‘उम्मीद नहीं थी जिंदा आएंगे’, नेपाल में फंसे 106 में से 4 टूरिस्ट सुरक्षित नागपुर लौटे, सरकार का किया धन्यवाद

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ummid nahin thi jinda aayenge
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नागपुर, 29 अगस्त । ummid nahin thi jinda aayenge : नेपाल में फंसे 106 टूरिस्ट में से चार सुरक्षित नागपुर लौट गए हैं। लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वे जिंदा वापस लौटेंगे। उन्होंने मुसीबत के समय में मदद के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, स्थानीय प्रशासन और नेपाल में भारत के राजदूत को धन्यवाद दिया।

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आपदा के कारण रास्ते और पुल क्षतिग्रस्त

ummid nahin thi jinda aayenge : टूरिस्ट ने बताया कि आपदा के कारण रास्ते और पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे वे फंस गए थे। नागरिकों में से एक ने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा वापस लौटेंगे। हमारे पास कुछ दस्तावेज नहीं थे, लेकिन प्रशासन ने बहुत मदद की। उन्होंने तुरंत हमारे डॉक्यूमेंट्स बनाकर दे दिए।

नेपाल से सुरक्षित लौटे भारतीयों ने सुनाई आपबीती

ummid nahin thi jinda aayenge : फिर हम फ्लाइट से दिल्ली आए और वहां से फिर नागपुर पहुंचे। प्रशासन ने मुसीबत में हमारी मदद की है, इसलिए उनका धन्यवाद।” उन्होंने कहा कि जब ये घटना घटी तो हमें कुछ मालूम नहीं हुआ, क्योंकि हम अंदर की तरफ थे। हमें कुछ नजर नहीं आ रहा था। हम कुल मिलाकर 106 लोग थे। हमारा 10 दिनों का सफर था। बीच में आने-जाने के दो दिन थे और रुकने के आठ दिन। एक अन्य नागरिक ने कहा कि हमारे जो रिश्तेदार हैं, वो सभी सुरक्षित तरीके से यहां आ गए और वो बहुत महत्वपूर्ण है।

रास्ते टूटे, पुल बहे, फिर भी हिम्मत नहीं हारी; मदद से सुरक्षित लौटे भारतीय

ummid nahin thi jinda aayenge : इस पूरी प्रक्रिया में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और स्थानीय लोगों ने काफी मदद की। हमने फ्लाइट की टिकट भी यहीं से की थी। दीपक पांडेय ने कहा कि हम सात-आठ दिन अच्छे से रहे। हमें पुलिस वालों ने फिर आगे रोक दिया। आपदा आ गई थी, रास्ते खराब हो गए और पुल नष्ट हो गए। हमारे पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई थी। हमारे साथ एक मरीज भी था, उसे इमरजेंसी में वापस लाना था, फिर लोगों ने टिकट बुक करने में हमारी मदद की और हमें हिम्मत दिया कि सब ठीक है।

नेपाल में भारत के राजदूत ने हमारी मदद की

ummid nahin thi jinda aayenge : नेपाल में भारत के राजदूत ने हमारी मदद की। पहले ऐसा लग रहा था कि बस घर पहुंच जाएं। हम सरकार को भी धन्यवाद करेंगे। वर्षा उपाध्याय ने कहा कि नेपाल में हम पोखरा गए थे और दो दिन रुककर वहां से काठमांडू गए। काठमांडू में चार-पांच दिन रुकने के बाद ये घटना घटी और फिर ऐसा हुआ कि हम डर गए। जब मुख्यमंत्री से हमारी बात हो गई तो हिम्मत आ गई और हम डरे नहीं। उनकी हिम्मत से हमें भी थोड़ा आराम मिला।


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