मुंबई, 23 मई 2026। Majrooh Sultanpuri a Phenominal Writer: फिल्म संगीत के सुनहरे दौर के गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी आज भी अपने गीतों के जरिए दिलों पर राज कर रहे हैं। उनका सफर एक आम शायर से शुरू होकर भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित गीतकार तक पहुंचा।
Majrooh Sultanpuri a Phenominal Writer: उनकी शायरी सुनकर फिल्मकार एआर कारदार इतने प्रभावित हुए थें
इस सफर की शुरुआत हुई एक मुशायरे से, जहां उनकी शायरी सुनकर फिल्मकार एआर कारदार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें फिल्म जगत में लाने के लिए संगीतकार नौशाद से मुलाकात तक करवा दी।
मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म 1 अक्टूबर 1919 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के निजामाबाद में हुआ था। उनका असली नाम असरार उल हसन खान था। पिता पुलिस विभाग में थे और चाहते थे कि बेटा पारंपरिक शिक्षा हासिल करे।
इसलिए उन्हें मदरसे में दाखिला दिलवाया गया, जहां उन्होंने अरबी और फारसी की पढ़ाई की और आलिम की उपाधि प्राप्त की। बाद में उन्होंने लखनऊ के तक्मील उल तिब्ब कॉलेज से यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई की और हकीम बन गए।
मुशायरे ने उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया
Majrooh Sultanpuri a Phenominal Writer: लेकिन उनकी शायराना फितरत उन्हें चिकित्सा से ज्यादा शायरी की ओर खींच लाई। सुल्तानपुरी में रहते हुए उन्होंने गजलें लिखना शुरू किया और मुशायरों में हिस्सा लेने लगे। इस दौरान वे शायर जिगर मुरादाबादी के सानिध्य में भी रहे।
हालांकि, मुशायरे ने उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया। साल 1945 में मजरूह सुल्तानपुरी बॉम्बे आए और साबू सिद्दीकी इंस्टीट्यूट में एक मुशायरे में अपनी शायरी सुनाई।
उनकी गहरी और प्रभावशाली शायरी ने वहां मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उस मुशायरे में मौजूद फिल्म मेकर एआर कारदार भी थे,जो उनकी शायरी सुनकर बेहद प्रभावित हुए। कारदार ने जिगर मुरादाबादी के माध्यम से मजरूह से संपर्क किया और 1946 में उन्हें संगीतकार नौशाद साहब से मिलवाया।
1950 से 1960 के दशक तक मजरूह सुल्तानपुरी फिल्म इंडस्ट्री में चमकते रहे
Majrooh Sultanpuri a Phenominal Writer: इसी मुलाकात के बाद मजरूह को फिल्म ‘शाहजहां’ के लिए गीत लिखने का मौका मिला, जिसमें केएल सहगल मुख्य भूमिका में थे।
इस फिल्म से मजरूह सुल्तानपुरी की फिल्मी दुनिया में एंट्री हो गई। 1950 से 1960 के दशक तक मजरूह सुल्तानपुरी फिल्म इंडस्ट्री में चमकते रहे।
उन्होंने नौशाद, मदन मोहन, एसडी बर्मन, रोशन, ओपी नैयर, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, आरडी बर्मन, राजेश रोशन, आनंद-मिलिंद, जतिन-ललित और एआर रहमान जैसे संगीतकारों के साथ काम किया।
उनके लिखे गीत आज भी लोगों की जुबां पर हैं
Majrooh Sultanpuri a Phenominal Writer: उनके लिखे गीत जैसे ‘चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे’, ‘दिल देके देखो दिल देके देखो’, ‘रहे न रहे हम’, ‘माना जनाब ने पुकारा नही’, ‘तेरी बिंदिया रे’ और ‘लेकर हम दीवाना दिल’ आज भी लोगों की जुबां पर हैं।
1965 में फिल्म ‘दोस्ती’ के गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। वर्ष 1993 में उन्हें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
मजरूह सुल्तानपुरी वामपंथी विचारधारा के समर्थक थे। उन्होंने 1949 में बलराज साहनी के साथ कुछ समय जेल भी काटा।
Majrooh Sultanpuri a Phenominal Writer: परिस्थिति कसी भी हो वह कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करते थे। 24 मई 2000 को निमोनिया की वजह से उनका निधन हो गया। –आईएएनएस एमटी/डीकेपी
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