जिस बुद्धि में भगवान का पहरा हो वह चाह कर भी गलत नहीं कर सकता

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur
Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur

रतनपुर: Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने आज श्रीमद् भागवत कथा में वामन अवतार की कथा बताएं , गुरुदेव बताएं , हम सब की बुद्धि ताश की पत्तों की तरह होती है जो कभी भी कुछ भी कर सकती है लेकिन यदि व बुद्धि में भगवान का चिंतन हो तो हम चाह कर भी गलत कार्य नहीं कर सकते हैं ।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: राजा बलि तीन पग भूमि देने का वचन देते हैं ,भगवान दो पग में ही पूरी पृथ्वी नाप देते है

जब भगवान वामन रूप में राजा बलि की सभा में आते हैं , राजा बलि तीन पग भूमि देने का वचन देते हैं ,भगवान दो पग में ही पूरी पृथ्वी नाप देते है तब तीसरी पग का स्थान अपने मस्तिष्क में देते हैं ,जब भगवान बलि के मस्तिष्क में चरण रखते हैं तो राजा बलि की बुद्धि शुद्ध हो जाती है और भगवान राजा बलि को वरदान मांगने कहते हैं ।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: राजा बलि भगवान से संपत्ति नहीं मांगी संपत्ति का क्या लाभ है लक्ष्मी नहीं मांगी धन, प्रतिष्ठा नहीं मांगा जिसके अंदर भक्ति आ जाती है वह भगवान का दर्शन चाहता है ,राजा बलि ने कहा , प्रातः काल सबसे पहले आपका दर्शन हो।

भगवान ने कहा तथास्तु। और भगवान ने कहा .. इंद्र का कार्यकाल जब समाप्त हो जाएगा और इसके बाद अब तुमको इंद्र पद की प्राप्ति होगी , बलि को भगवान ने इंद्र बना दिया और वामन भगवान ने स्वर्ग उठाकर देवताओं को दे दिया , देवताओं को स्वर्ग मिल गया ।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: अदिति को दिया हुआ वचन पूरा किया , भगवान ने बलि को पाताल लोक दिए और बलि के महल में 52 दरवाजे और भगवान अभी तक 52 दरवाजा पर पहरा देते हैं की बलि प्रातः काल जागेंगे तो पता नहीं किस दरवाजे से निकल जाएंगे मुझे पहले दर्शन देना है।

भगवान वचन अपना पूरा कर रहे हैं। गुरुदेव बताए यह बावन दरवाजे हमारी अपनी बुद्धि है और कोई भी बुद्धि कमजोर नहीं होती ,यह ताश के पत्तों की तरह बुद्धि होती है ,जैसे ताश के पत्ते 52 होते हैं ,वैसे मनुष्य की बुद्धि होती है,और कोई बुद्धि कमजोर नहीं होता है,ताश का कोई पत्ता कमजोर नहीं होता । Shrimad Bhagvat

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: जब जिसका समय आता है वह हावी हो जाता है , वही महत्वपूर्ण बन जाता है । ताश के पत्तों में जो खेल खेला जाता है, अलग-अलग खेल में अलग-अलग पत्ते महत्वपूर्ण बन जाते हैं, कौन – सी बुद्धि कब किस तरह की हो जाए कोई भरोसा नहीं, कब कौन सी बुद्धि क्या करवा दे ।

मनुष्य को कोई भरोसा नहीं, अपने हर प्रकार के बुद्धि पर भगवान का पहरा हो ताकि हमारी बुद्धि कभी गलत करवाना चाहे भी तो ना हो सके हर बुद्धि रूपी दरवाजे पर भगवान का पहरा रहता है। भगवान का ही चिंतन हो।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 3: बड़ी बाजार पंडाल में काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही, कथा आयोजक श्रीमती सावित्री संतोष गुप्ता ने बताया कि कल 3:45 बजे कथा आरंभ हो जाएगी कृष्ण लीला की कथा बताई जाएगी .

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