सुविचार 1 नवंबर । dharm charcha me guruvani : परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने धर्म चर्चा के दौरान जीवन में कर्म, प्रयास और महत्वाकांक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य को निरंतर कर्म करते रहना चाहिए और अपने प्रयासों में कभी कमी नहीं आने देनी चाहिए। महत्वाकांक्षा अवश्य होनी चाहिए, लेकिन कर्म का उद्देश्य केवल फल प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। जब व्यक्ति अपने कर्म के प्रति पूरी निष्ठा और प्रगाढ़ता रखता है, तो उसका फल स्वतः मिलता चला जाता है।
गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने एक प्रेरक प्रसंग सुनाया
dharm charcha me guruvani : गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने एक प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति अपनी समस्या लेकर एक महात्मा के पास पहुंचा। महात्मा ने उससे कुछ देर प्रतीक्षा करने को कहा और बोले कि पहले मैं स्नान कर लूं, फिर तुम्हारी समस्या सुनूंगा। इसके बाद महात्मा ने कहा कि वे तीन बाल्टी पानी से स्नान करेंगे।
महात्मा कुएं से बाल्टी में पानी निकालकर स्नान करने लगे
dharm charcha me guruvani : महात्मा कुएं से बाल्टी में पानी निकालकर स्नान करने लगे। उन्होंने पहली बाल्टी का पानी सिर पर डाला, लेकिन एक बूंद पानी भी नहीं गिरा। फिर दूसरी बार कुएं से पानी निकाला और सिर पर डाला, लेकिन इस बार भी पानी नहीं गिरा। जब महात्मा तीसरी बार पानी निकालने के लिए कुएं की ओर बढ़े, तो वह व्यक्ति अधीर हो गया। उसने कहा, “बाबा! इस बाल्टी में तो पेंदा ही नहीं है, इसमें पानी कैसे रुकेगा? आप बार-बार पानी निकाल रहे हैं, लेकिन इससे स्नान कैसे होगा?”
महात्मा ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं तो तुम्हें यही समझाना चाहता था। इस बाल्टी में पेंदा नहीं है, इसलिए इसमें पानी नहीं रुकता। इसी तरह तुम्हारे भीतर भी पेंदा नहीं है। तुम इतना भी इंतजार नहीं कर पाए कि मैं तीसरी बार स्नान कर लूं। अभी तो तुम थोड़ी देर भी धैर्य नहीं रख सके और अधीर हो गए।”
समस्याओं का समाधान जानने के लिए एक महात्मा के पास पहुंचा
dharm charcha me guruvani : वह व्यक्ति अपनी पारिवारिक और घरेलू समस्याओं का समाधान जानने के लिए एक महात्मा के पास पहुंचा। उसने महात्मा को बताया कि उसके परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं। इसके अलावा घर में गाय, भैंस, बकरी, कुत्ते और कई अन्य पालतू जानवर भी हैं। घर में इतनी सारी चीजें और जानवर होने के कारण काफी परेशानी रहती है। उसने बाबा से अपनी समस्याओं का समाधान पूछा।
महात्मा ने उसकी बात ध्यान से सुनी और कहा, “ठीक है, आज एक काम करो। घर के बाहर जितने भी जानवर और सामान हैं, उन सभी को आज रात अपने कमरे के अंदर रख लो। कल सुबह मेरे पास आना।”
व्यक्ति ने बाबा की बात मान ली। वह घर पहुंचा और गाय, भैंस, बकरी, कुत्ते सहित बाहर रखे सभी सामान को कमरे के अंदर ले आया। अब एक ही कमरे में पत्नी, चार बच्चे और इतने सारे जानवरों के साथ परिवार के लिए बैठना तक मुश्किल हो गया।
पूरी रात परिवार के लोग परेशान रहे
