जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास : कोयला गैसीफिकेशन से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की राह

jindal steel racha itihas
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रायपुर, 7 अप्रैल 2026 । jindal steel racha itihas :  Jindal Steel & Power ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से स्वदेशी कोयले के प्रभावी उपयोग का नया मार्ग प्रशस्त किया है। इस नवाचार से न केवल कम-कार्बन स्टील उत्पादन संभव हुआ है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।

स्वदेशी कोयले से ‘सिनगैस’ बनाकर स्टील उत्पादन में क्रांति

jindal steel racha itihas :  कंपनी ने विश्व में पहली बार ऐसी तकनीक का सफल उपयोग किया है, जिसमें स्वदेशी कोयले को गैस (सिनगैस) में परिवर्तित कर उससे लोहा (डीआरआई) तैयार किया जा रहा है। सरल शब्दों में, जिन्दल स्टील ने आयातित गैस या महंगे विदेशी कोयले पर निर्भरता घटाकर देश के कोयले को स्वच्छ गैस में बदलकर स्टील उत्पादन में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

ईंधन संकट के बीच एक महत्वपूर्ण समाधान

jindal steel racha itihas :  प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी को देखते हुए कंपनी ने गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में भी सिनगैस का सफल उपयोग किया है। स्टील उद्योग में यह प्रयोग पहली बार किया गया है, जो वर्तमान ईंधन संकट के बीच एक महत्वपूर्ण समाधान बनकर उभरा है।

जिंदल ने दिखाई आत्मनिर्भर स्टील की राह

jindal steel racha itihas :  स्टील क्षेत्र को नई दिशा देते हुए जिन्दल स्टील ने सिनगैस के माध्यम से ब्लास्ट फर्नेस संचालन में भी सफलता हासिल की है। इससे आयातित कोकिंग कोल पर निर्भरता में कमी आई है और प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन भी उल्लेखनीय रूप से घटा है।

jindal steel racha itihas : स्टील उत्पादन की पूरी वैल्यू चेन में सिनगैस का उपयोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबिलिटी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि भारत सरकार की भावी नीतियों में “National Coal Gasification Mission” को शामिल किया गया है, जिससे इस तकनीक को अपनाने में तेजी आने की उम्मीद है।

कोयला भंडार का सही उपयोग ही भारत की प्रगति की कुंजी

jindal steel racha itihas :  इस संबंध में जिन्दल स्टील, अंगुल के कार्यकारी निदेशक “P. K. Biju Nair” ने कहा, “स्वदेशी कोयले से निर्मित सिनगैस, आयातित मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी का प्रभावी विकल्प बन सकती है। भारत को अपनी प्रगति और विदेशी मुद्रा बचत के लिए अपने विशाल कोयला भंडार का बेहतर उपयोग करना चाहिए।

स्वदेशी संसाधनों से सस्टेनेबल स्टील, आत्मनिर्भर भारत को गति

jindal steel racha itihas :  यदि कोयला गैसीफिकेशन के साथ कार्बन कैप्चर तकनीक (CCUS) को जोड़ा जाए, तो न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों (CBAM) के अनुरूप हमारा स्टील वैश्विक बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। ”स्वदेशी संसाधनों के उपयोग और उन्नत स्वच्छ तकनीकों के माध्यम से जिन्दल स्टील सस्टेनेबल और किफायती स्टील उत्पादन को बढ़ावा देते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

जिन्दल स्टील के बारे में

jindal steel racha itihas :  Jindal Steel & Power भारत के प्रमुख स्टील उत्पादकों में से एक है, जो अपनी उच्च गुणवत्ता और तकनीकी दक्षता के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान रखता है। कंपनी का ‘माइन-टू-मेटल’ मॉडल इसे विशिष्ट बनाता है, जिसमें खनन से लेकर तैयार स्टील उत्पादन तक की पूरी प्रक्रिया आधुनिक तकनीक और स्वयं के संसाधनों से संचालित होती है।

jindal steel racha itihas :  करीब 12 बिलियन डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) से अधिक निवेश के साथ कंपनी के अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में विश्वस्तरीय स्टील प्लांट संचालित हैं। भारत के साथ-साथ अफ्रीका में भी अपनी मजबूत उपस्थिति के जरिए कंपनी वैश्विक स्तर पर औद्योगिक विकास में योगदान दे रही है।


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