गर्मियों के साथ बदलेगी बाबा महाकाल की दिनचर्या, दो माह अर्पित किया जाएगा शिव जलधारा

garmiyon baba mahakal
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 उज्जैन, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। garmiyon baba mahakal : उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी कहा जाता है, जहां दर्शन मात्र से ही अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और बुरा समय भी अच्छा समय में परिवर्तित हो जाता है।

विदेश से भी बाबा के दर्शन के लिए आते हैं भक्त

garmiyon baba mahakal :  यही कारण है कि भक्त न सिर्फ देश से बल्कि विदेश से भी बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। अब गर्मियों की शुरुआत के साथ ही बाबा की पूजन प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। बाबा को बढ़ते तापमान से बचाने के लिए मंदिर में खास प्रबंध किए जा रहे हैं।

बाबा को गर्मी से राहत प्रदान करने के लिए प्राचीन परंपरा का पालन

garmiyon baba mahakal :  मंदिर के पुजारी ने बताया कि बाबा को गर्मी से राहत प्रदान करने के लिए प्राचीन परंपरा का पालन शुरू होने जा रहा है, जिसमें कई नदियों का पवित्र जल मिलाकर बाबा को अर्पित किया जाएगा। उन्होंने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, “यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

बाबा पर निरंतर जल की धारा पड़ती रहे

garmiyon baba mahakal :  इसमें बाबा को बढ़ते तापमान से बचाने के लिए और आनंद देने के लिए शीतल जल अर्पित किया जा रहा है। बाबा ने अपने कंठ में हलाहल ग्रहण किया है, जिसकी वजह से उनका तापमान गर्म रहता है। यही कारण है कि पुजारी मिलकर ऐसी व्यवस्था करते हैं, जिससे बाबा पर निरंतर जल की धारा पड़ती रहे।

बाबा के ताप को कम करने के लिए ठंडी वस्तुओं का भोग

garmiyon baba mahakal :  ” उन्होंने आगे कहा कि बाबा के ताप को कम करने के लिए ठंडी वस्तुओं का भोग लगाया जाता है और ठंडी वस्तुओं का लेपन भी किया जाता है, जिससे भगवान को हमेशा शीतलता और सुख मिले। पुजारी ने बताया कि वैशाख और ज्येष्ठ के माह में तापमान सबसे अधिक होता है और ऐसे में बाबा को शिव जलधारा अर्पित की जाती है। वैसे तो रोज ही बाबा को जलधारा अर्पित की जाती है, लेकिन शिव जलधारा विशेष है।

दो माह बाबा पर मटके की जलधारा अर्पित

garmiyon baba mahakal :  इसमें दो माह बाबा पर मटके की जलधारा अर्पित होती है, जिसमें मंदिर के तीर्थ कुंड का जल होता है। तीर्थ कुंड में पहले से ही सभी पवित्र नदियों का जल समाहित है। ऐसे में दो माह तक मिट्टी के मटके के जरिए बाबा को शीतलता दी जाती है। उन्होंने बताया कि ऐसा करने से कई यज्ञों का फल मिलता है और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। –आईएएनएस पीएस/एबीएम


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(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)