नई दिल्ली
भारतीय दवा कंपनी जायडस कैडिला ने गुरुवार को कहा है कि उसने अपनी तीन-डोज वाली कोविड-19 वैक्सीन की इमरजेंसी अप्रूवल के लिए आवेदन दिया है। कंपनी के मुताबिक अंतरिम अध्ययन में यह वैक्सीन 66.6% प्रभावी पाई गई है। अगर इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई ) से मंजूरी मिल जाती है तो यह देश में विकसित दूसरी वैक्सीन होगी। पहली स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन है, जिसे भारत बायोटेक ने आईसीएमआर के साथ मिलकर बनाया है। जायडस कैडिला को अगर इस्तेमाल की मंजूरी मिल जाती है तो भारत में ऐसी मंजूरी पाने वाली यह पांचवीं वैक्सीन होगी।
इससे पहले चार वैक्सीन- कोविशील्ड, कोवैक्सिन, स्पूतनिक V और मॉडर्ना को यह मंजूरी मिली है, लेकिन जायडस की वैक्सीन पहली चारों से कई मायने में अलग है। जायडस कैडिला वैक्सीन सबसे अलग है जायडस ने कहा है कि उसकी वैक्सीन एफिकैसी का परिणाम 28,000 से ज्यादा वॉलंटियर्स पर अंतिम स्टेज की ट्रायल के विश्लेषण के आधार पर है, जिसमें 1,000 सब्जेक्ट 12 से 18 साल आयु वर्ग के भी शामिल किए गए थे। भारत में किसी भी वैक्सीन पर यह सबसे बड़ा ट्रायल है। जायडस कैडिला की इस वैक्सीन का नाम ZyCoV-D है, जो दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन होगी।
इस वैक्सीन की खासियत ये है कि बाकी की दो खुराक लेनी पड़ती है, लेकिन यह तीन-खुराक वाली वैक्सीन है। यही नहीं इसकी सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसे लगाने के लिए सुई की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसे फार्माजेट तकनीक से लगाया जाता है, जिससे वैक्सीन लगने के बाद होने वाले साइड इफेक्ट की संभावना कम हो जाएगी।















