आरी तुतारी व्यंग; कुलदीप शुक्ला । Ari Tutari Commissionerate : सरकार ने पुलिस कमिश्नरी लागू करने की घोषणा तो कर दी, लेकिन शर्तें पढ़ते ही साफ हो जाता है कि यह सुधार कम, सीमा तय करने की कवायद ज़्यादा है।
रायपुर मॉडल में यह दूरी जस की तस
Ari Tutari Commissionerate : मक़सद बताया गया था पुलिस और प्रशासन के बीच की दूरी कम करना, पर रायपुर मॉडल में यह दूरी जस की तस दिखती है। पुलिस बिरादरी का कहना है कि उन्हें वही काम दिए गए हैं, जो वे पहले भी करते थे। शराब, हथियार और ज़मीन जैसे अपराध की जड़ों वाले मामलों पर अधिकार बढ़ाने की मांग को सरकार ने “सिविल मामला” बताकर किनारे कर दिया।
डंडा है, और डंडे से न्याय डर जाएगा
Ari Tutari Commissionerate : तर्क यह कि पुलिस के पास डंडा है, और डंडे से न्याय डर जाएगा। मध्यप्रदेश मॉडल को ही अंतिम मान लिया गया, जबकि भुवनेश्वर–कटक जैसे उदाहरणों से सबक नहीं लिया गया। नतीजा यह कि रायपुर को कमिश्नरी तो मिली, लेकिन वैसी नहीं, जैसी पुलिस चाहती थी। पुलिस व्यवस्था में बस नाम का चोला बदला है, देह वही पुरानी है ?
क्या है कमिश्नरी सिस्टम
Ari Tutari Commissionerate : पुलिस कमिश्नरी सिस्टम एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इस व्यवस्था के अंतर्गत पुलिस आयुक्त के पास कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से संबंधित सभी शक्तियां होती हैं। ज्यादा शक्तियां होने से पुलिस को तेजी से निर्णय ले सकती है। इस सिस्टम के तहत पुलिस आयुक्त के पास जिला मजिस्ट्रेट जैसी शक्तियां हो जाती हैं।
Ari Tutari Commissionerate : संक्षेप में कमिश्नरी सिस्टम
पुलिस कमिश्नरी सिस्टम देश के कई बड़े शहरों में लागू है। इसमें एसपी की जगह पुलिस कमिश्नर होता है, जिसे राज्य सरकार नियुक्त करती है। यह अधिकारी अनुभवी और ऊंचे रैंक का होता है। कमिश्नरी लागू होने से फैसले जल्दी होते हैं, पुलिस व्यवस्था मजबूत होती है और आम लोगों को फायदा मिलता है। छोटे अपराधों की जांच का अधिकार निचले स्तर तक मिलने से कानून-व्यवस्था बेहतर रहती है।












