फोबिया के बारे में लगभग सभी जानते हैं। किसी भी तरह के फोबिया से ग्रसित व्यक्ति अक्सर उस चीज या स्थिति से बचने की कोशिश करता है, जिससे उसका डर जुड़ा हुआ है। क्योंकि इसे सामने देखने पर उन्हें बड़ी परेशानी महसूस होती है। इन्हीं में से एक सिबोफोबिया । यह खाने के डर से जुड़ा एक अजीब प्रकार का फोबिया है।
इसमें व्यक्ति खुद खाना देखकर ही बेचैन हो जाता है। अध्ययनों में कहा गया है कि कुछ प्रकार के खाने के विकार वाले लोग सिबोफोबिया या चोकिंग फोबिया नामक एक संबंधित स्थिति के शिकार हो सकते हैं। दरअसल, इसमें एक व्यक्ति को घुटन के डर के कारण भोजन निगलने का डर बना रहता है। तो आइए जानते हैं सिबोफोबिया क्या है और क्या है इसके लक्षण और इलाज।
सिबोफोबिया का कारण क्या है
अन्य प्रकार के फोबिया की तरह सिबोफोबिया के कारण भी अब तक ठीक से अज्ञात हैं। हालांकि कुछ सिद्धांत और अध्ययनों के अनुसार, यह फोबिया आमतौर पर तब विकसित होता है जब कुछ वस्तु और स्थितियों को इमोशनल एक्सपीरियंस के साथ जोड़ा जाता है। सरल शब्दों में समझें तो व्यक्ति को जब कुछ ऐसी चीजें खाने के लिए मजबूर किया जाता है, जो उसे नापसंद हैं, तो इससे उसमें उस भोजन को लेकर डर पैदा हो जाता है। ऐसा डर तब भी पैदा होता है, जब कोई व्यक्ति खाने या निगलने के बाद मांसपेशियों में ऐंठन का अनुभव करता है।
न्यूरोट्रांसमीटर में खराबी का कारण है सिबोफोबिया
फोबिया कुछ अनुवांशिक स्थितियों या फिर मास्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर में खराबी का नतीजा है। जब ऐसा होता है, तो इस फूड फोबिया का ट्रिगर किसी इमोशनल एपिसोड से जुड़ा नहीं होता। कुछ फूड एलर्जी खाद्य पदार्थों में छिपी एलर्जी का डर भी एक वजह हो सकता है। यह पहले से मौजूद चिंता विकार जैसे पोस्ट ट्रौमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर है, जो सिबोफोबिया जैसे फोबिया को ट्रिगर करने का कारण माना जाता है।
भोजन का भय कैसे विकसित हो सकता है
कुछ लोगों में भोजन का भय विकसित होने की छोटी-छोटी वजह होती हैं। जैसे भोजन का नापसंद होना, भोजन की बनावट के साथ इसके रंग के कारण भोजन का डर पैदा हो सकता है। यह डर समय के साथ बढ़ता जाता है और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
जब व्यक्ति सभी तरह के खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ से डरने लगे।
मेयोनीज, दूध और फल खाने से पहले उन्हें डर बना रहे कि ये पहले ही खराब हो चुके हैं।
शरीर को होने वाले नुकसान के कारण अधपके खाद्य पदार्थों के सेवन से बचते हैं।
ऐसे लोगों को हर वक्त लगता है कि ज्यादा पके हुआ भोजन खाकर वे जल जाएंगे।
सिबोफोबिया वाले लोग हर फूड प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट चैक करते रहते हैं, क्योंकि उन्हें भ्रम होता है कि
कि इसे खाने से उन्हें पेट में दर्द होगा।
भोजन को निगलते वक्त मौत का डर बना रहना
इस बीमारी से ग्रसित लोग कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे चिपचिपाना या स्पंजी वस्तुओं से डरते हैं।
कुछ नया खाने से डरते हैं फूड फोबिया से ग्रसित लोग, हो जाते कुपोषण के शिकार
सिबोफोबिया के लक्षण-
पैनिक अटैक
सांस लेने में तकलीफ
पसीना आना
चक्कर आना
थकान हो जाना
दिल की धड़कन तेज हो जाना
उबकाई आना
सिबोफोबिया की जटिलताएं
कुछ खाद्य पदार्थों के डर से लोगों को शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। सिबोफोबिया की कुछ जटिलताओं में शामिल हैं-
धीरे-धीरे वजन कम होना
हड्डियों और याददाश्त का कमजोर हो जाना
क्रॉनिक स्ट्रेस और एंजाइटी से जुड़ी समस्या
कुपोषण के कारण अन्य शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां पैदा होना
सिबोफोबिया का निदान
डायग्नोस्टिक एंड स्टैटिस्टिकल मैनुअल ऑफ़ मेंटल डिसऑर्डर के पैमाने के अनुसार लक्षणों की पहचान कर किसी भी फोबिया का निदान करना आसान है। निदान करते समय डॉक्टर रोगी से कुछ सवाल पूछ सकता है। ये सवाल फोबिया की ट्रिगरिंग , स्पीड और टाइम इंटरवेल को लेकर हो सकते हैं। इसका इलाज करते समय डॉक्टर पूछ सकता है कि आप किस तरह के खाद्य पदार्थों से डरते हैं।
इसके अलावा कई बार डॉक्टर्स मास्तिष्क की किसी भी चोट या असामान्ताओं को देखने के लिए दिमाग का सीटी स्कैन कर सकते हैं। इसके बाद ब्लड और यूरीन टेस्ट की जरूरत पड़े, तो यह भी कराना पड़ता है।
सिबोफोबिया का इलाज
एक्सपोजर-
इसमें मरीज को उन खाद्य पदार्थों के सामने लाया जाता है, जिसे लेकर उनमे मन में डर बैठा हुआ है। इसके बाद डॉक्टर उन्हें भावनाओं का सामना करना सिखाते हैं।
काग्रिटेव बिहेवियरल थैरेपी-
इससे समस्या को ट्रिगर करने वाले कारकों और इससे जुड़ी दर्दनाक घटनाओं को समझने में मदद मिलती है। इसके बाद तनाव , नकारात्मक भावनाओं और डर को कम करने के तरीके सुझाए जाते हैं।
दवाएं-
इसमें पैनिक अटैक के दौरान मरीज को दी जाने वाली बीटी ब्लॉकर्स और बेंजोडायजेपाइन के साथ चिंता रोगी दवा और एंटीडिप्रेसेंट शामिल हैं।
भोजन का डर किसी व्यक्ति के जीवन को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है, वो भी तब जब कोई व्यक्ति लगातार डर के कारण भोजन से परहेज करता है। सिबोफोबिया के हर मरीज में अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं। इसलिए इस बीमारी का जल्द से जल्द उपचार जरूरी है।
















