विश्व साइकिल दिवस: राजकोट साइकिल क्लब ने फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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vishva cycle divas
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राजकोट, 3 जून (आईएएनएस)। vishva cycle divas : विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर देशभर में साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गुजरात के राजकोट शहर की अग्रणी संस्था राजकोट साइकिल क्लब (आरसीसी) पिछले एक दशक से अधिक समय से फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही है।

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राजकोट साइकिल क्लब 2015 में स्थापित

vishva cycle divas : राजकोट साइकिल क्लब के संस्थापक दिव्येश अधेरा ने बताया कि वर्ष 2015 में स्थापित इस क्लब ने साइकिलिंग को केवल खेल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे स्वस्थ जीवनशैली और ‘साइकिल टू वर्क’ जैसी सामाजिक सोच से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि क्लब की स्थापना के 11 वर्ष पूरे हो चुके हैं और वर्तमान में इसके साथ लगभग 170 सक्रिय सदस्य जुड़े हुए हैं, जिनमें छात्र, डॉक्टर, उद्योगपति और वरिष्ठ साइकिलिस्ट शामिल हैं।

 ईंधन बचत में साइकिल सबसे प्रभावी माध्यम

vishva cycle divas : दिव्येश अधेरा ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचत के लिए किए गए आह्वान को साकार करने में साइकिल सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं हर सप्ताह कम से कम दो लीटर पेट्रोल बचाने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि यदि देश का प्रत्येक नागरिक छोटे-छोटे कामों के लिए साइकिल का उपयोग करे और आधा या एक लीटर पेट्रोल भी बचाए, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को बड़ा लाभ होगा।

साइकिलिंग का कोई विशेष शौक नहीं

vishva cycle divas : क्लब के वरिष्ठ सदस्य और जेरॉक्स मशीन व्यवसायी 72 वर्षीय वीरजीभाई सतानी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि युवावस्था में उन्हें साइकिलिंग का कोई विशेष शौक नहीं था। हालांकि राजकोट में आयोजित पहली मैराथन देखने के बाद उन्हें प्रेरणा मिली और 64 वर्ष की उम्र में वे आरसीसी से जुड़े।

नियमित साइकिलिंग से घुटनों का पुराना दर्द पूरी तरह समाप्त 

vishva cycle divas : उन्होंने कहा कि नियमित साइकिलिंग की वजह से उनके घुटनों का पुराना दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया है। वीरजीभाई ने बताया कि उन्होंने राजकोट से सालांगपुर, जूनागढ़ से जामवाला गीर और राजकोट से द्वारका तक लंबी दूरी की सफल साइकिल यात्राएं की हैं। वे प्रतिदिन 30 से 40 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं और इसके बावजूद उन्हें थकान महसूस नहीं होती।

जीवन संघर्ष और साइकिलिंग के अनुभव साझा किए

vishva cycle divas : उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्कूल, कॉलेज और दैनिक कार्यों के लिए वाहनों की जगह साइकिल का उपयोग करें, जिससे स्वास्थ्य और ईंधन दोनों की बचत होगी। क्लब की सबसे प्रेरणादायक सदस्यों में शामिल 76 वर्षीय ऊषाबेन राजदेव, जिन्हें क्लब में प्यार से ऊषा माड़ी कहा जाता है, ने अपने जीवन संघर्ष और साइकिलिंग के अनुभव साझा किए।

ऊषाबेन रोजाना 45 किलोमीटर तक साइकिल चलाती हैं

vishva cycle divas : उन्होंने बताया कि मात्र 30 वर्ष की उम्र में पति के निधन के बाद दोनों बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्होंने 25 वर्षों तक बच्चों की ट्राइसाइकिल बेचने का व्यवसाय किया। इसी दौरान साइकिल और मोपेड चलाना उनकी जरूरत और आदत बन गया। ऊषाबेन ने कहा कि पिछले 11 वर्षों से वह राजकोट साइकिल क्लब से जुड़ी हुई हैं और आज भी रोजाना 36 से 45 किलोमीटर तक साइकिल चलाती हैं।

दैनिक जीवन में साइकिल के उपयोग को बढ़ाने की अपील

vishva cycle divas : उन्होंने बताया कि नियमित साइकिलिंग की वजह से उन्हें किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी नहीं है और उन्हें किसी बीमारी के लिए दवा तक लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उनका लक्ष्य जीवनभर सक्रिय और फिट बने रहना है। उन्होंने लोगों से दैनिक जीवन में साइकिल के उपयोग को बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि इससे ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण मुक्त भविष्य का निर्माण संभव होगा।

साइकिलिंग ने उनके जीवन को नई दिशा दी

vishva cycle divas : क्लब के सदस्य एके साहू ने बताया कि वे पिछले सात वर्षों से साइकिलिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिता के निधन के बाद वे गहरे अवसाद में चले गए थे, लेकिन साइकिलिंग ने उनके जीवन को नई दिशा दी। साइकिलिंग के माध्यम से उन्हें नया मित्र समूह मिला और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार हुआ।

साइकिलिंग स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

vishva cycle divas : उन्होंने कहा कि साइकिलिंग न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद है। ए.के. साहू ने कहा कि आज लोग छोटे-छोटे कामों के लिए भी मोटर वाहनों का उपयोग करते हैं, जबकि यदि इन कार्यों के लिए साइकिल का प्रयोग किया जाए तो ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण में भी कमी लाई जा सकती है। –आईएएनएस पीएसके


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(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)