नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। Despite slow growth : भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ने के बावजूद भारत इस क्षेत्र और चीन से आगे निकलने के लिए तैयार है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) द्वारा शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
एडीबी विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि
Despite slow growthv : एडीबी के विश्लेषण के मुताबिक, विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के कारण पिछले वर्ष के 5.4 प्रतिशत से घटकर 2026 और 2027 में 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
भारत की आर्थिक वृद्धि 2026 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान
Despite slow growth : इसके विपरीत, भारत की आर्थिक वृद्धि 2026 में 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो मजबूत घरेलू खपत के चलते 2027 में बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल और 2027 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ धीमी पड़ने की आशंका है, लेकिन भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
एडीबी ने कहा कि यह क्षेत्र मजबूत घरेलू मांग, स्थिर श्रम बाजार
Despite slow growth : एडीबी ने यह भी कहा कि यह क्षेत्र मजबूत घरेलू मांग, स्थिर श्रम बाजार और बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के चलते अभी भी बेहतर स्थिति में है, हालांकि जोखिम नीचे की ओर बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) में आर्थिक वृद्धि इस साल घटकर 4.6 प्रतिशत और अगले साल 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 5 प्रतिशत थी।
प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी और निर्यात में धीमापन
Despite slow growth : इसके पीछे प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी और निर्यात में धीमापन मुख्य कारण हैं। एडीबी के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने कहा कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष ऊर्जा और खाद्य कीमतों को बढ़ा सकता है और वित्तीय स्थितियों को और खराब कर सकता है, जो इस क्षेत्र के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
Despite slow growth : व्यापार नीतियों में लगातार उतार-चढ़ाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक व्यापार नीतियों में लगातार उतार-चढ़ाव से भी क्षेत्र की ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, मजबूत निजी खपत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को कुछ हद तक समर्थन मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, तेल की कीमतें फिलहाल ऊंची बनी रह सकती हैं, लेकिन अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले समय में इनमें स्थिरता आ सकती है। –आईएएनएस डीबीपी
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(यह खबर आईएएनएस समाचार एजेंसी के जरिए ली गई है। हिंद मित्र इसकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है।)
















