राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यशाला में बोले स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव : तंबाकू उत्पादों का उपयोग रोकने सामूहिक जागृति जरूरी

रायपुर,

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने तंबाकू उत्पादों का उपयोग नहीं करने के लिए जन चेतना जागृत करने का आह्वान किया है। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत गुरुवार को “राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला” में बोलते हुए  सिंहदेव ने कहा “विश्व में समय से पूर्व मृत्यु दर का सबसे बड़ा योग्य कारण तंबाकू का उपयोग है। विश्व स्तर पर तंबाकू सालाना 70 लाख (7 मिलियन ) मौतों के लिए जिम्मेदार है। भारत में प्रतिदिन 3500 मौतों की दर से लगभग 12.8 लाख तंबाकू उपयोगकर्ता की मौत (टीबी, एचआईवी, मलेरिया से होने वाली संयुक्त मृत्यु से अधिक) सालाना होती है। वर्तमान में चल रही कोरोना महामारी में होने वाली मृत्यु से भी कहीं ज्यादा मृत्यु हर साल इस तंबाकू के उपयोग के कारण हो रही है।“WhatsApp Image 2022 01 07 at 3.46.38 PM

द यूनियन संस्था और स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस कार्याशाला के प्रारंभ में भारत सरकार द्वारा किए गए “वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण 2019” के चौथे चरण छत्तीसगढ़ के अनुरूप परिणामों का विमोचन ऑनलाइन माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री द्वारा किया गया।

वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण 2019 के आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा “छत्तीसगढ़ राज्य में 13 से 15 वर्ष आयु के बच्चों के द्वारा तंबाकू उपयोग का प्रतिशत 8 है। भले ही यह राष्ट्रीय के औसत से कम है , परंतु यह बहुत ही चिंताजनक विषय है, जिसके लिए हमें प्रारंभिक स्तर से ही स्कूल एवं कॉलेजों के माध्यम से बच्चों को जागरूक करने की आवश्यकता हैI क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि तंबाकू छोड़ने का प्रतिशत लगभग 5 से भी कम है जबकि 10 से 22 वर्ष के बीच में तंबाकू उपयोग प्रारंभ करने वालों का प्रतिशत 90 से अधिक है। प्रदेश के समस्त विभाग एवं जनता को संयुक्त रूप से तंबाकू उत्पादों का उपयोग रोकने के लिए लड़ने की आवश्यकता हैI

कार्यक्रम में संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ नीरज बंसोड़ ने उपस्थित प्रतिभागियों से चर्चा करते हुए राज्य में तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम को अंर्तविभागीय समन्वय स्थापित करने के लिए आवश्यक नीति तैयार करने को कहा ताकि तंबाकू उत्पादों का उपयोग नहीं करने के लिए जनचेतना जागृत कर तंबाकू सेवन को रोकने कि दिशा में तेजी से कार्य किया जा सकेगा।

कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्य नोडल अधिकारी तंबाकू नियंत्रण डॉ. कमलेश जैन ने वर्तमान परिदृश्य में तंबाकू एवं तंबाकू उत्पादो के उपयोग के घातक परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया तंबाकू उत्पादों का उपयोग न केवल कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने में सहयोग प्रदान करता है, साथ ही उसकी गंभीरता को बढ़ाते हुये मृत्यु का कारण भी बनता है। डॉ. जैन ने कहा कि तंबाकू की आदत लगने के बाद इस आदत को छोड़ पाना एक जटील कार्य है। इसलिए यह प्रयास करना आवश्यक है कि राज्य में तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम एवं सभी आवश्यक कानूनों को कढ़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकी जनसुदाय इस लत से दूर रहे।

कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े द यूनीयन के संयुक्त संचालक डॉ. राणा जगदीप सिंह ने सुझाव दिया की छत्तीसगढ़ में लगभग 80 लाख से अधिक लोग तंबाकू उपयोग करते हैं और शहर के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर भी इसकी व्यापकता है, इसलिए तंबाकू मुक्त छत्तीसगढ़ “आओ ग्राम चलें” जैसे अभियान चलाने की आवश्यकता होगी I साथ ही लक्ष्य रखना होगा प्रदेश के 13 से 15 आयु समूह के बच्चों में वर्ष 2025 तक राज्य में तंबाकू उपयोग की दर को 8 प्रतिशत से 5 प्रतिशत पर लाया जा सके।

डॉ. अमीत यादव ने विभिन्न विभागों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को “कोटपा अधिनियम 2003” के प्रावधान एवं “राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम”, विभिन्न विभागों के कार्य दायित्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही किशोर न्याय अधिनियम, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को भी सख्ती से लागू किया जाना अनिवार्य है तभी तंबाकू एवं तंबाकू उत्पादों को नियंत्रित किया जा सकेगा।

तंबाकू उपयोग कर रहे लोगों को उसे छोड़ने में मदद के लिए छत्तीसगढ़ में तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान का क्रियान्वयन एवं तंबाकू नशा मुक्ति केंद्र का संचालन प्रारंभ किया जा चुका है। डॉ. दीक्षा पुरी ने राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया “भारत सरकार ने वर्ष 2007- 08 में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) शुरू किया, जिसका उद्देश्य तंबाकू के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करना तथा लोगों को तंबाकू का उपयोग छोड़ने में मदद करना था। छत्तीसगढ़ में तंबाकू नियंत्रण के डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन द्वारा तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम वर्तमान में सभी 28 जिलों में लागू किया जा रहा है।“