नई दिल्ली, 8 जून 2026। Great Nicobar Project: अंडमान-निकोबार भारत का अंतिम छोर है। सामरिक दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद निकट स्थित है। यह ऐसी रणनीतिक लोकेशन है, जहां से चीन के लगभग 80 प्रतिशत कच्चे तेल और 70 प्रतिशत एलएनजी (एलएनजी) का आवागमन होता है।
Great Nicobar Project : ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के समग्र विकास
सामरिक और व्यावसायिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को नई पहचान देने की दिशा में भारत सरकार तैयारी कर रही है। ग्रेट निकोबार द्वीप समूह (जीएनआई) के समग्र विकास की परिकल्पना के तहत केंद्र सरकार ने चार प्रमुख परियोजनाओं को शामिल किया है। इनमें अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट (आईसीटीपी), संयुक्त उपयोग वाला ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा एवं नौसैनिक एयर स्टेशन, टाउनशिप तथा पावर प्लांट शामिल हैं।
रनवे के लिए 13,000 करोड़ की योजना
Great Nicobar Project : रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस परियोजनाओं के तहत, भारत सरकार नौसेना और आम नागरिकों के इस्तेमाल के लिए एक हवाई अड्डा और रनवे बनाने के लिए 13,000 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बनाई है। इस निवेश को रक्षा मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय दोनों मिलकर उठाएंगे। इस परियोजना के पांच वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है।
ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे और नौसैनिक वायु स्टेशन से उपस्थिति मजबूत होगी
Great Nicobar Project: ग्रेट निकोबार द्वीप (जीएनआई) में प्रस्तावित संयुक्त उपयोग वाले ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे और नौसैनिक वायु स्टेशन से भारत की इस क्षेत्र में निरंतर उपस्थिति मजबूत होगी। इसके साथ ही सैन्य संसाधनों की आवाजाही, अभियानों को समर्थन, समुद्री मार्गों की निगरानी, संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया तथा अग्रिम क्षेत्रों में रसद (लॉजिस्टिक्स) बनाए रखने की क्षमता भी बढ़ेगी।
ग्रेट निकोबार द्वीप समूह 6-डिग्री चैनल के निकट स्थित है, जो अदन की खाड़ी से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक फैले समुद्री व्यापार मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की सुरक्षा के लिए नौसेना का आईएनएस बाज सक्रिय
Great Nicobar Project: यह क्षेत्र इस समुद्री मार्ग से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दुनिया के कुल ऊर्जा व्यापार का लगभग दो-तिहाई और कंटेनर परिवहन का लगभग आधा हिस्सा इसी संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरता है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना का एयर स्टेशन आईएनएस बाज वर्ष 2012 से सक्रिय है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह एयरफील्ड प्रारंभ में 3,500 फीट लंबे रनवे के साथ शुरू हुआ था।
बाद में आवश्यकताओं के अनुरूप इसके विस्तार का कार्य जारी रहा। रनवे की लंबाई 3,500 फीट से बढ़ाकर 4,500 फीट कर दी गई थी, जबकि विस्तार योजना के तहत इसे 10,000 फीट तक बढ़ाने का प्रस्ताव था।
ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की स्थापना के लिए पांच वैकल्पिक स्थलों का मूल्यांकन
Great Nicobar Project : हालांकि, इसके लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और समुद्री क्षेत्र के पुनर्भरण (रीक्लेमेशन) की आवश्यकता थी। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की स्थापना के लिए आईएनएस बाज सहित पांच वैकल्पिक स्थलों का मूल्यांकन किया गया था। इस दौरान स्थलाकृति (टोपोग्राफी), हवाई नेविगेशन में संभावित बाधाएं, जनजातीय आबादी पर प्रभाव, वनस्पति एवं वन्यजीवों पर पड़ने वाले असर सहित कई अन्य मानकों को ध्यान में रखा गया।
विस्तृत अध्ययन के बाद गलाथिया खाड़ी को ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के लिए सबसे उपयुक्त स्थान के रूप में चुना गया। इसके अलावा, आईएनएस बाज को ब्राउनफील्ड परियोजना के रूप में विकसित करने की संभावना पर भी विचार किया गया, लेकिन कई व्यावहारिक सीमाओं के कारण इस विकल्प को छोड़ दिया गया।
भारतीय नौसेना का मौजूदा बुनियादी ढांचा छोटे रनवे के आसपास विकसित
Great Nicobar Project : इस क्षेत्र के उत्तर में 80 मीटर से अधिक ऊंची पहाड़ियां हैं, जिनके कारण बड़े विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए व्यापक स्तर पर पहाड़ी कटान और उथले समुद्री तट की ड्रेजिंग आवश्यक होती। साथ ही, भारतीय नौसेना का मौजूदा बुनियादी ढांचा छोटे रनवे के आसपास विकसित हो चुका है और कोड-4 श्रेणी के रनवे के लिए आवश्यक सुरक्षा मानक यहां उपलब्ध नहीं हैं।
30 किलोमीटर दूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित किया जाएगा
Great Nicobar Project : ऐसी स्थिति में मौजूदा सुविधाओं को हटाना पड़ता। इसके अतिरिक्त, भविष्य में विस्तार की संभावनाएं भी सीमित थीं और यह स्थान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए आवश्यक अवसंरचना को समायोजित करने में सक्षम नहीं था। अधिकारियों के अनुसार, यदि आईएनएस बाज को ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट के लिए चुना जाता तो जनजातीय आबादी, वनस्पति और वन्यजीवों पर अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव पड़ता। यही कारण है कि नई परियोजना के तहत आईएनएस बाज से लगभग 30 किलोमीटर दूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित किया जाएगा। –आईएएनएस डीकेपी/
Read More : मुख्यमंत्री के हाथों मेधावी छात्रा को मिली 2 लाख रुपये की सहायता
(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)















