आरी तुतारी : कहां जाबे मूसवा, मोर ले बोचक के ? “म्याऊं” बिल्ली बनहि प्रबंधक ! धान के कटोरा मं म्याऊं राज

धान के कटोरे में चूहों का राज, सूरज का ग्रहण और करोड़ों का धान गायब 

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Aari Tutari Musawa Meow Raj
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आरी तुतारी व्यंग; कुलदीप शुक्ला । Aari Tutari Musawa Meow Raj : छत्तीसगढ़ को यूं ही “धान का कटोरा” नहीं कहा जाता। अब यह कटोरा इतना विशाल हो गया है कि उसमें मूसवा, दीमक, कीड़े और मौसम—सब मिलकर करोड़ों का धान हजम कर रहे हैं, और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

Aari Tutari Musawa Meow Raj : कवर्धा से लेकर महासमुंद और मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर तक, धान का ऐसा “अदृश्य महायज्ञ” चल रहा है कि अनाज नहीं, बल्कि सरकारी दावों की विश्वसनीयता जलकर राख हो रही है।

Aari Tutari Musawa Meow Raj : आरी तुतारी : कहां जाबे मूसवा, मोर ले बोचक के ? “म्याऊं” बिल्ली बनहि प्रबंधक ! धान के कटोरा मं म्याऊं राज

कहां जाबे मूसवा, मोर ले बोचक के ?

कहां जाबे मूसवा, मोर ले बोचक के?
धान के कटोरा मं तैं ह चोर बनगेस।
चारभाठा होवय, बघर्रा होवय,
या सीएम–डिप्टी सीएम के गृह जिला 
हर जगह तैं एमएसपी वाला धान चबावत हस।

पहिले सोचत रहेन—
मूसवा बस छेद करथे,
आज पता चलिस—
मूसवा त 26 हजार क्विंटल गिन-गिन के खाथे!

कागज मं लिखाय गे—
“न चोरी, न बिक्री”
मतलब साफ हे—
मूसवा अब सबूत मिटाय वाला मास्टरमाइंड बन गे।

मौसम कहिथे— “मैं नइ हव ”
कीड़ा कहिथे— “मोर नांव मत ले”
अधिकारी कहिथे— “अऊ जिला मं हालत जादा खराब हे”
अऊ मूसवा?
वो त पेट सहलावत हंस दे थे।

Aari Tutari Musawa Meow Raj : कहां जाबे मूसवा, मोर ले बोचक के?

गोदाम मं सीसीटीवी बंद,
रजिस्टर मं एंट्री गोल,
अऊ जिम्मेदारी?
वो त धान संग-संग गायब।

आज किसान पूछत हे—
“हम पसीना बहाइन,
तैं पेट भर लिएस,
अऊ सरकार हमन ला कहानी सुना दिस ?”

Aari Tutari Musawa Meow Raj : कहां जाबे मूसवा, मोर ले बोचक के?

जाबे तो जाबे कहां—
पर सवाल हे—
ए मूसवा, तोर पेट भर गे,
अब जवाब के भूख कौन भरही?

Aari Tutari Musawa Meow Raj : मूसवा नहीं, चमत्कारी महा मूसवा !

कवर्धा जिले के बाज़ार चारभाठा और बघर्रा धान संग्रहण केंद्रों से 26 हजार क्विंटल धान कम पाया गया। अधिकारियों का कहना है— न चोरी हुई, न बेची गई… सब मूसवा ने खा ली।

अब ज़रा कल्पना कीजिए— 26 हजार क्विंटल धान खाने वाले चूहे कैसे होंगे? क्या वे सामान्य चूहे हैं या सरकारी प्रशिक्षण प्राप्त “सुपर माउस”? क्या वे MSP के भाव से खाते हैं या बाजार भाव से? अगर सच में चूहे इतना खा सकते हैं, तो देश में अनाज की कमी नहीं, बल्कि मूसवा प्रबंधन मंत्रालय बनना चाहिए।

“म्याऊं” बिल्ली ल प्रबंधक बनाय जाही !

धान के कटोरा छत्तीसगढ़ मं
अब नवा प्रयोग चालू करे ला पढ़ी ही।
अधिकारी के जगह मं अब
“म्याऊं” बिल्ली ल प्रबंधक बनाय जाही।

कागज मं लिखाही—
चूहे नियंत्रण बर बिल्ली तैनात
अऊ म्याऊं बिल्ली कहिही—
“कहां जाबे मूसवा, मोर ले बोचक के?”

गोदाम मं म्याऊं बिल्ली
कुर्सी मं बइठे रहिही,
अऊ मूसवा?
वो त हिसाब देही—

“26 हजार क्विंटल धान?”
“एकेच सीजन मं क्लियर!”

रजिस्टर मं एंट्री पूरा,
जांच मं सवाल अधूरा,
धान नई— बहाना भरपूर।

छत्तीसगढ़ मं 
धान नई गायब होवत हे,
जवाबदेही मं म्याऊं पर गे हे।

Aari Tutari Musawa Meow Raj : सूरज भी संदिग्ध, मौसम भी आरोपी

जब मूसवा थक गए, तो मौसम को कटघरे में खड़ा कर दिया गया। कभी बारिश दोषी, कभी नमी, कभी कीड़े— यानी धान गया तो गया, जिम्मेदारी किसी की नहीं। जिला विपणन अधिकारी का बयान और भी रोचक है— “अन्य जिलों की हालत इससे भी खराब है।”

मतलब साफ है— अगर पड़ोसी का घर ज्यादा जला है, तो अपना घर आधा जलना भी उपलब्धि है!

Aari Tutari Musawa Meow Raj : सवाल जो जवाब मांगते हैं

  • अगर 22 हजार क्विंटल धान एक ही केंद्र से गायब है, तो क्या वहां कोई निगरानी नहीं थी ?

  • क्या धान खुले आसमान के नीचे भगवान भरोसे रखा गया था?

  • क्या चूहों ने रजिस्टर में एंट्री कर के धान उठाया ?

और सबसे बड़ा सवाल— अगर यही हाल “बेहतर स्थिति” का है, तो बदतर स्थिति में क्या होता है?

Aari Tutari Musawa Meow Raj : व्यवस्था को असली ग्रहण

यह धान घोटाला नहीं तो और क्या है?
जब करोड़ों का नुकसान “चूहों” के सिर मढ़ दिया जाए, तो समझ लेना चाहिए कि असली ग्रहण धान पर नहीं, व्यवस्था पर लगा है।

छत्तीसगढ़ के किसान पसीना बहाकर धान उगाते हैं,
और सरकारी गोदामों में वही धान—
कभी मूसवा खा जाते हैं,
कभी मौसम बहा ले जाता है,
और कभी फाइलों में ही दफन हो जाता है।

धान के कटोरे में आज अनाज नहीं,
जवाबदेही की भारी कमी भरी हुई है।


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