किसी को न डराना अहिंसा है, किसी से न डरना आत्मज्ञान

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ahinsa aatmagyaan
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अध्यात्म 30 मार्च । ahinsa aatmagyaan : जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर वर्धमान की महावीर बनना मात्र की यात्रा नहीं, उनके व्यक्तित्व में केवल कथा नहीं, बल्कि मानव चेतना के लोकतंत्रीकरण की शुरुआत थी।

शांति-अहिंसा के मार्ग पर चलकर ‘आध्यात्मिक बदलाव’

ahinsa aatmagyaan : उन्होंने उद्घोष किया कल्याण किसी जाति, वर्ग विशेष का धार्मिक उत्तर न होकर शांति-अहिंसा के मार्ग पर चलकर हर मानवता जगाने वाला एक ‘आध्यात्मिक बदलाव’ है। आत्म-विजय का महत्व है। उनके सिद्धांत वास्तव में धरती के प्रत्येक मानव के लिए साथ-साथ मानवता के लिए सार्वकालिक गाइड की तरह हैं।

अहिंसा और युद्ध के ज्वालामुखी

ahinsa aatmagyaan : अहिंसा और युद्ध के ज्वालामुखी के बीच से निकलकर इस विश्व के लिए उनकी अहिंसा का व्यापक अर्थ है— ‘किसी को न डराना’ अहिंसा है, ‘किसी से न डरना’ आत्मज्ञान। जब समाज भय के धरातल पर चलता है, तो आतंक का मनोवैज्ञानिक तंत्र बढ़ता जाता है।

मैं और मेरा’ का जहां अंत होता है महावीर की अहिंसा

ahinsa aatmagyaan : ‘मैं और मेरा’ का जहां अंत होता है वहीं से महावीर की अहिंसा प्रारंभ होती है। जब तक हमारी इच्छाएं अनंत रहेंगी, तब तक हिंसा और तनाव खत्म नहीं हो सकते।

सभी युद्ध अंततः मैं सही हूं और तुम गलत के अहंकार के परिणाम

ahinsa aatmagyaan : सभी युद्ध अंततः मैं सही हूं और तुम गलत के अहंकार के परिणाम हैं। महावीर कहते हैं, ‘सत्य के कई पहलू हो सकते हैं, तुम सही हो और मैं भी हो सकता हूं। हो सकता है, हमारी खिड़की से दिखने वाला आसमान नीला हो और दूसरे की खिड़की से दिखने वाला बादल भरा।’ सत्य को स्वयं जानो।

आज की हिंसक दुनिया में महावीर का ‘मौन’ और ‘अहिंसा’ सबसे शक्तिशाली

ahinsa aatmagyaan : युद्ध तभी बंद होंगे जब व्यक्ति ‘मैं’ और ‘मेरा’ से बाहर आएगा। महावीर के विचार हमें एक सभ्य और सह-अस्तित्व वाला भविष्य की ओर ले जाते हैं। आतंकवाद कहता है ‘तुम मरोगे तभी मैं जीवित रहूंगा।’ महावीर कहते हैं, ‘सब सुखी हों तभी मैं सुरक्षित रहूंगा।’ आज की विस्फोटक और हिंसक दुनिया में महावीर का ‘मौन’ और ‘अहिंसा’ सबसे शक्तिशाली जवाब है। महावीर जानते थे, युद्ध से समस्या का समाधान नहीं, बल्कि हृदय परिवर्तन और विचारिक संवेदनशीलता से ही संभव है।

तोषी सम्यक गोधा..
रायपुर ( छत्तीसगढ़ )


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