‘यह तीर्थाटन है, पर्यटन नहीं,’ चारधाम की यात्रा पर बोले स्वामी चिदानंद

Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra
Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra

ऋषिकेश, 18 अप्रैल 2026। Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra: स्वामी चिदानंद सरस्वती ने चारधाम यात्रा के शुभारंभ पर कहा कि मैं सभी यात्रियों का स्वागत करता हूं।

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Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra: यात्रियों को यह समझना चाहिए कि यह तीर्थाटन है, पर्यटन नहीं

उन्होंने कहा कि यात्रियों को यह समझना चाहिए कि यह तीर्थाटन है, पर्यटन नहीं। ऋषिकेश में स्वामी चिदानंद ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि आज विश्व धरोहर दिवस भी है।

मैं चारधाम यात्रा के लिए रवाना होने वाले सभी जत्थों का अभिनंदन करता हूं और सभी यात्रियों का स्वागत करता हूं।उत्तराखंड सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड दिव्य है, उत्तराखंड भव्य है।

उत्तराखंड देवों की धरती है, देवताओं का निवास है। उत्तराखंड संगम और संयम की धरती है, पवित्रता की धरती है, और दिव्यता की धरती है, इसलिए चारधाम की यात्रा केवल बाहर की यात्रा नहीं है, बल्कि भीतर की भी यात्रा है।

जब यात्री तीर्थ पहुंचते हैं तो केवल उनके द्वार पर नहीं पहुंचते, बल्कि भीतर के द्वार भी खुल जाते हैं

Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra: स्वामी ने कहा कि जब यात्री बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पहुंचते हैं तो केवल उनके द्वार पर नहीं पहुंचते, बल्कि भीतर के द्वार भी खुल जाते हैं।

वहां मन शांत हो जाता है और शब्द गौण हो जाते हैं। भीतर-बाहर व्यक्ति खिल उठता है और खुल उठता है। यहां नदियां गूंजती हैं, पर्वत तपस्या करते हैं, हवा अठखेलियां करती हुई वेद गान और मंत्रों का श्रवण कराती हुई जीवन को पवित्र करती है।

चारधाम यात्रा मनोरंजन की नहीं, यह मन को शुद्ध करने की यात्रा है

Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra:  स्वामी चिदानंद ने स्पष्ट किया कि चारधाम यात्रा को केवल पर्यटन न मानें। यह तीर्थाटन की यात्रा है, मनोरंजन की नहीं, यह मन को शुद्ध करने की यात्रा है।

उन्होंने कहा कि आज इस यात्रा पर हम सबका, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश से हिमालय की इस पवित्र धरती से सबका अभिनंदन करते हैं। स्वामी ने कहा कि लोग बड़ी आस्था के साथ आते हैं। कुंभ मेला इसका उदाहरण है कि आस्था हमेशा व्यवस्था से बड़ी है।

अच्छी बात यह है कि उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा की व्यवस्था में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

चारधाम यात्रा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को याद दिलाती है

Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra: पर्यटन विभाग पूरी तरह जुटा हुआ है ताकि यह यात्रा सच्चे तीर्थाटन का रूप ले सके। उन्होंने कहा कि यह चारधाम यात्रा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को याद दिलाती है।

आस्था तो महान है ही, लेकिन जब व्यवस्थाएं सुंदर होती हैं तो ज्यादा से ज्यादा लोग तीर्थों की दिव्यता का अनुभव कर सकते हैं। यह आस्था और व्यवस्था का संगम है।

स्वामी चिदानंद ने गंगा को जीवन रेखा और मां बताया। उन्होंने कहा कि गंगा जीवनदायिनी है। उन्होंने अपील की कि जो भी तीर्थों पर आते हैं, वे गंगा के तटों को प्रदूषित न करें। पूजा और प्रदूषण साथ-साथ नहीं चल सकते।

उन्होंने संकल्प दिलाया चारधाम यात्रा के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक का बिल्कुल उपयोग न करें

Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra: उन्होंने संकल्प दिलाया कि चारधाम यात्रा के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक का बिल्कुल उपयोग न करेंअगर उपयोग करें तो उसे अपने साथ वापस ले आएं, कहीं न फेंकें।

पुराने कपड़े भी न छोड़ें। स्वामी ने कहा कि यात्रा से पुण्य मिलेगा, लेकिन हरित यात्रा से और ज्यादा पुण्य मिलेगा। यात्रा पर आकर पेड़ न काटें, बल्कि पेड़ लगाने का संकल्प लेकर जाएं।

जितने साल के आप हैं, उतने पेड़ जरूर लगाएं। उन्होंने यात्रियों से आग्रह किया कि जल को प्रदूषित न करें, जल के तट पर बैठकर ध्यान करें।

Swami Chidanand spoke on Chardham Yatra: नशा न करें, शांति से आएं और शांति से लौटें। कोई हुड़दंग न करें। –आईएएनएस डीकेएम/डीकेपी

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(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)