dharm charcha me guruvani : कोई जानवर आवाज कर रहा था, तो कोई इधर-उधर घूम रहा था। किसी ने गोबर कर दिया, तो कोई गंदगी फैलाने लगा। पूरी रात परिवार के लोग परेशान रहे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर बाबा ने उन्हें कैसी सजा दे दी है। रातभर किसी को ठीक से नींद नहीं आई।
महात्मा की बात मानी और सामान को कमरे से बाहर कर दिया
dharm charcha me guruvani : सुबह होते ही वह व्यक्ति बिना देर किए बाबा के पास पहुंचा और बोला, “बाबा जी ! पूरी रात हम लोग सो भी नहीं पाए। कमरे में इतनी भीड़ और परेशानी थी कि समझ ही नहीं आ रहा था क्या करें।” बाबा ने उसकी बात सुनकर कहा, “ठीक है, अब घर जाओ और जितने भी जानवरों तथा सामान को कमरे के अंदर रखा है, उन सभी को बाहर उनकी पुरानी जगह पर छोड़ दो। इसके बाद कल सुबह मेरे पास आना।”
dharm charcha me guruvani : व्यक्ति ने महात्मा की बात मानी और घर जाकर सभी जानवरों और सामान को कमरे से बाहर कर दिया। रात हुई तो वह अपने परिवार के साथ उसी कमरे में सोने चला गया। लेकिन इस बार उसे पहले से कहीं अधिक सुकून और शांति महसूस हुई। जिस कमरे में पिछली रात सोना भी मुश्किल हो गया था, उसी कमरे में आज उसे बहुत अच्छी नींद आई। उसे ऐसा लगा मानो घर की सारी परेशानियां खत्म हो गई हों।
dharm charcha me guruvani : उस रात व्यक्ति को बहुत अच्छी और सुकून भरी नींद आई। सुबह कब हुई, उसे पता ही नहीं चला। वह देर तक आराम से सोता रहा। उसे ऐसा महसूस हुआ, जैसे लंबे समय बाद उसे चैन और सुकून मिला हो। शाम को वह खुशी-खुशी बाबा के पास पहुंचा और बोला, “बाबा जी! अब मेरी सारी परेशानियां दूर हो गई हैं। घर में सब कुछ पहले जैसा ही है, लेकिन अब कोई परेशानी महसूस नहीं होती। अब तो बहुत आराम है।”
बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बस, ऐसे ही आराम से रहो और जो तुम्हारे पास है। उनका संकेत था कर्म करो ”
गुरुजी ने कहा कि जो प्राप्त है, वही पर्याप्त है
dharm charcha me guruvani : गुरुजी ने कहा कि इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि जो प्राप्त है, वही पर्याप्त है। जीवन में आगे बढ़ने और कुछ बेहतर हासिल करने की महत्वाकांक्षा होनी चाहिए। जो व्यक्ति कर्म नहीं करना चाहता और प्रयासों से बचता है, वही अक्सर अपनी असफलता का कारण भाग्य और किस्मत को कोसता है। अकर्मण्य व्यक्ति ही इस तरह की बातें करता है, जबकि कर्मशील व्यक्ति अपने प्रयासों से सफलता का मार्ग बनाता है।
असफलताओं के लिए नियति को कोसना कायरता है
dharm charcha me guruvani : गुरुजी ने कहा कि कर्म करने वाला व्यक्ति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ हर परिस्थिति में प्रयास करता है। ऐसे व्यक्ति को कई बार उसके प्रयासों से उम्मीद से भी अधिक फल प्राप्त होता है। कर्म न करना, कर्म से भागना और अपनी असफलताओं के लिए नियति को कोसना कायरता और तमोगुणी प्रवृत्ति के लक्षण हैं। ऐसे लोग अपनी बातों से सामने वाले को भले ही चुप करा दें, लेकिन भगवान और धर्मगुरु के समक्ष अपने कर्मों की सच्चाई नहीं छिपा सकते। जो लोग निंदा, शिकवा और शिकायतों में उलझे रहते हैं, वे अक्सर इसी तरह की बातें करते हैं।
