आईआईटी भिलाई में ‘जेंडर मोडालिटीज़ ऑफ़ रिमेम्बरिंग इन साउथ एशियन लिटरेचर’ के राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ आयोजन

Gender Modalities of Remembering in South Asian Literature
Gender Modalities of Remembering in South Asian Literature

 रायपुर: Gender Modalities of Remembering in South Asian Literature: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के लिबरल आर्ट्स विभाग द्वारा 15–16 जनवरी 2026 को नालंदा लेक्चर हॉल में ‘जेंडर मोडालिटीज़ ऑफ़ रिमेम्बरिंग इन साउथ एशियन लिटरेचर’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का  आयोजन किया गया।

सम्मेलन का उद्देश्य दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परिप्रेक्ष्य में स्मृति को एक लैंगिक और सन्निहित अभ्यास के रूप में समझना तथा इस क्षेत्र में हो रहे अकादमिक शोध को साझा करने का मंच प्रदान करना था। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से संकाय सदस्यों और शोधार्थियों ने सम्मेलन में सहभागिता की।

Gender Modalities of Remembering in South Asian Literature: महिला आंदोलनों की दो शताब्दियों को याद करना: स्मृति और नारीवादी इतिहासलेखन का पुनर्विचार’ विषय पर विमर्श किया

सम्मेलन में जामिया मिलिया इस्लामिया की प्रोफेसर सिमी मल्होत्रा ने अपने व्याख्यान में भारत में महिला आंदोलनों की दो शताब्दियों को याद करना: स्मृति और नारीवादी इतिहासलेखन का पुनर्विचार’ विषय पर विमर्श किया।

उन्होंने स्मृति के दृष्टिकोण से नारीवादी इतिहास लेखन की पड़ताल करते हुए पिछले दो सौ वर्षों में महिला आंदोलनों के विकास को रेखांकित किया और दक्षिण एशिया में लैंगिक इतिहास के लेखन में स्मरण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

Gender Modalities of Remembering in South Asian Literature: सम्मेलन के दूसरे दिन सेंट मीरा कॉलेज फॉर गर्ल्स, पुणे की उपप्राचार्य डॉ. स्नोबर सतारावाला ने ‘रिमेम्बरिंग द मार्जिन: जेंडर, माइनॉरिटी मेमोरी और साउथ एशियन लिटरेचर में प्रतिनिधित्व की राजनीति’ विषय पर अपने व्याख्यान में

उन्होंने सिनेमा, साहित्यिक ग्रंथों और मौखिक आख्यानों के माध्यम से यह विश्लेषण किया कि किस प्रकार अल्पसंख्यक समुदायों की स्मृतियाँ संरक्षित या उपेक्षित की जाती हैं, तथा हाशिए के इतिहासों को पुनः सामने लाने में साहित्य की भूमिका को रेखांकित किया।

सम्मेलन के दौरान कुल पाँच विषयगत पैनलों में गहन अकादमिक विमर्श हुआ

Gender Modalities of Remembering in South Asian Literature: सम्मेलन के दौरान कुल पाँच विषयगत पैनलों में गहन अकादमिक विमर्श हुआ। उद्घाटन पैनल में लैंगिक आवाज़ों और स्वदेशी सौंदर्यशास्त्र पर चर्चा करते हुए लोक एवं आदिवासी कला परंपराओं को स्मृति के जीवंत और सन्निहित अभिलेखागार के रूप में देखा गया।

इसके पश्चात हिंसा के लैंगिक प्रति-आख्यानों पर केंद्रित पैनल में यह विश्लेषण किया गया कि साहित्य और सांस्कृतिक ग्रंथ आधिकारिक इतिहासलेखन से इतर अस्तित्व, प्रतिरोध और भावात्मक स्मृति को किस प्रकार अभिव्यक्त करते हैं।

तीसरे पैनल में भेद्यता, जाति और पहचान के प्रश्नों पर विमर्श हुआ, जहाँ साहित्यिक साक्ष्यों और कथात्मक स्मृति में जाति तथा लिंग के प्रतिच्छेदन को रेखांकित किया गया। चौथे पैनल में रिश्तेदारी, घरेलूता और राष्ट्रीय स्मृति के संदर्भ में मातृ विरासत, रोज़मर्रा के स्थानों और कर्तव्य की लैंगिक धारणाओं का विश्लेषण किया गया।

Gender Modalities of Remembering in South Asian Literature: अंतिम पैनल में स्मृति की स्थानीय भाषाई और डायजेटिक अभिव्यक्तियों पर चर्चा करते हुए वैकल्पिक निमोनिक रिपॉज़िटरी की खोज की गई, जो स्मरण के प्रचलित पाठ-केंद्रित रूपों को चुनौती देती हैं। Gender Modalities of Remembering

समग्र रूप से, सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि लैंगिक स्मृति एक सक्रिय सामाजिक – सांस्कृतिक अभ्यास है, जो अवतार, प्रभाव, पदानुक्रम और कथा रूपों से निर्मित होती है।

कार्यक्रम ने दक्षिण एशिया में हाशिए पर रहने वाली आवाज़ों को सशक्त करने तथा प्रचलित स्मरण-पद्धतियों को चुनौती देने वाले प्रति-आख्यानों के निर्माण में साहित्य और सांस्कृतिक ग्रंथों की निर्णायक भूमिका को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया गया।

Read More :  रायपुर साहित्य उत्सव : आदि से अनादि तक का आयोजन 23 जनवरी से 25 जनवरी 2026 तक


#छत्तीसगढ,#मध्यप्रदेश#महाराष्ट्र,#उत्तर प्रदेश,#बिहार