रायपुर, 7 अगस्त । divyang varishth nagrik : भारत जब विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह स्पष्ट हो चुका है कि वास्तविक विकास वही है जिसमें समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक जीवन, सुगम अवसर और आत्मनिर्भरताकृये चार स्तंभ किसी भी आधुनिक कल्याणकारी राज्य की पहचान होते हैं। छत्तीसगढ़ ने पिछले ढाई वर्षों में इन्हीं मूल्यों को केंद्र में रखकर समाज कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन प्रस्तुत किया है।
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में सामाजिक न्याय को मिली नई मजबूती
divyang varishth nagrik : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में राज्य ने दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, विधवा एवं परित्यक्त महिलाओं, उभयलिंगी व्यक्तियों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए ऐसी व्यवस्थाएँ विकसित की हैं, जिन्होंने सामाजिक न्याय को प्रशासनिक प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है। दिसंबर 2023 से जून 2026 के बीच की उपलब्धियाँ इस परिवर्तन की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करती हैं।

लाखों परिवारों को पेंशन योजनाओं का लाभ
divyang varishth nagrik : राज्य की विभिन्न पेंशन योजनाओं से 21.73 लाख से अधिक नागरिक नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 7.56 लाख हो गई है। वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांगजन, सामाजिक सुरक्षा और सुखद सहारा जैसी योजनाएं लाखों परिवारों के लिए आर्थिक संबल बनी हुई हैं।
सरकार के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत हितग्राहियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। आधार सीडिंग और ई-केवाईसी आधारित सत्यापन से व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनी है।
यूडीआईडी धारकों की बढ़ी संख्या
divyang varishth nagrik : छत्तीसगढ़ ने दिव्यांगजन कल्याण को दान या सहायता की दृष्टि से नहीं, बल्कि अधिकार और समान अवसर के दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है। विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) धारकों की संख्या 2.44 लाख से बढ़कर 2.77 लाख हो गई है। जबकि कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के लाभार्थियों की संख्या 1,161 से बढ़कर 17,038 तक पहुंच गई है।
सरकार ने बताया कि सामर्थ्य विकास योजना के माध्यम से कौशल विकास और पुनर्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति प्राप्त करने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार से अधिक हो गई है। फिजिकल रिफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर, स्पेशल पॉली क्लिनिक और विशेष विद्यालयों के विस्तार से स्वास्थ्य, शिक्षा और पुनर्वास सेवाओं को भी सशक्त बनाया गया है।
वरिष्ठ नागरिकों की सहायता
divyang varishth nagrik : बढ़ती वृद्धजन आबादी के बीच छत्तीसगढ़ ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए संवेदनशील सहायता तंत्र विकसित किया है। वृद्धाश्रमों, आश्रय गृहों और देखरेख संस्थाओं की क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ सियान हेल्पलाइन (155326) को प्रभावी सहायता मंच के रूप में विकसित किया गया है।इस हेल्पलाइन पर प्राप्त कॉलों की संख्या 1.14 लाख से बढ़कर 2.87 लाख तक पहुँच गई है। यह केवल आँकड़ा नहीं, बल्कि बुजुर्ग नागरिकों के बढ़ते विश्वास और प्रशासन की सक्रिय पहुँच का संकेत है।
नशामुक्ति से सामाजिक परिवर्तन
divyang varishth nagrik : समाज कल्याण विभाग ने नशामुक्ति को स्वास्थ्य और सामाजिक पुनर्वास दोनों से जोड़कर देखा है। भारत माता वाहिनी योजना के अंतर्गत संचालित नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़कर 29 हो गई है, जबकि लाभार्थियों की संख्या 1,967 से बढ़कर 5,220 तक पहुँच गई है।
इन केंद्रों में उपचार के साथ परामर्श, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे प्रभावित व्यक्तियों को पुनः सम्मानजनक जीवन की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल रहा है।
divyang varishth nagrik : राज्य सरकार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम और एक्सेसिबल इंडिया अभियान के तहत ‘सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान’ शुरू किया है। इसके अंतर्गत सार्वजनिक भवनों, सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को दिव्यांगजन-अनुकूल बनाया जा रहा है, ताकि शासन सेवाएं सभी नागरिकों के लिए अधिक सुलभ हो सकें।
सरकार ने दिव्यांगजनों के अधिकारों की प्रभावी निगरानी के लिए आयुक्त (राज्य) के नए पद को भी मंजूरी दी है। इसे दिव्यांगजन सशक्तिकरण और समावेशी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
संस्थागत विकास और वित्तीय प्रतिबद्धता
divyang varishth nagrik : कल्याणकारी योजनाओं की स्थिर सफलता के लिए मजबूत संस्थागत ढाँचा आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने विशेष विद्यालय, माना कैंप रायपुर के भवन निर्माण, दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालयों के उन्नयन, फिजिकल रिहैबिलिटेशन सेंटर के विस्तार, दिव्यांगजन वित्त विकास निगम के माध्यम से ऋण वितरण तथा नशामुक्ति केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए महत्वपूर्ण निवेश किए हैं।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में समाज कल्याण विभाग का बजट 1,512 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में 1,600 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि राज्य सरकार सामाजिक कल्याण को व्यय नहीं, बल्कि मानव पूंजी और सामाजिक स्थिरता में दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रही है।
डिजिटल प्रशासन का सुगम मॉडल
divyang varishth nagrik : छत्तीसगढ़ मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहाँ डिजिटल प्रशासन और मानवीय संवेदनशीलता एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य कर रहे हैं। डीबीटी, आधार सीडिंग, ई-केवाईसी, डिजिटल डेटा प्रबंधन और हेल्पलाइन आधारित सहायता प्रणाली ने योजनाओं की दक्षता बढ़ाई है।साथ ही पुनर्वास, परामर्श, आश्रय, सामुदायिक सहयोग और व्यक्तिगत सहायता जैसी सेवाओं को समान महत्व देकर यह सुनिश्चित किया गया है कि तकनीक मानव केंद्रित शासन का माध्यम बने, उसका विकल्प नहीं।
divyang varishth nagrik : मुख्यमंत्री साय और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में प्रभावी और पारदर्शी मॉडल के रूप में उभर रहा है। सरकार का दावा है कि संवेदनशील नीतियों, डिजिटल व्यवस्था और संस्थागत विकास के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, महिलाओं और जरूरतमंद वर्गों को व्यापक लाभ मिल रहा है।
divyang varishth nagrik : सरकार के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में सामाजिक सुरक्षा, पुनर्वास, नशामुक्ति और दिव्यांगजन सशक्तिकरण की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से लाखों लोगों का जीवन बेहतर हुआ है। राज्य का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर उपलब्ध कराते हुए समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
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