दिल्ली शराब नीति मामला केजरीवाल और सिसोदिया की कैद से लेकर बरी होने तक की पूरी कहानी

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Delhi Liquor Policy Case
Delhi Liquor Policy Case

नई दिल्ली, 27 फरवरी । Delhi Liquor Policy Case :  राष्ट्रीय राजधानी की राऊज एवेन्यू अदालत ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके करीबी सहयोगी मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया। इस मामले को शराब नीति घोटाला भी कहा जाता है।

केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बावजूद बरी

Delhi Liquor Policy Case : इस मामले में केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बावजूद बरी कर दिया गया है। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

भाजपा ने उनके खिलाफ रची साजिश

Delhi Liquor Policy Case : अरविंद केजरीवाल का आरोप है कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए भाजपा ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। ये सब शुरू कैसे हुआ था, अब वो भी जान लेते हैं। आम आदमी पार्टी सरकार ने नवंबर 2021 में राष्ट्रीय राजधानी में शराब कारोबार और उसके नियमन में सुधार और संरचनात्मक बदलाव लाने के लिए दिल्ली आबकारी नीति तैयार की थी।

शराब माफिया के साथ मिलीभगत

Delhi Liquor Policy Case : पॉलिसी लागू होने के कुछ ही महीनों के भीतर यह विवादों में उस समय घिर गई, जब भाजपा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर शराब माफिया के साथ मिलीभगत कर अपना खजाना भरने का आरोप लगाया। आरोप प्रत्यारोप के दौर के बीच 2022 में दिल्ली सरकार ने इस नीति को रद्द कर दिया। जुलाई 2022 में तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसके बाद केस दर्ज किया गया।

नीति निर्माण में कई ‘प्रक्रियात्मक खामियों और कमियों’ की ओर इशारा

Delhi Liquor Policy Case : केस में नीति निर्माण में कई ‘प्रक्रियात्मक खामियों और कमियों’ की ओर इशारा किया गया। उपराज्यपाल को सौंपी गई रिपोर्ट में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा लिए गए कई मनमानी और एकतरफा फैसलों का उल्लेख किया गया और दावा किया गया था कि इसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को 500 करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ।

Delhi Liquor Policy Case :  विवादों से घिरी केजरीवाल सरकार

विवादों से घिरी केजरीवाल सरकार ने अनियमितता और मिलीभगत के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि यह कदम ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने और शराब के काले बाजार पर नकेल कसने के लिए उठाया गया था, लेकिन, दिल्ली के उपराज्यपाल को सौंपी गई रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी सरकार और नेताओं द्वारा शराब कारोबारियों से मिली रिश्वत और अवैध रिश्वत का उल्लेख किया गया था।

Delhi Liquor Policy Case :  शराब नीति में थोक विक्रेताओं को लाभ

इसमें आरोप लगाया गया था कि लाइसेंस शुल्क पर सैकड़ों करोड़ रुपए की छूट और माफी दी गई थी। ‘गंभीर उल्लंघनों’ की सूचनाओं के आधार पर उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की।  सीबीआई ने अपनी जांच में मनीष सिसोदिया और अन्य आम आदमी पार्टी नेताओं पर शराब नीति में थोक विक्रेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए हेरफेर करने सहित कई गंभीर उल्लंघनों का आरोप लगाया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

सीबीआई ने दावा शराब कंपनियों ने100 करोड़ रुपए की रिश्वत दी

Delhi Liquor Policy Case :  सीबीआई ने दावा किया कि कई शराब कंपनियों (जिनमें दक्षिणी राज्यों की कंपनियां भी शामिल हैं) ने आम आदमी पार्टी के नेताओं को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत दी। सीबीआई ने दावा किया कि इस पैसे का इस्तेमाल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले गोवा और पंजाब में पार्टी के चुनाव प्रचार के लिए किया गया।

Delhi Liquor Policy Case : आम आदमी पार्टी के खिलाफ बदले की भावना

 इसके बाद यह मुद्दा एक बड़े विवाद में बदल गया, जिसमें भाजपा ने केजरीवाल सरकार पर पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकारी खजाने की लूट का आरोप लगाया, जबकि केजरीवाल ने इन आरोपों का सिरे से खंडन करते हुए केंद्र सरकार पर आम आदमी पार्टी के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया।

जब आरोप तय किए गए, तो सीबीआई की चार्जशीट में अरविंद केजरीवाल का नाम मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर शामिल किया गया। केजरीवाल पर विवादास्पद नीति बनाने और अपराध की आय को हेराफेरी करने का सीधा आरोप लगाया गया।

मनमानी और एकतरफा निर्णय लेने का आरोप

Delhi Liquor Policy Case :  तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, जिनके पास आबकारी मंत्री का पोर्टफोलियो भी था, पर निजी शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए ‘मनमानी और एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने 21 मार्च 2024 को केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 26 जून 2024 को इसी मामले में सीबीआई ने भी उन्हें गिरफ्तार किया। (आईएएनएस)

 


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