जेल में मिला कौशल, रिहाई के बाद मिलेगा रोजगार का संबल

सुकमा जिला जेल में बंदियों को दिया गया स्वरोजगार प्रशिक्षण, प्रमाण पत्र वितरित

Skills development and Training to Prisioners
Skills development and Training to Prisioners

रायपुर, 24 जून 2026: Skills development and Training to Prisioners: जिला प्रशासन सुकमा और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के संयुक्त प्रयासों से जिला जेल सुकमा में बंदियों के कौशल विकास एवं पुनर्वास के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित फास्ट फूड मेकिंग और मुर्गीपालन प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले बंदियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

Skills development and Training to Prisioners: कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे बंदी

प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य बंदियों को व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना तथा रिहाई के बाद सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को स्वरोजगार के विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी गई, जिससे वे भविष्य में अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकें।

विशेषज्ञों ने बताए स्वरोजगार के अवसर

Skills development and Training to Prisioners: कार्यक्रम में सहायक निदेशक (पशु चिकित्सा सेवाएं) संदीप इंदुपकर, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख हनुमंत तोमर, अग्रणी बैंक प्रबंधक मनीष कुमार खुसरो, पूर्व बैंक प्रबंधक विकास कुमार तथा सहायक जेल अधीक्षक राजेश कुमार बिसेन उपस्थित रहे।

अधिकारियों ने प्रशिक्षणार्थियों को मुर्गीपालन, पशुपालन एवं अन्य स्वरोजगार गतिविधियों की संभावनाओं से अवगत कराया। साथ ही उन्हें सकारात्मक सोच के साथ नया जीवन शुरू करने और सफल उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया।

प्रशिक्षण से बढ़ा बंदियों का आत्मविश्वास 

Skills development and Training to Prisioners: प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बंदी दीपक कुमार राणा ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद वे मुर्गीपालन का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें नई दिशा और आत्मविश्वास मिला है।

भविष्य में भी जारी रहेंगे कौशल विकास कार्यक्रम

Skills development and Training to Prisioners: सहायक जेल अधीक्षक राजेश कुमार बिसेन ने आरसेटी द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में भी जेल के भीतर ऐसे व्यावहारिक और रोजगारपरक प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे।

इससे अधिक से अधिक बंदियों का कौशल विकास होगा और वे समाज में जिम्मेदार एवं स्वावलंबी नागरिक के रूप में अपनी नई पहचान बना सकेंगे।

पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी पहल 

Skills development and Training to Prisioners: जिला प्रशासन और आरसेटी की यह पहल बंदियों के पुनर्वास, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उन्हें अपराध मुक्त जीवन अपनाने और सम्मानपूर्वक समाज में पुनर्स्थापित होने का अवसर मिल रहा है।

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