रायपुर, 10 मार्च । Sahitya Samvad : कटक स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय द्वारा प्रेरणा के पर्व ‘साहित्य संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंग्रेज़ी साहित्य के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, प्रसिद्ध उपन्यासकारों, विशिष्ट अनुवादकों, आलोचकों, स्तंभकारों, प्रोफेसरों तथा कॉर्पोरेट जगत से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
वक्ताओं ने अपने विचार साझा
Sahitya Samvad : कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने साहित्य, शिक्षा और समाज के बीच संबंधों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं को पढ़ने-लिखने की आदत विकसित करने, रचनात्मक सोच अपनाने और साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया।
मेजर बख्शी ने जीवन से जुड़ा एक प्रेरक प्रसंग साझा
Sahitya Samvad : श्री श्री विश्वविद्यालय में आयोजित प्रेरणा के पर्व ‘साहित्य संवाद’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मेजर बख्शी ने अपने जीवन से जुड़ा एक प्रेरक प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि “एक बार मुझे लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रदान किए जाने के अवसर पर निर्वाचन आयोग के कैबिनेट सचिव टी. एस. सुब्रमण्यम ने मुझसे पूछा था, मेजर बख्शी, आपने इतने वर्षों तक देश की सेवा की है, आपके जीवन की सबसे बड़ी घटना कौन-सी है ?
Sahitya Samvad : इस पर मेजर बख्शी ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया था, “मेरा जीवित रहना ही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।” क्योंकि मैंने अपने जीवन में जिन अनेक युद्धों का सामना किया, उनमें अपने सैनिकों की मृत्यु को बहुत करीब से देखा है। ऐसे में मेरा जीवित रह जाना ही मेरे जीवन की सबसे बड़ी घटना है।’
” यह बात भारतीय थलसेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल जी. डी. बख्शी ने ओड़िशा के कटक स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रेरणा के पर्व ‘साहित्य संवाद’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही।
जीवन के सभी साहसिक अभियानों का भी उल्लेख किया
Sahitya Samvad : भगवद्गीता की जीवन्त शिक्षाओं को उदाहरणों के साथ समझाते हुए उन्होंने अपने जीवन के सभी साहसिक अभियानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन अनुभवों, अनुभूतियों, दर्शन और शिक्षाओं के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही यह भी प्रेरणादायक रूप से समझाया कि भय पर कैसे विजय प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने 1971 के युद्ध का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके सहकर्मी सेकंड लेफ्टिनेंट महेंद्र प्रताप सिंह को पाकिस्तानी सेना ने किस प्रकार अत्यंत पीड़ादायक मृत्यु दी थी। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का वर्णन भी उन्होंने किया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इसके जवाब में भारत ने किस प्रकार 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बना लिया था।
Sahitya Samvad : प्रेरणादायक कार्यक्रम ‘साहित्य संवाद’
श्री श्री विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पूरे दिन चले प्रेरणादायक कार्यक्रम ‘साहित्य संवाद’ में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कॉर्पोरेट जगत से जुड़े व्यक्तित्वों तथा सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए।
Sahitya Samvad : ‘साहित्य संवाद’ विभिन्न सत्रों में वक्ताओं उपस्थित रहे
कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में अंग्रेज़ी साहित्यकार एवं कॉर्पोरेट व्यक्तित्व संजीव सरीन, विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्षा प्रोफेसर रजिता कुलकर्णी, आर्ट ऑफ लिविंग के डब्ल्यूडब्ल्यूसीसी कार्यक्रम की चेयरपर्सन भानुमति नरसिम्हन, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित ओड़िया साहित्यकार एवं पद्मभूषण डॉ. प्रतिभा राय,
विशिष्ट अनुवादक, आलोचक एवं स्तंभकार प्रोफेसर यतीन्द्र नायक, प्रसिद्ध उपन्यासकार एवं साहित्यकार गौरहरि दास, बैंकर मिहिर पटनायक, जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता डॉ. पीताबास राउतराय तथा प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सत्यव्रत (कुना) त्रिपाठी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
Sahitya Samvad : संस्कृति, शिक्षा और जीवन मूल्यों के प्रति प्रेरित किया
Sahitya Samvad : इन सभी वक्ताओं ने अपने-अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और जीवन मूल्यों के प्रति प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान संवाद, विचार-विमर्श और अनुभवों की साझेदारी ने प्रतिभागियों को नई दृष्टि और ऊर्जा प्रदान की।
सौरभ बावेजा ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया
Sahitya Samvad : सबसे पहले एडमिन अधिकारी सौरभ बावेजा ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि कुलपति डॉ. तेजप्रताप ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम की शुरुआत ओडिशी नृत्य ‘दशावतारम्’ से हुई। इस कार्यक्रम में लगभग 400 से अधिक दर्शक उपस्थित थे। विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. बिप्लब बिश्वाल, डॉ. भरत दाश, डॉ. केशरी सिंह, डॉ. मधुमिता दास, डॉ. राकेश त्रिपाठी और डॉ. डी. डी. स्वाईं ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया।
Sahitya Samvad : कार्यक्रम की सफलता के लिए कुलपति प्रोफेसर डॉ. तेजप्रताप, कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा, कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य, छात्र कल्याण विभाग के डीन प्रोफेसर डॉ. जयप्रकाश भट्ट तथा मानव संसाधन विभाग के उपनिदेशक ज्योतिरंजन गड़नायक ने आयोजकों को धन्यवाद दिया।
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