मदुरै में भव्य चिथिरई उत्सव: वैगई नदी में भगवान कल्लाझगर ने किया प्रवेश, देखने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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madurai bhavya chithirai utsav
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मदुरै, 1 मई (आईएएनएस)। madurai bhavya chithirai utsav : तमिलनाडु के मदुरै में विश्व प्रसिद्ध चिथिरई उत्सव पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु शहर में उमड़ रहे हैं।

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वैगई नदी में भगवान कल्लाझगर का दिव्य प्रवेश

madurai bhavya chithirai utsav : यह ऐतिहासिक उत्सव शैव और वैष्णव परंपराओं के बीच सदियों पुरानी धार्मिक एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। उत्सव के दौरान वैगई नदी के तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान कल्लाझगर ने सुबह 5.35 बजे से 5.55 बजे के बीच एक सुनहरे घोड़े पर सवार होकर वैगई नदी में प्रवेश किया।

सदियों पुरानी परंपरा का अद्भुत दृश्य, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

madurai bhavya chithirai utsav : भगवान कल्लाझगर के वैगई नदी में प्रवेश को देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त वैगई नदी के पास इकट्ठा हुए। हाथों में दीपक लिए भक्तों ने नदी किनारे आयोजित पवित्र अनुष्ठानों में आस्था के साथ भाग लिया और पूजा-अर्चना की। वहीं, परमकुडी में सुंदरराजा पेरुमल के औपचारिक प्रवेश के अवसर पर हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए।

वैगई नदी किनारे आस्था का महापर्व

madurai bhavya chithirai utsav : इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों और परंपरागत आयोजनों का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर एआईएडीएमके के तिरुप्परनकुंद्रम से उम्मीदवार राजन चेल्लाप्पा ने कहा कि मदुरै का यह प्रसिद्ध उत्सव पूरे वैभव के साथ जारी है और नदी में प्रवेश का कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र है।

भगवान के दर्शन करना अत्यंत संतोषजनक और दिव्य अनुभव

madurai bhavya chithirai utsav : एक श्रद्धालु ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सुबह से इंतजार के बाद भगवान के दर्शन करना अत्यंत संतोषजनक और दिव्य अनुभव रहा। एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “मैं मूल रूप से मदुरै का ही रहने वाला हूं। मैं यहां वापस आता रहता हूं। इसलिए, इस बार मुझे यहां बहुत ज्यादा विकास और बदलाव देखने को मिल रहा है। दूसरी बात, यहां एक पुल भी बन गया है।

पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था भी बहुत अच्छी

madurai bhavya chithirai utsav : तीसरी बात, पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था भी बहुत अच्छी है।” चिथिरई उत्सव के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सुचारू रूप से पूजा-अर्चना कर सकें। पारंपरिक रूप से, इस उत्सव की शुरुआत मीनाक्षी अम्मन मंदिर से होती है और बाद में यह लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित कल्लाझगर मंदिर तक पहुंचता है। यह आयोजन हिंदू पूजा-पद्धति की दो प्रमुख धाराओं के मिलन का प्रतीक है।

मीनाक्षी मंदिर में चितिरई उत्सव की शुरुआत

madurai bhavya chithirai utsav : मीनाक्षी मंदिर में चितिरई उत्सव की शुरुआत 19 अप्रैल को ध्वजारोहण की रस्म के साथ हुई थी। कल्लाझगर मंदिर में उत्सव की शुरुआत 27 अप्रैल को हुई। भव्य चिथिराई उत्सव का समापन 6 मई को पारंपरिक समापन समारोहों के साथ होगा। –आईएएनएस डीसीएच/


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(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)