लाइफ स्टाइल;18 दिसंबर । aayurved bar bar pyaas lagana : मौसम के बदलते ही लोगों की दिनचर्या में भी स्वाभाविक रूप से अमूल चूल बदलाव देखने को मिलता है, जिसका सीधा प्रभाव खानपान और दिनचर्या पर पड़ता है। शीत ऋतु हो या ग्रीष्म ऋतु, इनके आगमन के साथ ही लोगों की दिनचर्या और आदतों में स्पष्ट परिवर्तन दिखाई देने लगता है।
ठंड के मौसम में अधिकांश लोग गरम पदार्थों का सेवन
aayurved bar bar pyaas lagana : ठंड के मौसम में अधिकांश लोग गरम भोजन, गरम वस्त्र और गरम पेय पदार्थों का सेवन करने लगते हैं। सूप, चाय, काढ़ा और अन्य गर्म पेय न केवल शरीर को ऊष्मा प्रदान करते हैं, बल्कि ठंड से बचाव में भी सहायक होते हैं।
जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना ही स्वस्थ रहने का सबसे बेहतर उपाय
aayurved bar bar pyaas lagana : स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शीत ऋतु में लोगों को प्यास कम लगती है, जिसके कारण पानी का सेवन घट जाता है। हालांकि, कम प्यास लगने के बावजूद शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में गर्म पानी या गुनगुने पेय के रूप में तरल पदार्थ का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के अनुसार खानपान और जीवनशैली में संतुलन बनाए रखना ही स्वस्थ रहने का सबसे बेहतर उपाय है।
शरीर में पानी की आवश्यक मात्रा का रहना आवश्यक
aayurved bar bar pyaas lagana : विशेषज्ञों के अनुसार हमारे शरीर में पानी की आवश्यक मात्रा का बना रहना अत्यंत आवश्यक है। जब शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तो प्यास लगने के रूप में शरीर हमें संकेत देता है। चिकित्सक और हेल्थ एक्सपर्ट्स भी इस बात की सलाह देते हैं कि समय-समय पर शरीर की जरूरत के हिसाब से इंसान को पानी पीना चाहिए।
aayurved bar bar pyaas lagana : औसतन 3 से 4 लीटर पानी रोज पीना चाहिए
एक स्वस्थ व्यक्ति को औसतन 3 से 4 लीटर पानी रोज पीना चाहिए। लेकिन कई लोगों को कुछ कारणों से बार-बार प्यास लगने की समस्या हो जाती है। आवश्यकता से अधिक प्यास लगने की समस्या शरीर में कुछ बीमारियों का संकेत भी हो सकती है।
बार-बार प्यास लगने की इस समस्या को पॉलीडिप्सिया के नाम से जाना जाता
aayurved bar bar pyaas lagana : मधुमेह (डायबिटीज) जैसी समस्याओं में व्यक्ति को अधिक प्यास लगती है। बार-बार प्यास लगने की इस समस्या को पॉलीडिप्सिया के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति बार-बार प्यास महसूस करता है, तो यह शरीर में छिपी किसी बीमारी की ओर संकेत हो सकता है। ऐसे में समय पर जांच और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर इस समस्या से बचाव संभव है। आइये जानते हैं इनके बारे में और इस समस्या से बचने के लिए आयुर्वेदिक इलाज के बारे में।
अत्यधिक प्यास लगने की समस्या के पीछे क्या कारण
aayurved bar bar pyaas lagana : बार- बार प्यास लगने की समस्या को लेकर किये गए तमाम रिसर्च और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि अत्यधिक प्यास लगना शरीर में कुछ बीमारियों का संकेत हो सकता है। एक स्वस्थ और सामान्य व्यक्ति को दिन भर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी की आवश्यकता होती है लेकिन किसी बीमारी या दूसरी स्थिति में इसकी मात्रा बढ़ और घट सकती है।
लेकिन जब किसी भी व्यक्ति को औसत से अधिक प्यास लगने लगे तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आइये जानते हैं अत्यधिक प्यास लगने की समस्या के पीछे क्या कारण है और यह शरीर में किन बीमारियों के बारे में संकेत करता है?
- डिहाइड्रेशन की स्थिति में शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे प्यास, मुंह सूखना, थकान और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- डायबिटीज में रक्त में शुगर असंतुलन के कारण व्यक्ति को अत्यधिक प्यास लगती है।
- मानसिक तनाव और एंग्जायटी से जूझ रहे लोगों में भी प्यास लगने की शिकायत देखी जाती है।
- अपच या पाचन संबंधी समस्याओं के कारण भी बार-बार प्यास लग सकती है।
- इसके अलावा अत्यधिक पसीना आना शरीर में पानी की कमी पैदा करता है, जिससे बार-बार प्यास लगने लगती है।
बार-बार प्यास लगने की समस्या का आयुर्वेदिक उपचार
aayurved bar bar pyaas lagana : आयुर्वेद में शरीर से जुड़ी हर समस्या का प्राकृतिक उपचार बताया गया है। प्राचीन काल से ही लोग विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए आयुर्वेद पर भरोसा करते आ रहे हैं। आयुर्वेद के अनुसार अत्यधिक प्यास लगना शरीर में असंतुलन का संकेत होता है, जिसे कुछ घरेलू नुस्खों से नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को बार-बार प्यास लगने की समस्या हो रही है, तो वह आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर राहत पा सकता है। हालांकि समस्या लंबे समय तक बनी रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
- आयुर्वेद के मुताबिक बार-बार प्यास लगने की समस्या होने पर आप आंवले के पाउडर को शहद के साथ मिलकर खाएं। इसका नियमित रूप से सेवन करने पर बार-बार प्यास लगने की समस्या में आराम मिलता है। इस समस्या में शहद और आंवले के पाउडर का अनुपात बराबर होना चाहिए।
- बार-बार प्यास लगना शरीर में कई गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए आप आयुर्वेद में बताये गए नियमों का पालन कर सकते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक बार-बार प्यास लगने की समस्या में काली मिर्च के पाउडर का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। एक चम्मच काली मिर्च के पाउडर को पानी में उबालें और फिर इसे ठंडा करके पिएं।
- बार-बार प्यास लगने की समस्या में आयुर्वेद के मुताबिक सौंफ का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। सौंफ को आयुर्वेद में औषधि माना जाता है। बार-बार प्यास लगने पर आप सौंफ को भिगो दें और फिर इसे अच्छी तरह से पीसकर इसका सेवन करें। रोजाना इसका सेवन करने से बार-बार प्यास लगने की समस्या दूर होती है।
- बार-बार प्यास लगने की समस्या में मुलेठी आयुर्वेद की एक प्रभावी औषधि है, जो शरीर को ठंडक देने और अत्यधिक प्यास की समस्या में राहत देने में सहायक मानी जाती है। शरीर की गर्मी और जलन को कम करती है । गले की खराश और मुंह के सूखेपन में राहत; पाचन तंत्र को मजबूत करती है ।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
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