द्वारका, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। 5visadi gujrat dwarka : उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान तक और मध्या प्रदेश से लेकर गुजरात तक देश भर में लीलाधर श्रीकृष्ण व राधारानी के कई भव्य मंदिर हैं। मगर गुजरात में श्रीकृष्ण की प्रिया देवी रुक्मिणी का भव्य मंदिर है, जो श्रीकृष्ण और उनकी पत्नी रुक्मिणी के दिव्य प्रेम का प्रतीक है।
द्वारका का रुक्मिणी देवी मंदिर
5visadi gujrat dwarka : द्वारका का रुक्मिणी देवी मंदिर भक्तों और पर्यटकों को आध्यात्मिक शांति और प्रेम की अनुभूति कराता है। यह मंदिर द्वारका शहर के बीचों-बीच स्थित है और रुक्मिणी माता मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है। मंदिर की खासियत यह है कि यहां मुख्य प्रसाद के रूप में ‘जल’ चढ़ाया जाता है, जिसके पीछे दुर्वासा ऋषि के श्राप की प्राचीन कथा जुड़ी हुई है।
प्राचीन मंदिर लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व माना जाता
5visadi gujrat dwarka : यह प्राचीन मंदिर लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व का माना जाता है। मंदिर में रुक्मिणी देवी की भव्य प्रतिमा सोने के आभूषणों और सुंदर वस्त्रों से सजी हुई है, जो प्रेम और भक्ति की दिव्य आभा बिखेरती है। दीवारों पर बनी चित्रकारी कृष्ण और रुक्मिणी की प्रेम कथाओं को जीवंत रूप से दर्शाती है।

रुक्मिणी देवी मंदिर उन दुर्लभ मंदिरों में से एक
5visadi gujrat dwarka : रुक्मिणी देवी मंदिर उन दुर्लभ मंदिरों में से एक है जो विशेष रूप से देवी रुक्मिणी (लक्ष्मी जी का अवतार) को समर्पित है। यह प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) से सिर्फ 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मंदिर की बाहरी दीवारें देवी-देवताओं की नक्काशी और मूर्तियों से सजी हैं। यहां ‘नरथरा’ (मानव आकृतियां) और ‘गजथरा’ (हाथी) की सुंदर नक्काशी देखी जा सकती है।
शिखर पारंपरिक नागर शैली में बना
5visadi gujrat dwarka : मंदिर का शिखर पारंपरिक नागर शैली में बना है, लेकिन इसका मंडप (हॉल) गुंबददार छत और चौकोर जालीदार खिड़कियों वाला है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। मंदिर में जल दान की अनोखी परंपरा के पीछे भी कथा है। रुक्मिणी देवी मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां प्रसाद के रूप में ‘जल’ दिया जाता है।
भक्त देवी को जल अर्पित करते हैं
5visadi gujrat dwarka : भक्त देवी को जल अर्पित करते हैं और फिर खुद भी पीने के पानी का दान करते हैं। मंदिर परिसर में पीने के पानी का दान करना अत्यंत पुण्य कार्य माना जाता है। इस परंपरा के पीछे दुर्वासा ऋषि के श्राप की कथा है। किंवदंती के अनुसार, एक बार दुर्वासा ऋषि ने कृष्ण और रुक्मिणी से रथ खींचने को कहा। यात्रा के दौरान प्यास लगने पर रुक्मिणी ने पहले ऋषि को जल नहीं दिया।
दुर्वासा ने श्राप दे दिया कि द्वारका का क्षेत्र सूखा और बंजर रहेगा
5visadi gujrat dwarka : इस चूक पर क्रोधित होकर दुर्वासा ने श्राप दे दिया कि द्वारका का क्षेत्र सूखा और बंजर रहेगा। इसी कारण द्वारका के आसपास पानी की कमी रही और ताजा पानी का दान यहां विशेष महत्व रखता है। मंदिर के विषय में एक और कथा है, जिसके अनुसार रुक्मिणी विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री थीं।

विवाह माधवपुर घेड़ नामक स्थान पर हुआ
5visadi gujrat dwarka : वह बचपन से ही श्रीकृष्ण को अपना पति मानती थीं। उनके भाई ने उनका विवाह दुष्ट शिशुपाल से तय कर दिया था। रुक्मिणी ने कृष्ण को पत्र लिखकर सहायता मांगी। कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह कर लिया। यह विवाह माधवपुर घेड़ नामक स्थान पर हुआ, जहां आज रुक्मिणी देवी मंदिर स्थित है।
रुक्मिणी और कृष्ण के मंदिर अलग-अलग जगहों पर बने
5visadi gujrat dwarka : वहीं, दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण रुक्मिणी और कृष्ण के मंदिर अलग-अलग जगहों पर बने हैं। रुक्मिणी मंदिर गोमती नदी के इस पार है, जबकि द्वारकाधीश मंदिर नदी के उस पार स्थित है। रुक्मिणी देवी मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है बल्कि प्रेम, भक्ति और प्राचीन वास्तुकला का अनुपम उदाहरण भी है।
मंदिर के आसपास और भी दर्शनीय स्थल
5visadi gujrat dwarka : मंदिर के आसपास और भी दर्शनीय स्थल हैं, यहां रुक्मिणी अष्टमी और जन्माष्टमी बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। भक्ति गीत, शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पूरा द्वारका भक्ति में डूब जाता है। यहां भक्तों के साथ ही पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं, मंदिर के अलावा भक्त द्वारकाधीश मंदिर, गोमती घाट, भद्रकेश्वर महादेव मंदिर, द्वारका बीच और शिवराजपुर बीच भी घूम सकते हैं। –आईएएनएस एमटी/डीकेपी
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(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)















