवसर पर इन शक्तिपीठों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं और श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
Shakti Peethas of West Bengal: कपालिनी शक्तिपीठ, तामलुक: मां भीमरूपा की होती है पूजा
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के तामलुक में देवी कपालिनी का मंदिर स्थित है। मान्यता के अनुसार, यहां माता सती की बायीं एड़ी गिरी थी। इस शक्तिपीठ में मां की पूजा भीमरूपा या वर्गा भीमा के स्वरूप में की जाती है, जबकि भगवान शिव सर्वानंद रूप में विराजमान हैं। ‘कपालिनी’ नाम का संबंध कपाल या खप्पर धारण करने वाली देवी से माना जाता है।
Shakti Peethas of West Bengal: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कपालिनी की उपासना से भक्तों को साहस और शक्ति प्राप्त होती है तथा भय, संकट और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना की जाती है।
रत्नावली शक्तिपीठ, हुगली: मां कुमारी या आनंदमयी का धाम
Shakti Peethas of West Bengal: हुगली जिले में स्थित रत्नावली शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का दायां कंधा गिरा था। इस मंदिर में देवी को कुमारी या आनंदमयी के नाम से पूजा जाता है। भगवान शिव यहां भैरव स्वरूप में पूजित हैं।
यह शक्तिपीठ देवी के प्रति श्रद्धा और शक्ति उपासना की परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। नवरात्र के दौरान यहां भी श्रद्धालु देवी के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं।
किरीटेश्वरी शक्तिपीठ, मुर्शिदाबाद: जहां गिरा था माता सती का मुकुट
Shakti Peethas of West Bengal: मुर्शिदाबाद जिले के किरीटकोण गांव में स्थित किरीटेश्वरी शक्तिपीठ मां विमला देवी को समर्पित है। मान्यता के अनुसार, यहां माता सती का मुकुट गिरा था। इसी कारण इस स्थान का संबंध ‘किरीट’ यानी मुकुट से जोड़ा जाता है।
यहां मां विमला की पूजा की जाती है और शक्तिपीठ की परंपरा में भगवान शिव के भैरव स्वरूप का भी विशेष महत्व है। देवी के भक्त श्रद्धा के साथ यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।
भ्रामरी शक्तिपीठ, सालबाड़ी: मां भ्रामरी का अनूठा स्वरूप
Shakti Peethas of West Bengal: जलपाईगुड़ी जिले के बोडा मंडल के सालबाड़ी गांव में मां भ्रामरी का मंदिर स्थित है। मान्यता है कि यहां देवी सती का बायां पैर गिरा था। इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां देवी भ्रामरी और भैरव ईश्वर स्वरूप में पूजित हैं।
तीस्ता नदी क्षेत्र के प्राकृतिक परिवेश और जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था का केंद्र है। मां भ्रामरी को देवी के उग्र और करुणामय स्वरूप से जोड़ा जाता है। धार्मिक परंपराओं में उनका संबंध भ्रमरों यानी भौंरों से भी बताया जाता है। भक्त मां की आराधना कर सुख-समृद्धि और संकटों से रक्षा की कामना करते हैं।
बहुला शक्तिपीठ, केतुग्राम: मनोकामना पूर्ति की आस्था
Shakti Peethas of West Bengal: वर्धमान जिले के केतुग्राम क्षेत्र में बहुला देवी शक्तिपीठ स्थित है। मान्यता के अनुसार, यहां माता सती का बायां हाथ गिरा था। इस मंदिर में मां सती की पूजा बहुला देवी के रूप में की जाती है, जबकि भगवान शिव भैरव के भीरुक स्वरूप में पूजित हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्त सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। यह शक्तिपीठ स्थानीय धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है।
उजानी शक्तिपीठ: मां मंगल चंडिका का आशीर्वाद
Shakti Peethas of West Bengal: वर्धमान जिले के उजानी गांव में मंगल चंडिका शक्तिपीठ स्थित है। मान्यता है कि यहां माता सती की दाहिनी कलाई या हाथ का एक हिस्सा गिरा था। यहां मां दुर्गा के स्वरूप मंगल चंडी की पूजा की जाती है, जबकि भगवान शिव कपिलांबर नाम से पूजित हैं।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां मंगल चंडिका की आराधना से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। भक्त जीवन की बाधाओं से मुक्ति और उन्नति की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं। इस स्थान पर तांत्रिक साधना और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा भी बताई जाती है।
वक्रेश्वर शक्तिपीठ, बीरभूम: मां महिषासुरमर्दिनी का धाम
Shakti Peethas of West Bengal: बीरभूम जिले में पापहर नदी के तट पर स्थित वक्रेश्वर शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती का भ्रूमध्य यानी दोनों भौंहों के बीच का भाग या उनका मन गिरा था।
इस शक्तिपीठ में मां की पूजा महिषासुरमर्दिनी के रूप में होती है, जबकि भगवान शिव वक्रनाथ के नाम से पूजित हैं। देवी के इस स्वरूप को शक्ति और दुष्ट शक्तियों पर विजय का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र में श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन कर देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
