नई दिल्ली: 20/06/2026: Formula 1 at India: देश के रफ्तार के शौकीनों और रेसिंग प्रेमियों के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। युवा मामले और खेल मंत्रालय ने भारत में ‘फॉर्मूला 1’ (F1) की दोबारा बहाली और देश के मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है।
मंत्रालय ने देश में इस रोमांचक खेल के लंबे समय तक चलने वाले विकास के लिए एक रोडमैप तैयार करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत एक खास टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।
Formula 1 at India: खेल मंत्री की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
यह महत्वपूर्ण फैसला केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया की अगुवाई में हुई एक विस्तृत और उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है। इस बैठक में खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ नेशनल मोटरस्पोर्ट्स फेडरेशन के प्रतिनिधि और अन्य प्रमुख हितधारक (स्टेकहोल्डर्स) शामिल हुए।
बैठक के दौरान भारत में मोटरस्पोर्ट्स की वर्तमान स्थिति, इसके विकास के रास्ते में आने वाली रुकावटों और चुनौतियों पर गहराई से चर्चा की गई।
Formula 1 at India: साथ ही, देश को अंतरराष्ट्रीय रेसिंग इवेंट्स के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
4 से 5 सदस्यों का पैनल करेगा विस्तृत आकलन
Formula 1 at India: बैठक के सबसे बड़े और अहम नतीजे के रूप में, मंत्रालय द्वारा 4 से 5 सदस्यों वाली एक टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया गया है। यह पैनल भारत के मोटरस्पोर्ट्स परिदृश्य का पूरी तरह से विस्तृत आकलन करेगा। टास्क फोर्स का मुख्य काम मौजूदा इकोसिस्टम का गहन अध्ययन करना होगा।
इसके अलावा, यह पैनल उन सभी इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे), ऑपरेशनल और पॉलिसी से जुड़े मुद्दों की बारीकी से जांच करेगा, जिन्हें इस खेल के टिकाऊ और मजबूत विकास के लिए हल किया जाना बेहद जरूरी है।
मेजबानी के आर्थिक और वैश्विक फायदों का मूल्यांकन
Formula 1 at India: यह टास्क फोर्स फॉर्मूला 1 सहित दुनिया के तमाम बड़े और प्रमुख इंटरनेशनल मोटरस्पोर्ट इवेंट्स की मेजबानी से देश को होने वाले व्यापक फायदों का भी मूल्यांकन करेगी।
इसके अंतर्गत रेसिंग इवेंट्स से होने वाले आर्थिक प्रभाव, देश में पर्यटन (टूरिज्म) की संभावनाओं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली पहचान और निवेश के उन तमाम अवसरों को परखा जाएगा जो ऐसे बड़े आयोजन भारत के लिए ला सकते हैं।
Formula 1 at India: खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा “फॉर्मूला 1 की वापसी के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास, एक व्यापक पॉलिसी फ्रेमवर्क और भारत में मोटरस्पोर्ट्स को मजबूत करने के लिए एक व्यवस्थित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल तैयार करने पर केंद्रित होगा।
समिति की सिफारिशों से तैयार होगी राष्ट्रीय पॉलिसी
Formula 1 at India: अपने विस्तृत आकलन और अध्ययन के आधार पर यह समिति उन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी जहां तुरंत दखल देने की जरूरत है।
इसके साथ ही वह देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की जरूरी सिफारिशें करेगी और भारत में मोटरस्पोर्ट्स के विस्तार को गति देने के लिए आवश्यक ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की रूपरेखा भी तैयार करेगी। समिति द्वारा तैयार की गईं ये सभी सिफारिशें बाद में खेल मंत्रालय को सौंप दी जाएंगी।
Formula 1 at India: टास्क फोर्स से प्राप्त इन महत्वपूर्ण जानकारियों और सुझावों का उपयोग करके खेल मंत्रालय कई स्तरों पर मोटरस्पोर्ट्स को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। मंत्रालय की योजना इसके लिए एक व्यापक राष्ट्रीय पॉलिसी फ्रेमवर्क (National Policy Framework) बनाने की है।
उम्मीद जताई जा रही है कि इस प्रस्तावित फ्रेमवर्क के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, नई प्रतिभाओं को तराशने (टैलेंट डेवलपमेंट), बड़े इवेंट्स की मेजबानी करने की क्षमताओं को बढ़ाने और इस खेल के लिए एक दीर्घकालिक व मजबूत गवर्नेंस मैकेनिज्म से जुड़े सभी मुद्दों का स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा।
जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने पर जोर
Formula 1 at India: भारत के भीतर मोटरस्पोर्ट्स के बड़े और उत्साही फैन बेस को देखते हुए सरकार का इरादा इस खेल को केवल एलीट (अभिजात वर्ग) प्रतियोगिताओं तक ही सीमित रखने का नहीं है, बल्कि इससे आगे ले जाने का है।
सरकार की योजनाओं में क्षेत्रीय और बिल्कुल जमीनी स्तर के मोटरस्पोर्ट सेंटर्स को मजबूत करना शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में रेसिंग सुविधाओं तक आम पहुंच को बेहतर बनाना है ताकि भविष्य के लिए टैलेंट की एक टिकाऊ और मजबूत पाइपलाइन तैयार की जा सके।
PPP मॉडल पर होगा काम
Formula 1 at India: इस पूरी योजना को बेहद असरदार और प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने के लिए मंत्रालय एक व्यवस्थित विकास रणनीति के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है।
माना जा रहा है कि सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट स्टेकहोल्डर्स (निजी हितधारकों) के बीच होने वाला यह आपसी सहयोग देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, वर्ल्ड-क्लास इवेंट मैनेजमेंट और निवेश जुटाने में सबसे अहम और बड़ी भूमिका निभाएगा।
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