सतो गुणी कर्म का फल हमेशा मिलता रहता है : परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी

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Gita Gyan Amritvarsha
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गुरुग्राम: Gita Gyan Amritvarsha at Gurugram: परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने एक दिवसीय सत्संग के माध्यम से गीता अमृतवर्षा में यह बताए कि अधिकतर हम यह कह देते हैं कि हम कर्म करते हैं फिर भी दुखी रहते हैं लेकिन जब हम सात्विक कर्म करते हैं तब उसका फल हमेशा मिलता रहता है । कई गुना होकर मिलता है।

Gita Gyan Amritvarsha at Gurugram:  हम जीवन को ठीक से समझ नहीं पाते हैं और सतोगुण की जगह तमोगुण और रजोगुणी करना का कार्य करते हैं तब जीवन दुखी रहता है ।

हर मनुष्य की इच्छाएं अनंत है और उनकी पूर्ति के लिए अनेक देवी देवताओं की पूजा करते हैं, लेकिन भगवान कृष्ण कहते हैं कि जो मेरी पूजा करता है उनकी कोई इच्छा शेष नहीं रह जाती है। उनकी सब इच्छाएं भगवान स्वयं पूरा करते है।

Gita Gyan Amritvarsha at Gurugram: जिस कर्म को हम लीन होकर करते हैं वही कर्म हमें फल देता है

उन्होंने महाभारत के युद्ध का उदाहरण देकर बताया कि श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं की जो अस्त्र तुम्हारे पास है उससे कई गुना अधिक तुम्हारे सामने वाले के पास है फिर क्या करोगे, अर्जुन डिप्रेशन में रहता है, श्री कृष्ण कहते है मैं तुम्हें ज्ञान रूपी अस्त्र दूंगा जो तुम दोनों के पास नहीं है।

Gita Gyan Amritvarsha:  आगे गुरुदेव बताएं कि जिस कर्म को हम लीन होकर करते हैं वही कर्म हमें फल देता है शकुनी भले ही षड्यंत्र करता है लेकिन लीन होकर के अपना कर्म किया ।

खीर में विष मिलाना, लाक्षागृह का षड्यंत्र सभी कार्य किया सब में असफल रहा लेकिन हार नहीं माना और अंत में पाशा के खेल में सफल हो गया।  जो कर्म हम लीन होकर के करते हैं उसी का फल हमें प्राप्त होता है, उसमे सफलता मिलती है।

हमेशा अपने स्वयं का मूल्यांकन करना चाहिए

Gita Gyan Amritvarsha: आगे गुरुदेव बताएं बुद्धि का संबंध ज्ञान से होना चाहिए अज्ञान से नहीं अज्ञान से होने पर जीवन में क्लेश रहता है कलह रहती है , हमेशा अपने स्वयं का मूल्यांकन करना चाहिए। भगवान अर्जुन को ज्ञान रूपी अस्त्र देते हैं, ज्ञान से सब कुछ प्राप्त हो जाता है।

मनुष्य को ज्ञान, कर्म ,भक्ति से योग करना चाहिए संन्यास से प्रेम से जुड़ना चाहिए ,मनुष्य आज्ञान से जुड़ जाता है ज्ञान से ध्यान श्रेष्ठ ,ध्यान से श्रेष्ठ कर्म ,और कर्म से भी श्रेष्ठ फल का त्याग । वही सतोगुणी कर्म और निर्दिष्ट कर्म है, श्रेष्ठ कर्म है। लीन होकर सात्विक कर्म करते रहना, अहंकार में किया गया कर्म का फल निष्फल हो जाता है।

जीवन को सही ढंग से जीने पर ही सुख प्राप्त होता है

Gita Gyan Amritvarsha at Gurugram:  गुरुदेव लक्ष्मण रेखा का उदाहरण देते हुए यह बताए की जब भगवान साथ रहते हैं तब दुख महसूस नहीं होता ,सीता माता वन में भी भगवान के साथ प्रसन्न है ,लेकिन संसार का हर प्राणी अपनी समस्त रेखाओं को पार कर लिया है और दुख की घाटी में घूम रहा है ,सुख की कामना कर रहा है, शांति प्राप्त करना चाहता है।

आज के समय में गुरु शास्त्र के माध्यम से जो रेखा खींची जा रही है वह सब पार कर लेते हैं और हमेशा डरे हुए होते हैं । जीवन को सही ढंग से जीने पर ही सुख प्राप्त होता है फिर शांति को खोजना नहीं पड़ता शांति स्वयं वरण कर लेती है।

Gita Gyan Amritvarsha at Gurugram:  जीवन में हर मनुष्य के सामने लक्ष्मण रेखा है मर्यादा की, संस्कृति की ,धर्म की रेखाएं जिसका सबको पालन करना चाहिए। कथा सुनने काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही, सभी ने गीता ज्ञान ग्रहण किया ।

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