कर्म के प्रति लगन नहीं रहती, वहां व्यक्ति अकर्मण्यता को ही उचित ठहराने लगता
dharm charcha me guruvani : गुरुजी ने आगे कहा कि आज मनुष्य अपने अनमोल जीवन को इसी तरह व्यर्थ गंवा रहा है। व्यक्ति के कर्मों में न तो पहले जैसी तल्लीनता रह गई है और न ही अपने लक्ष्य के प्रति प्रगाढ़ता। अपनी ही सोच और समझ के कारण वह जीवन के अवसरों को बर्बाद कर देता है। जहां महत्वाकांक्षा का अभाव होता है और कर्म के प्रति लगन नहीं रहती, वहां व्यक्ति अकर्मण्यता को ही उचित ठहराने लगता है।
जीवन में कर्म की गति बनी रहनी चाहिए
dharm charcha me guruvani : गुरुजी ने कहा कि जीवन में कर्म की गति बनी रहनी चाहिए और महत्वाकांक्षा भी होनी चाहिए। ‘जो प्राप्त है, वही पर्याप्त है’ का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि व्यक्ति कर्म करना छोड़ दे या अकर्मण्य हो जाए। मनुष्य को सदैव कर्मशील रहना चाहिए और अपने प्रयासों में निरंतरता बनाए रखनी चाहिए।
जीवन में कुछ कार्य नियति के अनुसार ही होते
dharm charcha me guruvani : गुरुजी ने कहा कि जीवन में कुछ कार्य नियति के अनुसार ही होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में जो हो रहा है, उसे सहज भाव से स्वीकार करना चाहिए। इसे समझाते हुए उन्होंने नदी की धारा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नदी की धारा में बहता हुआ तिनका विपरीत दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करे, तो वह सफल नहीं हो सकता। वह तभी आगे बढ़ पाएगा, जब नदी की धारा के साथ बहेगा। इसी प्रकार मनुष्य को भी जहां परिस्थितियां उसके नियंत्रण से बाहर हों, वहां नियति को स्वीकार करते हुए समय और परिस्थितियों के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।
जहां जरूरी हो, वहां संघर्ष करें : गुरुजी
dharm charcha me guruvani : इसी तरह जो हो रहा है उसको होने देना चाहिए वहां पर आनंद में झूमते हुए पहुंच जाना चाहिये । जहां संघर्ष की आवश्यकता है वही संघर्ष करना चाहिए, धर्म चर्चा गुरुवाणी विचार वहां पर कटाक्ष करने की आवश्यकता नहीं है यहां संघर्ष करने की आवश्यकता नहीं यहां पर विचार की धारा में बह जाने की आवश्यकता है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में भौतिक जीवन में बहुत ज्यादा संघर्ष की आवश्यकता है।
‘प्राप्त और पर्याप्त’ का भाव रखें, लेकिन कर्म और अवसरों के प्रति सजग रहें : गुरुजी
dharm charcha me guruvani : गुरुजी ने कहा कि जीवन के इस सिद्धांत को जो व्यक्ति समझ लेता है, वह हर चुनौती को समझदारी से स्वीकार कर आगे बढ़ता है, न कि बैठकर तर्क-वितर्क और शिकायतों में अपना समय गंवाता है। उन्होंने कहा कि ‘प्राप्त और पर्याप्त’ का भाव अंतःकरण से जुड़ा विषय है, लेकिन कर्म करना, महत्वाकांक्षा रखना और भविष्य के बारे में सोचना वर्तमान जीवन की आवश्यकताएं हैं। मनुष्य के लिए सबसे जरूरी है कि वह निरंतर कर्मशील रहे और जब भी जीवन में कोई अवसर मिले, तो उसका पूरा लाभ उठाए। अवसरों को गंवाने के बजाय उनका सदुपयोग करना ही आगे बढ़ने का मार्ग है।
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