भोपाल 26 दिसंबर । TajMahal Biharis : मध्य प्रदेश के भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने फिर खोला विवादित बयान का पिटारा, सियासी हलचल तेज हो गया है । सागर जिले के बीना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से कहा कि ताजमहल मूल रूप से एक मंदिर था, जिसे बाद में मुगल शासक शाहजहां ने मकबरे में तब्दील कर दिया।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़
TajMahal Biharis : कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। वीडियो और बयान तेजी से वायरल हो रहे हैं और यह मुद्दा अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।
ताजमहल को लेकर विवादित बयान
TajMahal Biharis : कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। सागर जिले के बीना में स्वर्गीय राकेश सिरोठिया की स्मृति में आयोजित क्रिकेट टूर्नामेंट के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंच से ताजमहल को लेकर विवादित दावा किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुमताज महल को पहले बुरहानपुर में दफनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि बाद में जिस स्थान पर पहले मंदिर का निर्माण था, उसी जगह मुमताज का शव दफन कर ताजमहल का निर्माण कराया गया।
TajMahal Biharis : राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्षी दलों ने बयान पर आपत्ति जताई है, जबकि समर्थकों द्वारा इसे ऐतिहासिक तथ्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान ने एक बार फिर ताजमहल से जुड़े पुराने विवाद को ताजा कर दिया है और सियासी बहस को हवा दे दी है।
TajMahal Biharis : वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रहा
मंत्री के इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल मौजूद लोगों में हलचल मच गई। वहीं, सोशल मीडिया पर भी वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है। उनके बयान को ऐतिहासिक तथ्यों से जोड़कर देखा जा रहा है. विरोधी इसे विवाधित के साथ भड़काऊ बता रहे हैं।
TajMahal Biharis : दावे सार्वजनिक रूप से मंच से किए गए
ताजमहल को लेकर यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह के दावे सार्वजनिक रूप से मंच से किए गए हों, लेकिन एक कैबिनेट मंत्री की ओर दिए गए बयान के कारण यह मामला और अधिक तूल पकड़ता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मनना है कि ऐसे अक्सर इतिहास,आस्था और राजनीति को एक साथ जोड़कर बहस को जन्म देते हैं।
विवादित बयान के केंद्र में कैलाश विजयवर्गीय
















