रायपुर, 25 मई । akashvani raipur swarotsav : आकाशवाणी की गौरवशाली 90 वर्ष की यात्रा के उपलक्ष्य में आकाशवाणी रायपुर द्वारा उपशास्त्रीय एवं सुगम संगीत समारोह “स्वरोत्सव” का आयोजन किया गया।
ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी सुरमयी प्रस्तुति दिया
akashvani raipur swarotsav : स्थानीय विनायरा ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी सुरमयी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही तथा देर तक सभागार तालियों की गूंज से सराबोर रहा।
मिर्जापुर कजरी जैसी प्रस्तुतियों को दर्शकों ने विशेष सराहना दी
akashvani raipur swarotsav : कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध कलाकार श्वेता शिवाले एवं उर्मी दुबे की युगल प्रस्तुति से हुई। दोनों कलाकारों ने दादरा, मिर्जापुरी कजरी, सावनी नगमा तथा विभिन्न गीतों की मनोहारी प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। “आन मिलो सजना” और “मिर्जापुर कजरी” जैसी प्रस्तुतियों को दर्शकों ने विशेष सराहना दी।
पद्मश्री मदन चौहान ने सुगम संगीत की प्रस्तुति दी
akashvani raipur swarotsav : इसके पश्चात प्रसिद्ध गायक पद्मश्री मदन चौहान ने सुगम संगीत की प्रस्तुति दी। कबीर भजन, गजल तथा सूफियाना कलाम की उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति ने पूरे सभागार को आध्यात्मिक और संगीतमय वातावरण से भर दिया आकाशवाणी रायपुर के उपमहानिदेशक एवं क्लस्टर प्रमुख वी. राजेश्वर ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए कहा कि “स्वरोत्सव” आकाशवाणी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकसेवा प्रसारण की परंपरा का जीवंत उदाहरण है।

आकाशवाणी ने सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
akashvani raipur swarotsav : उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता पूर्व से लेकर आज तक आकाशवाणी ने समाज को जागरूक करने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बदलते समय के साथ भी आकाशवाणी अपने ध्येय वाक्य “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” के सिद्धांत पर निरंतर कार्य कर रही है।
संगीत और सुरों से सजे “स्वरोत्सव” का यह आयोज
akashvani raipur swarotsav : आकाशवाणी रायपुर के कार्यक्रम प्रमुख एवं सहायक निदेशक (कार्यक्रम) पंकज मेश्राम ने कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं और कलाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “स्वरोत्सव” जैसे आयोजनों का उद्देश्य श्रोताओं को उनकी पसंदीदा प्रस्तुतियों और कलाकारों से सीधे जोड़ना है, जिससे भारतीय संगीत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके। संगीत और सुरों से सजे “स्वरोत्सव” का यह आयोजन उपस्थित श्रोताओं के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहेगा।
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