रायपुर, 27 अक्टूबर: Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: माँ कामाख्या धर्मादा ट्रस्ट भारत वर्ष के संयोजन में आयोजित त्रिदिवसीय गीता ज्ञान अमृत वर्षा में आज कथा के द्वितीय दिवस गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी के मुखारविंद से श्रद्धालुओं ने गीता कथा का श्रवण किया। गुरुदेव ने गीता के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन जीने की कला के बारे में बताया।
जब आपकी भक्ति प्रेम के प्रति हो जाएगी, तो कृष्ण के प्रति भी अपने आप हो जाएगी
Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: गुरुदेव कथा के दौरान बताते हैं कि कृष्ण जी प्रेम हैं और प्रेम ही कृष्ण है। भगवान के कोई माता-पिता नहीं हैं, ईश्वर प्रेम से प्रकट होते हैं। जिस तरह परमात्मा अनंत हैं, उसी तरह प्रेम भी अनंत है।
गुरुजी ने भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन की कथा के माध्यम से बताया कि यदि ईश्वर को प्राप्त करना है और वास्तव में ईश्वर के दर्शन करने हैं, तो सबसे पहले चिंता को त्यागकर चिंतन कीजिए। ईश्वर का, ईश्वर की लीलाओं का और गुरुवाणी का चिंतन कीजिए।
गुरुदेव कहते हैं कि जो व्यक्ति जितना अधिक चिंतन करता है, वह उतना ही भगवान से जुड़ा हुआ होता है। वहीं, जो व्यक्ति चिंता में लगा रहता है, वह सांसारिक आडंबरों में फँसकर रह जाता है और ईश्वर से दूर हो जाता है। उन्होंने बताया कि जब आप सब कुछ त्यागकर ईश्वर की आराधना और चिंतन में लग जाते हैं, तब आपके पास चिंता करने के लिए कुछ नहीं बचता। तब स्वयं ईश्वर आपकी चिंता करते हैं और आपके सारे कार्य अपने आप बनने लगते हैं।
ईश्वर कहते हैं कि वे लोगों का कल्याण करने के लिए ही आए हैं, परंतु भक्त उनके समक्ष होने पर भी अनेक चिंताओं में लगे रहते हैं, जिसके चलते वे परमात्मा के करीब नहीं पहुँच पाते। यही कारण है कि व्यक्ति इस धरती पर बराबर पूजा-पाठ करने के बाद भी दुःखी रहता है।
गुरुजी कहते हैं कि ईश्वर की आराधना और प्रार्थना मन से की जाती है। मन में गाँठ नहीं रहनी चाहिए और आडंबर नहीं होना चाहिए।
Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: ईश्वर की आराधना में तल्लीन होकर उनकी उपासना करनी चाहिए। तुम्हें अपने होने का अहसास तक न रहे। जिस दिन तुम ‘मैं’ से बाहर निकल जाओगे, उस दिन परमब्रह्म को प्राप्त कर लोगे।
अर्जुन होने के लिए गुरुवाणी को अपने मन और हृदय में बसाकर उसका पालन करना होता है
Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया, तब अर्जुन ने उसे ग्रहण किया और उसका अनुसरण करते हुए उसके पालन की ओर अग्रसर हुए।
उनके द्वारा किया गया यही कार्य उनके मन में परमब्रह्म के दर्शन करने का भाव प्रकट करता है और वे भगवान श्रीकृष्ण से कहते हैं, “हे माधव, कृपया मुझे उस रूप के दर्शन कराइए, जो आप वास्तव में हैं।”
देखना है मुझे, तो इस सृष्टि की भव्यताओं और दिव्यताओं में देखो और प्रसन्नता में देखो
Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: गुरुदेव कहते हैं कि भगवान ने अर्जुन से कहा, “देखना है मुझे, तो इस सृष्टि की भव्यताओं और दिव्यताओं में देखो और प्रसन्नता में देखो।”
सूरज की दिव्यता को देखो, ज्योति को देखो, प्रकाश को देखो, चंद्रमा को देखो, मरीचि को देखो, शशि को देखो, गंगा को देखो। जिस भी श्रेष्ठ और दिव्य चीज़ को देखो, वहाँ मैं ही हूँ। अर्थात् यहाँ श्रीकृष्ण कहते हैं कि प्रत्येक कल्याणकारी चीज़ में मैं ही हूँ। मुझे मन से, भक्तिभाव से, जैसा चाहो, वैसे देखो।
Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: हर मनुष्य को बचपन से ही अपने जीवन का अंधकार हरने हेतु ज्ञान धारण करना चाहिए
गुरुजी बताते हैं कि हनुमान जी ने बाल्यकाल में ही सूरज को अपने मुख में समाहित कर लिया था। सूरज ज्ञान का प्रतीक है और हनुमान जी ने बाल्यकाल में ही अपने भीतर जो भी थोड़ा-बहुत अज्ञान था, उसे नष्ट कर दिया। उसी प्रकार आज हम सभी को भी शास्त्ररूपी सूरज और गुरुवाणी को धारण करना चाहिए। गुरुचरण में जाना चाहिए।
जिस प्रकार दक्ष प्रजापति के श्राप के चलते विलुप्त होते चाँद को भगवान शिव ने अपने शीश पर स्थान देकर उसकी रक्षा की, उसी प्रकार गुरुजन भी अबोध शिष्यों को अपने चरणों में स्थान देकर सारी बुराइयों और कुप्रवृत्तियों आदि से उनकी रक्षा करते हैं।
जैसे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान देकर उसे महाभारत के रण में दुनियाभर की मोह-माया आदि से बाहर निकालकर मार्गदर्शन दिया और अंत तक अर्जुन के साथ रहे, उसी प्रकार गुरु भी अपने शिष्यों के साथ रहते हैं, बशर्ते आप गुरुवाणी का अक्षरशः अनुसरण करें और उसका पालन करें।
Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: गीता कथा के माध्यम से श्री संकर्षण शरण जी गुरुजी ने बताया कि किस प्रकार जीवनरूपी महाभारत में ईश्वर के चरणों और गुरुचरण में रहकर तथा उनकी बातों का पालन करके अपना जीवन सफल बनाया जा सकता है।

छ.ग. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने कथा श्रवण कर आशीष प्राप्त किया
Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: आज गुरुजी श्री संकर्षण शरण जी के दर्शन प्राप्त करने एवं कथा श्रवण करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा कथा स्थल पर पहुँचीं । उन्होंने भी गुरुदेव के श्रीमुख से कथा श्रवण किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
मौसम खराब होने के बाद भी श्रद्धालु भारी संख्या में कथा स्थल पर पहुँचे
आज मौसम खराब होने के बाद भी श्रद्धालु भारी संख्या में कथा स्थल पर पहुँचे और कथा का श्रवण किया। अंत तक कथा स्थल ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।

आज की कथा में भी आरती के उपरांत संस्था द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें वासुदेव मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल से आए डॉक्टरों के माध्यम से कथा में पधारे भक्तों ने स्वास्थ्य लाभ एवं परामर्श प्राप्त किया।
Gita Gyan Amrit Varsha Day 2: संस्था की मीडिया प्रभारी श्रीमती कल्पना शुक्ला ने बताया कि कल, 29 अक्टूबर को इस त्रिदिवसीय कथा का अंतिम दिन होगा। साथ ही, 30 अक्टूबर को प्रातः 7 बजे हवन के साथ कथा का समापन होगा।
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