जीवन के महाभारत पर विजय प्राप्त करने के लिए अपने भीतर के कौरवों को त्यागना आवश्यक है-गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी

गीता कथा का श्रवण करने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Gita Gyan Amrit Varsha Day 1
Gita Gyan Amrit Varsha Day 1

रायपुर, 27 अक्टूबर। Gita Gyan Amrit Varsha Day 1: माँ कामाख्या धर्मादा ट्रस्ट भारत वर्ष के संयोजन में आयोजित त्रिदिवसीय गीता ज्ञान अमृत वर्षा के प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं ने प्रयागराज की पावन भूमि से पधारे श्री संकर्षण शरण जी (गुरूजी) के मुखारविंद से गीता कथा का श्रवण किया।

गुरुदेव ने कथा के दौरान बताया कि आडंबर, अहंकार, क्रोध, लोभ और लालच जैसी प्रवृत्तियों से जुड़ाव व्यक्ति को ईश्वर के करीब आने से रोकता है। व्यक्ति अक्सर सही दिशा में आगे नहीं बढ़ता और गलत राह को छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं होता। यही प्रवृत्ति उसे पथभ्रष्ट कर देती है। और ईश्वर से दूर कर देती है।

Gita Gyan Amrit Varsha Day 1: भीष्म पितामह भ्रम के प्रतीक हैं

गुरुदेव ने कथा में बताया कि भीष्म पितामह भ्रम के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भीष्म पितामह हर परिस्थिति में अपनी ही परिभाषाएँ गढ़कर स्वयं को सही सिद्ध करने में लगे रहे।

मोह-माया से ग्रसित होने के कारण वे निष्पक्ष निर्णय नहीं ले सके और लगातार एक के बाद एक गलतियाँ दोहराते गए। उन्होंने न खुलकर कौरवों की ओर से युद्ध लड़ा, न खुलकर पांडवों के साथ आ सके।

जीवन के महाभारत पर विजय प्राप्त करने के लिए अपने भीतर के कौरवों को त्यागना आवश्यक है

Gita Gyan Amrit Varsha Day 1: गुरुदेव ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यक्ति के भीतर कोई न कोई प्रवृत्ति शासन करती रहती है। कभी लोभ रूपी दुर्योधन, कभी वासना रूपी दुशासन, कभी भ्रम रूपी भीष्म, तो कभी द्वंद्व रूपी द्रोण उसके निर्णयों को प्रभावित करते हैं। यदि व्यक्ति चाहता है कि उस पर भगवान की कृपा फलीभूत हो, तो उसे इन कुप्रवृत्तियों का त्याग कर सद्गुणों को अपनाना होगा।

गुरुदेव ने कहा कि व्यक्ति के भीतर सभी भावों और गुणों का संतुलन होना आवश्यक है। यही संतुलन उसे ईश्वर के करीब ले जाता है। जीवन में यह संतुलन तभी स्थापित हो सकता है, जब व्यक्ति गुरु की शरण में जाकर उनके दिशा-निर्देशों के अनुसार चले।

जिस प्रकार अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन किया, उसी प्रकार व्यक्ति को भी गुरु के मार्गदर्शन में अपने जीवन को दिशा देनी चाहिए।

Gita Gyan Amrit Varsha Day 1:  क्योंकि गुरु अपने शिष्य को सुमार्ग पर अग्रसर करते हैं और गुरुआज्ञा पालन करने वाले शिष्यों को कोई बुराई नहीं ग्रास सकती।

जीवन को सही दिशा देनी है, तो सबसे पहले प्रकृति के तीनों गुणों को जानिए – श्री संकर्षण शरण जी

Gita Gyan Amrit Varsha Day 1: गुरुदेव ने बताया कि व्यक्ति का जीवन असंतुलित इसलिए हो जाता है, क्योंकि वह प्रकृति के तीनों गुणों—तमोगुण, रजोगुण और सत्व गुण—के बीच संतुलन बनाए नहीं रख पाता।

कभी उस पर तमोगुण हावी हो जाता है, तो कभी रजोगुण या अत्यधिक सत्त्वगुण। गुणों का असंतुलन व्यक्ति को उसके पथ से भटका देता है और वह अपने कर्मों के उचित फल प्राप्त नहीं कर पाता, क्योंकि वह समुचित ज्ञान के अभाव में कर्म करता है।

गुरुदेव ने कहा कि जब व्यक्ति गुरु रूपी ज्ञान-ज्योति के सान्निध्य में आता है और उनके उपदेशों के अनुसार प्रकृति के इन तीनों गुणों में संतुलन स्थापित करना सीख लेता है, तो उसका जीवन स्वतः ही सही दिशा में आगे बढ़ने लगता है। इस प्रकार वह परिस्थितियों के अनुरूप तीनों गुणों का उचित उपयोग करना सीख जाता है।

Gita Gyan Amrit Varsha Day 01
Gita Gyan Amrit Varsha Day 01

Gita Gyan Amrit Varsha Day 1: कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी के श्रीमुख से गीता ज्ञान प्राप्त करते रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा में सहभागिता कर इसका लाभ लिया।

माँ कामाख्या ट्रस्ट द्वारा आयोजित स्वास्थ शिविर में वासुदेव मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क चिकित्सा एवं परामर्श प्रदान किया गया 

Gita Gyan Amrit Varsha Day 1: अंत में आरती के उपरांत माँ कामाख्या धर्मादा ट्रस्ट भारत वर्ष द्वारा आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में श्रद्धालुओं ने वासुदेव मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल से आए चिकित्सकों से स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्राप्त किया तथा स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया।

कथा की आयोजिका श्रीमती पात्रा एवं आयोजक मंडल ने बताया कि यह गीता कथा आज 27 से प्रारंभ हुई और ये 29 अक्टूबर तक चलेगी तथा 30 अक्टूबर को भव्य हवन के समापन होगा ।

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