Chaitra Navratri 2022 : माँ की उपासना के बाद सांग बाना … सिर पर कलश धारण किए नंगे पैर चल कर…. जंवारा विसर्जन यात्रा निकली

रायपुर,

Chaitra Navratri 2022  : साधना, उपासना, व्रत के लिए एक सर्वमान्य माँ की आराधना है जो सबके कष्ट दूर करती हैं. चैत्र नवरात्र की नवमी तिथी को माँ की विसर्जन यात्रा निकली जिसका का स्वागत भक्तो के द्वारा जगह जगह पर किया गया | जगज्जननी माँ भगवती श्री दुर्गा जी की कृपा से महिलाएं, सिर पर कलश धारण किए नंगे पैर चल रहीं थी। धूप की तपन से बचाने के लिए सेवादार सड़कों पर पानी का बौछार करते चल रहे थे| जोत जंवारा का विसर्जन विधि विधान सहित किया गया |  WhatsApp Image 2022 04 10 at 3.03.47 PM WhatsApp Image 2022 04 10 at 3.03.46 PMजोत जंवारा विसर्जन में सड़कों पर भक्ति उल्लास छाया रहा।  भक्तों की आस्था देखकर कई घर के सामने लोग घरों से पाइप के जरिये सड़क पर पानी डालकर ठंडक पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे।

जोत जंवारा विसर्जन यात्रा बढई पारा, तात्यापारा, सत्ती बाजार, पुरानी बस्ती होकर कंकाली तालाब पहुंची। यात्रा में अनेक युवा, बच्चे अपने हाथ, गालों पर तेज धार वाले छोटे भाले, तीर चुभोकर चल रहे थे। इसे सांग बाना धारण करना कहा जाता है। विसर्जन करने के लिए कंकाली तालाब में भक्तों का हुजूम उमड़ती रही है।WhatsApp Image 2022 04 10 at 3.03.46 PM 2

चैत्र नवरात्र के अंतिम दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धि दात्री का विशेष श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की गई। आरती के पश्चात कन्या भोजन कराये गये ।

 

कंकाली तालाब में होगा जंवारा विसर्जन

घर-घर में प्रज्वलित जोत और जंवारा का विसर्जन की तैयारियां चल रही है। सुबह 10 बजे के बाद विविध इलाकों से जंवारा यात्रा निकलकर कंकाली तालाब पहुंची। यहां दोपहर तक विसर्जन करने भक्तों का तांता लगा रहा।

दो साल बाद धारण किया सांग-बाणा

कोरोना काल के दो साल बाद जंवारा विसर्जन यात्रा में उत्साह का माहौल रहा। विसर्जन यात्रा में भक्त अपने हाथों, गालों, सीने पर सांग-बाणा यानि तेज नुकीले तीर, भाले चुभोकर चले

मंदिरों में गुप्त जोत विसर्जन

महामाया, कंकाली, दंतेश्वरी, शीतला आदि देवी मंदिरों में गुप्त रूप से जोत का विसर्जन करने की परंपरा निभाई गई ।

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