नलहाटी शक्तिपीठ, बीरभूम: मां कालिका की अनूठी मान्यता
Shakti Peethas of West Bengal: बीरभूम जिले के नलहाटी में स्थित नलहाटी शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता के अनुसार, यहां माता सती का कंठ या गले का हिस्सा गिरा था। इस मंदिर में देवी कालिका और भैरव योगीश की पूजा की जाती है।
मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता के अनुसार, गर्भगृह में माता के मुख के नीचे कंठ का स्थान माना जाता है। श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास भी प्रचलित है कि यहां अर्पित जल के संबंध में एक विशेष अनुभव होता है। देवी के प्रति अटूट आस्था के कारण नलहाटी शक्तिपीठ पर भक्तों का आगमन होता रहता है।
फुल्लारा शक्तिपीठ, लाभपुर: प्राकृतिक शिला में मां का स्वरूप
Shakti Peethas of West Bengal: बीरभूम जिले में लाभपुर के पास स्थित फुल्लारा देवी शक्तिपीठ को अट्टहास शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का निचला होंठ गिरा था। इस मंदिर में मां फुल्लरा और भगवान शिव विश्वेश के रूप में पूजित हैं।
इस शक्तिपीठ की विशेषता यहां स्थापित प्राकृतिक शिला है। बताया जाता है कि लगभग 15 से 18 फीट लंबी विशाल शिला को ही माता का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
नंदीपुर शक्तिपीठ, सैंथिया: मां नंदिनी की आराधना
Shakti Peethas of West Bengal: बीरभूम जिले के सैंथिया शहर में स्थित नंदीपुर शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां माता सती का कंठहार यानी गले का हार गिरा था। यहां मां सती को नंदिनी और भगवान शिव को नंदिकेश्वर भैरव के रूप में पूजा जाता है।
मंदिर की एक विशेष पहचान वटवृक्ष के नीचे स्थित माता का स्वरूप है। मान्यता के अनुसार, मां की आकृति कछुए के आकार की सिंदूर लेपित चट्टान के रूप में विद्यमान है, जिस पर चांदी का मुकुट और सोने की तीन आंखें सुशोभित हैं। यह स्थान स्थानीय श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है।
युगाद्या शक्तिपीठ, क्षीरग्राम: पवित्र तालाब से जुड़ी धार्मिक मान्यता
Shakti Peethas of West Bengal: वर्धमान जिले के क्षीरग्राम में युगाद्या शक्तिपीठ स्थित है। मान्यता के अनुसार, यहां माता सती के दाएं पैर का अंगूठा गिरा था। इस शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री देवी को युगाद्या या भूतधात्री के नाम से जाना जाता है, जबकि भगवान शिव क्षीरकंठक अथवा क्षीरखंडक भैरव के रूप में पूजित हैं।
इस मंदिर से जुड़ी एक प्रमुख मान्यता यह है कि देवी की मूल प्रतिमा मंदिर के पास स्थित क्षीरदिघी नामक पवित्र तालाब के जल में निवास करती है। इस धार्मिक परंपरा के कारण युगाद्या शक्तिपीठ का विशेष महत्व माना जाता है।
कालीघाट शक्तिपीठ, कोलकाता: मां कालिका का प्रसिद्ध धाम
Shakti Peethas of West Bengal: कोलकाता में स्थित कालीघाट शक्तिपीठ देश के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में शामिल है। इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती के दाएं पैर का अंगूठा गिरा था। यहां देवी कालिका और भगवान शिव नकुलेश्वर भैरव के रूप में पूजित हैं।
मंदिर में मां काली की विशिष्ट प्रतिमा स्थापित है, जिसमें उनके तीन नेत्र और चार हाथ दर्शाए गए हैं। देवी की लंबी जीभ सोने से मढ़ी हुई बताई जाती है। उनके हाथों में खड्ग और असुर का कटा हुआ सिर सुशोभित है। कालीघाट आम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ तांत्रिक साधना की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है।
कांची देवगर्भ शक्तिपीठ, बीरभूम: कंकालिता मंदिर की तांत्रिक परंपरा
Shakti Peethas of West Bengal: बीरभूम जिले में बोलपुर के पास कोपाई नदी के तट पर स्थित कांची देवगर्भ शक्तिपीठ को कंकालिता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार, यहां देवी सती की कमर या कंकाल गिरा था। इस शक्तिपीठ में देवी को देवगर्भा और भगवान शिव को रुरु भैरव के रूप में पूजा जाता है।
यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ तांत्रिक साधना की परंपरा के लिए भी जाना जाता है। मंदिर के निकट श्मशान घाट स्थित है, जिसके कारण इस क्षेत्र का संबंध विभिन्न साधना परंपराओं से जोड़ा जाता है। श्रद्धालु यहां देवी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।
नवरात्र में शक्तिपीठों का विशेष महत्व
Shakti Peethas of West Bengal: पश्चिम बंगाल के ये शक्तिपीठ देवी उपासना की विविध परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को दर्शाते हैं। प्रत्येक शक्तिपीठ की अपनी विशिष्ट कथा, देवी का अलग स्वरूप और पूजा-पद्धति है। नवरात्र के दौरान इन मंदिरों में श्रद्धालु मां के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।
Shakti Peethas of West Bengal: इन धार्मिक स्थलों से जुड़ी परंपराएं बंगाल की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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