लखनऊ, 16 जून (आईएएनएस)। gaushalayein gramin : उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने नई पहल शुरू की है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुरूप एक प्रमुख गो-आधारित उद्योग विकसित किया जाएगा।
प्रदेशभर की गोशालाओं का व्यापक मूल्यांकन पूरा
gaushalayein gramin : उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने इसके लिए प्रदेशभर की गोशालाओं का व्यापक मूल्यांकन पूरा कर लिया है और अब “एक जनपद-एक नवाचार” मॉडल के तहत जिला विशेष योजनाओं को अमल में लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
गोशालाएं बनेंगी रोजगार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का केंद्र
gaushalayein gramin : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप शुरू की जा रही इस पहल का उद्देश्य गोशालाओं को केवल निराश्रित गोवंश के संरक्षण केंद्र तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पादन, रोजगार, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता के सशक्त केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
जिलावार नवाचार मॉडल से आत्मनिर्भर बनेंगी गोशालाएं
gaushalayein gramin : इसके लिए प्रदेश की गोशालाओं में उपलब्ध भूमि, गोवंश, जल संसाधन, पंचगव्य इकाइयों तथा स्थानीय बाजार की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया गया है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि राज्यव्यापी निरीक्षण और आकलन के आधार पर प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग नवाचार मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।
पंचगव्य उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा
gaushalayein gramin : जिन जिलों में संभावनाएं अधिक हैं, वहां बायोगैस उत्पादन, इको पेंट निर्माण, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, गोबर आधारित उत्पाद और पंचगव्य उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर लघु उद्योगों का विकास होगा और ग्रामीण युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि जिला विशेष नवाचार मॉडल के माध्यम से स्थानीय संसाधनों को आय और रोजगार में परिवर्तित करने की रणनीति बनाई गई है।
महिला समूहों और युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार, आत्मनिर्भर बनेंगी गोशालाएं
gaushalayein gramin : योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता को नई गति मिलेगी। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग का मानना है कि यह मॉडल सफल होने पर गोशालाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
gaushalayein gramin : साथ ही प्रत्येक जिले की एक विशिष्ट गो-आधारित पहचान विकसित होगी, जो स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार सृजन का नया माध्यम भी बनेगी। प्रदेश सरकार की इस पहल को गो संरक्षण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को एक साथ आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों का नया आधार तैयार होगा। –आईएएनएस विकेटी/पीएम
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(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)














