नई दिल्ली, 29 अगस्त । fssai ki ek aur badi karravai : भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य गुणवत्ता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश के दो प्रमुख मसाला ब्रांड एवरेस्ट और लालजी गोधू की कम्पाउंडेड यानी मिश्रित हींग की बिक्री पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई है, जब जांच में दोनों कंपनियों के हींग उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
एफएसएसएआई की दो प्रमुख कंपनी के खिलाफ कार्रवाई
fssai ki ek aur badi karravai : एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि एम/एस एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस लालजी गोधू एंड कंपनी के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई करते हुए उनके हींग उत्पादों की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
The Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) has taken regulatory enforcement action under the Food Safety and Standards Act, 2006, issuing Prohibition Orders against M/s Everest Food Products Private Limited and M/s Laljee Godhoo and Company #FSSAINotice #FSSAIAction pic.twitter.com/afIwTFCuHb
— FSSAI (@fssaiindia) August 29, 2026
कार्रवाई केवल हींग उत्पादों तक सीमित
fssai ki ek aur badi karravai : हालांकि प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल हींग उत्पादों तक सीमित है और कंपनियों के अन्य मसाला उत्पाद जैसे गरम मसाला, अंडा करी मसाला या चिकन करी मसाला पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इस मामले की शुरुआत एक उपभोक्ता द्वारा हींग की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराने के बाद हुई। शिकायत मिलने के बाद एफएसएसएआई ने बाजार में उपलब्ध विभिन्न हींग ब्रांडों की व्यापक जांच शुरू की।
खाद्य सुरक्षा विभाग के सहयोग से सैंपलिंग
fssai ki ek aur badi karravai : शुरुआती प्रयोगशाला परीक्षणों में एवरेस्ट और लालजी गोधू की कम्पाउंडेड हींग गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद दोनों कंपनियों की मुंबई स्थित केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त निर्माण इकाइयों से नमूने लेकर विस्तृत परीक्षण कराया गया। साथ ही, गुजरात के उमरगांव स्थित एवरेस्ट की एक अन्य विनिर्माण इकाई पर राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग के सहयोग से भी सैंपलिंग की गई।
fssai ki ek aur badi karravai : जांच में लिए गए सभी नमूनों में गंभीर गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आईं। खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, कम्पाउंडेड हींग बनाने के लिए शुद्ध हींग को गोंद, स्टार्च और आटे के साथ मिलाया जाता है। लेकिन इसमें कम से कम 5 प्रतिशत अल्कोहल-सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट होना अनिवार्य है, जो असली हींग की उपस्थिति का प्रमुख संकेतक माना जाता है।
जांच में उत्पादों में महज 0 से 3% असली हींग मिली
fssai ki ek aur badi karravai : जांच के दौरान पाया गया कि दोनों कंपनियों के उत्पादों में यह मात्रा केवल 0 से 3 प्रतिशत के बीच थी, जिसका अर्थ है कि उत्पादों में असली हींग की मात्रा निर्धारित मानकों की तुलना में काफी कम थी और उपभोक्ताओं को अपेक्षित गुणवत्ता का उत्पाद नहीं मिल रहा था। जांच के दौरान लालजी गोधू एंड कंपनी की इकाई से प्राप्त शुद्ध हींग की छह अलग-अलग किस्मों का भी परीक्षण किया गया। नियमों के अनुसार शुद्ध हींग में स्टार्च की मात्रा 1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
एवरेस्ट और लालजी गोधू की कम्पाउंडेड हींग पर देशभर में रोक
fssai ki ek aur badi karravai : हालांकि प्रयोगशाला जांच में इन नमूनों में स्टार्च की मात्रा 15 प्रतिशत से 32 प्रतिशत तक पाई गई, जो निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकेत देता है कि उत्पाद में मिलावट या गुणवत्ता संबंधी गंभीर कमी मौजूद थी। इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए एफएसएसएआई ने एवरेस्ट और लालजी गोधू की कम्पाउंडेड हींग की बिक्री और वितरण पर देशभर में प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है।
एफएसएसएआई लगातार ऐसे उत्पादों की निगरानी कर रहा है
fssai ki ek aur badi karravai : साथ ही दोनों कंपनियों को यह बताने के लिए कहा गया है कि वे इन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठा रही हैं और भविष्य में उत्पादों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कैसे बनाएंगी। प्राधिकरण ने कंपनियों को बाजार में उपलब्ध संबंधित बैचों को स्वेच्छा से वापस मंगाने पर भी विचार करने की सलाह दी है, ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। गौरतलब है कि प्राधिकरण लगातार ऐसे उत्पादों की निगरानी कर रहा है जो निर्धारित मानकों का पालन नहीं करते हैं।
जांच के बाद त्वरित कार्रवाई
fssai ki ek aur badi karravai : इस मामले में भी जांच के बाद त्वरित कार्रवाई कर यह संदेश दिया गया है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय लाइसेंस, लेबलिंग और गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर ध्यान दें तथा किसी भी संदिग्ध उत्पाद की शिकायत संबंधित अधिकारियों को करें।
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