कोयंबटूर, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। pollachi tender coconut exports : पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों में रुकावट ने तमिलनाडु के पोल्लाची में कच्चे नारियल के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले दो महीने से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली खेप की आपूर्ति लगभग ठप हो चुकी है।
व्यापारी बढ़ते माल-भाड़े और परिवहन में देरी से चिंतित
pollachi tender coconut exports : व्यापारी बढ़ते माल-भाड़े और परिवहन में होने वाली लंबी देरी से काफी चिंतित हैं। विदेशी खरीदारों की ओर से लगातार मांग होने के बावजूद कई खेप रद्द कर दी गई हैं, क्योंकि परिवहन और लॉजिस्टिक्स की अस्थिर स्थितियों को देखते हुए खरीदार भी काफी सतर्कता बरत रहे हैं।
वैश्विक शिपिंग व्यवस्था में आई बाधा
pollachi tender coconut exports : वैश्विक शिपिंग व्यवस्था में आई बाधाओं ने इस संकट को और भी गहरा कर दिया है, जिसके चलते प्रमुख समुद्री मार्गों पर जहाजों की भीड़ और मार्ग बदलने की समस्याएं सामने आ रही हैं। स्वेज नहर के रास्ते होने वाला परिवहन काफी धीमा हो गया है, जबकि वैकल्पिक मार्गों को अपनाने से यूरोपीय देशों तक माल पहुंचाने में लगने वाला समय बढ़कर लगभग एक महीना हो गया है।
खाड़ी देशों खेप की आपूर्ति भी प्रभावित
pollachi tender coconut exports : खाड़ी देशों को होने वाली खेप की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। जहाजों को ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ के रास्ते से न भेजकर दूसरे मार्गों से भेजा जा रहा है, जिससे परिवहन में लगने वाला समय दोगुना हो गया है। इसके चलते कच्चे नारियल जैसे जल्दी खराब होने वाले सामानों का निर्यात करना और भी मुश्किल होता जा रहा है।
सऊदी अरब और कुवैत से होने वाली निर्यात रुक गया
pollachi tender coconut exports : परिणामस्वरूप, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात पूरी तरह से रुक गया है, जबकि यूरोप, पूर्वी एशिया और उत्तरी अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में होने वाली खेप की आपूर्ति भी निलंबित कर दी गई है। परिवहन में लगने वाले इस लंबे समय के कारण उत्पाद की गुणवत्ता को बनाए रखना मुश्किल हो गया है, क्योंकि कच्चे नारियल बहुत जल्दी खराब हो जाते हैं और इनकी ‘शेल्फ-लाइफ’ सिर्फ एक सप्ताह के आसपास होती है।
श्रमिकों की कमी के कारण भी अतिरिक्त दबाव
pollachi tender coconut exports : घरेलू स्तर पर, इस क्षेत्र को श्रमिकों की कमी के कारण भी अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा चुनाव संबंधी गतिविधियों में व्यस्त है। इसके चलते खेतों और निर्यात इकाइयों में कटाई, छिलका उतारने, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग जैसे कार्य बुरी तरह से बाधित हुए हैं।
उत्पादन लागत में इजाफा हुआ
pollachi tender coconut exports : संघर्ष के बाद उर्वरकों की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण उत्पादन लागत में भी इजाफा हुआ है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। इसके साथ ही, ‘सफेद मक्खी’ और ‘रूट विल्ट’ जैसे कीटों के हमलों व लंबे समय तक पड़े सूखे के कारण भी नारियल के उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप पैदावार में 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।
नारियल की खेती के लिए कुल 86,800 हेक्टेयर जमीन का उपयोग
pollachi tender coconut exports : गौरतलब है कि कोयंबटूर जिले में नारियल की खेती के लिए कुल 86,800 हेक्टेयर जमीन का उपयोग किया जाता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा पोल्लाची क्षेत्र में आता है। पोल्लाची अपने उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे नारियलों के लिए जाना जाता है, जिनमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है। –आईएएनएस डीसीएच/
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(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
















