राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को किया संबोधित

विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान, कहा—2047 तक विकसित भारत का निर्माण हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य

0
2
Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh
Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh

नई दिल्ली। 14.08.2026: Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई दी।

उन्होंने कहा कि अब से कुछ ही घंटों बाद भारत की स्वाधीनता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा। देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीय इस राष्ट्रीय पर्व को उल्लास के साथ मनाते हैं और तिरंगा हमारी स्वतंत्रता का प्रतीक है।

Table of Contents

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन

राष्ट्रपति ने 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के ऐतिहासिक क्षण को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के नागरिक अपने सपनों को साकार करने के अवसरों का उपयोग करें और भारत को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने की भावना से कार्य करें, यही स्वतंत्रता की सार्थकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, श्रमिकों, किसानों, खिलाड़ियों, कलाकारों, शिल्पकारों, जनप्रतिनिधियों, न्यायपालिका, सिविल सेवकों, निवेशकों, समाजसेवियों और सफाई-मित्रों सहित राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले सभी नागरिकों की सराहना की। राष्ट्रपति ने तीनों सेनाओं, सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा की भी विशेष प्रशंसा की।

2047 तक विकसित भारत का संकल्प

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने कहा कि स्वाधीनता के शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए देश आगे बढ़ रहा है। अंत्योदय की भावना के साथ विकास का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना संकल्प है।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को अपनाते हुए आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वेद-वाक्य ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह हमें राष्ट्र के लिए सदैव जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को स्मरण

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने 14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाजन की हिंसा में जान गंवाने वाले और विस्थापन की त्रासदी झेलने वाले लाखों देशवासियों को आज याद किया जाता है।

उन्होंने विभाजन की विभीषिका के बावजूद अपनी पहचान बनाए रखने वाले लोगों को भी नमन किया। उन्होंने स्वतंत्रता के समय 550 से अधिक रियासतों के भारत में एकीकरण की चुनौती का उल्लेख करते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल को आधुनिक भारत की एकता का शिल्पकार बताया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

संविधान और लोकतंत्र में जनभागीदारी पर जोर

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों की भागीदारी पर आधारित है और देशवासी राष्ट्रीय अभियानों को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठा, अवसर की समानता और व्यक्ति की गरिमा संविधान के प्रमुख आदर्श हैं।

उन्होंने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के दायित्वों को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को, विशेषकर वंचित वर्गों को, समानता के आधार पर सम्मान के साथ समय पर न्याय मिलना चाहिए।

समावेशी विकास और सामाजिक न्याय को मिली गति

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है और विरासत तथा विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है। उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले के सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के योगदान को याद किया।

उन्होंने कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने, प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत लगभग 59 करोड़ खाताधारकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने तथा 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था जैसे प्रयास किए गए हैं। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 60 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने का भी उन्होंने उल्लेख किया।

डिजिटल क्रांति और बुनियादी ढांचे का विस्तार

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को दुनिया में सबसे बड़े और प्रभावी डिजिटल ढांचों में बताया। उन्होंने कहा कि गांवों की छोटी दुकानों से लेकर रेहड़ी-पटरी तक डिजिटल भुगतान हो रहा है और विश्व के आधे से अधिक रियल टाइम डिजिटल लेन-देन भारत में हो रहे हैं।

उन्होंने हाईवे, वाटरवे, रेलवे और एयरवे के विस्तार को देश के विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे नए उद्यमों, रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

आर्थिक विकास और आत्मनिर्भर भारत पर जोर

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने वैश्विक स्तर पर युद्ध और अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान ने आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार को मजबूत किया है।

पर्यावरण संरक्षण को बताया सामूहिक जिम्मेदारी

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने कहा कि प्राकृतिक संपदाओं पर भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है जितना वर्तमान पीढ़ी का। इसलिए आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा रचित संताली गीत का उल्लेख करते हुए प्रकृति और मानवीय मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया। राष्ट्रपति ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ और LiFE (Lifestyle for Environment) जैसे अभियानों की भावना के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर जताई प्रसन्नता

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने शिक्षा, कृषि, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने बताया कि हाल ही में ग्लासगो में हुए Commonwealth Games में भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से 8 स्वर्ण पदक बेटियों ने जीते।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से 10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं और तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। अब देश तीन करोड़ महिलाओं को नई लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

युवाओं को बताया भारत की सबसे बड़ी ताकत

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने कहा कि देश की कुल आबादी में 65 प्रतिशत लोग 35 वर्ष से कम आयु के हैं। उन्होंने युवाओं को देश की सबसे मूल्यवान संपदा बताते हुए कहा कि युवा प्रतिभाशाली, प्रतिबद्ध और कुशल हैं।

उन्होंने युवा उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने कहा कि युवा पीढ़ी भारत के स्वर्णिम भविष्य के प्रति उनकी आस्था को और मजबूत करती है।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भरोसे पर जोर

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को भारत का भविष्य निर्माता बताते हुए सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में अनुचित साधनों पर पूरी तरह अंकुश लगाने, पारदर्शिता बढ़ाने और इसे युवाओं के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।

उन्होंने युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को देश के भविष्य का आधार बताया तथा खेलों को युवा विकास और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

ऑपरेशन सिंदूर और सेना के पराक्रम का उल्लेख

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेनाओं के पराक्रम की सराहना की। उन्होंने 26 जुलाई को मनाए गए कारगिल विजय दिवस और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के आरंभ की पहली वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध यह अभियान भारतीय सेनाओं की अचूक क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे कहीं भी छिपें, उन्हें अपने किए की सजा जरूर मिलेगी।

नक्सलवाद से मुक्ति को बताया बड़ी उपलब्धि

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों से नक्सलवाद देश के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ था, लेकिन भारत को नक्सल मुक्त बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उत्साह का वातावरण है और विकास की धारा तेजी से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने बस्तर ओलिंपिक्स और बस्तर पंडुम का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आयोजनों में खिलाड़ियों, कलाकारों और दर्शकों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की।

विरासत, संस्कृति और विश्व मंच पर भारत का बढ़ता सम्मान

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि मराठा सैन्य परंपरा से जुड़े 12 दुर्गों को UNESCO की World Heritage List में स्थान मिला है। उन्होंने सारनाथ को भी UNESCO World Heritage List में शामिल किए जाने का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ देश अपनी गौरवशाली परंपराओं की रक्षा करने की क्षमता का भी प्रदर्शन कर रहा है।

‘देश का अर्थ केवल मिट्टी नहीं, देश का अर्थ मनुष्य है’

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में राष्ट्रपति ने तेलुगू भाषा के महान राष्ट्रवादी साहित्यकार गुरजाडा अप्पाराव की रचना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश से प्रेम करने का अर्थ केवल भूमि से प्रेम करना नहीं, बल्कि देश के लोगों के कल्याण और भलाई को बढ़ाना है।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से गांव-गांव, नगर-नगर और भारत के घर-घर में रहने वाले सभी लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध बनेंगे।

विकसित भारत के निर्माण में योगदान का आह्वान

Rashtrapati Murmu ka Rashtra ke naam Sandesh: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों से देश प्रेम की सर्वसमावेशी भावना के साथ स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय साधना में स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने अपने संबोधन का समापन “जय हिंद! जय भारत!” के साथ किया।

Read More : स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले दिल्ली में पांच जगहों पर बम से उड़ाने की धमकी