पिछले साल मैथ्स की जीनियस ‘शकुंतला देवी’ का रोल निभाने के बाद विद्या बालन अब ‘शेरनी’ में बतौर फॉरेस्ट आॅफिसर के रोल में नजर आएंगी। इस फिल्म को ‘न्यूटन’ फेम अमित मासुरकर ने डायरेक्?ट किया है। यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म एमेजॉन प्राइम पर ही रीलीज होगी। इस मौके पर विद्या बालन ने खास बातचीत की और बताया कि यह फिल्म उस आम धारणा पर वार करती है कि औरत कैसे मर्दों वाले जॉब कर सकती है। ये उस तरह की ‘शेरनी’ है, जो दहाड़ती, गुर्राती और गरजती नहीं, सीधा बरसती है। मुझे याद नहीं है, पर यह फिल्म शायद डेढ़ साल पहले मेरे पास आई थी। दो साल पहले जब अमित मासुरकर मेरे पास आए थे। तब उन्होंने कहा था ये स्टोरी आइडिया आप पहले सुनिए अगर अच्छा लगे तो फिर इसका स्क्रीनप्ले और डायलॉग लिखूंगा। हमने पहले भी साथ में कई ऐड फिल्म्स किए हैं। मुझे वो आइडिया बहुत पसंद आया। हिंदी फिल्मों में जंगल बेस्ड कहानी कम होती हैं। अमित मासुरकर ने फिल्म ‘न्यूटन’ बनाई थी। वह जंगल में बेस्ड थी, मगर वह जंगल को लेकर नहीं थी। यह फिल्म जंगल को लेकर है। साथ ही अमित मासुरकर की कहानियों में इन्हेरेंट मैसेज भी होता है। वो एक यूनीक डायरेक्टर हैं। साथ ही मेरे पास जंगल की अनूठी दुनिया में काम करने का मौका भी था। ऐसे में, मैंने हामी भर दी। सच कहूं तो सटायर ही अमित का जॉनर है। ये बहुत सारी चीजों पर रौशनी डालता है। यह फिल्म उस आम धारणा पर वार करती है कि औरत कैसे मर्दों वाले जॉब में यानी फॉरेस्ट अफसर कैसे बन सकती है। ऐसी नौकरियों में तो मर्द यानी मुस्टंडे होने चाहिए। पुलिस डिपार्टमेंट में तो फिर भी महिलाओं की मौजूदगी एक्सेप्ट की जाने लगी है, मगर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में अब भी बहुत कुछ होना बाकी है। यहां तक कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को लेकर फिल्में भी बहुत कम ही बनी हैं। इस फिल्म में मेकर्स ने फीमेल फॉरेस्ट अफसरों के प्रति आम लोगों की धारणाओं को सामने रखा है। हमें फिल्म की शूटिंग के लिए एमपी टूरिज्म ने काफी मदद की। उन्होंने हमें काफी संसाधन मुहैया करवाए। वहां पर बस टायमिंग्स की रिस्ट्रिक्शंस थीं। आप जोर से चिल्ला नहीं सकते थे। आमतौर पर बाकी सेट पर शोर शराबा होता ही है। यहां सारे क्रू को बहुत सख्त निर्देश दिए गए थे और सभी ने उसका पालन किया। इस वजह से हम टाइम पर शूटिंग पूरी भी कर सके। शूटिंग के समय हमारा पाला जानवरों से नहीं पड़ा। हां, बस लंच टाइम पर न जाने कहां से बंदर आ जाया करते थे। एक सीन में हम लोग समोसे खा रहे थे। न जाने वहां पर कहां से बंदरों की टोली आ गई। हालांकि वो हमारे चले जाने का इंतजार करते रहे और शूट में उन्होंने खलल नहीं डाली। हमारे जाते ही उन्होंने सारे समोसे सफाचट कर दिए। आदिवासियों के साथ इंटरैक्शन तो नहीं हुआ। पर गांव वालों के साथ जरूर हुआ। उनकी समझ काफी निराली होती है। बड़े उत्साह के साथ वो बताया करते थे कि फलां कौन सा पत्ता है? ये जड़ी बूटी है, वो जहर है। अच्छा इस पेड़ पर निशान है। ये जरूर लेपर्ड के होंगे। हमेशा, यह इंसानी फितरत है एक-दूसरे को जज करना। आज भी औरतों को दोगुना जज किया जाता है। इसने कैसे कपड़े पहने हैं, लिपिस्टिक कम लगाई हैं, ये फॉरेस्ट आॅफिसर कैसे बन सकती है? दरअसल इस टॉपिक पर बात तो बहुत हो रही, मगर नतीजे कम ही आए हैं। अभी भी इस पर बहुत काम होना बाकी है।
RECENT NEWS
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया आत्मीय स्वागत
रायपुर, 17 मई 2026: CM Sai welcomes Minister Amit Shah: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आज रायपुर आगमन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वामी...
ग्रामीण अंचल की बेटी बनी प्रेरणा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सराहा उत्कृष्ट प्रदर्शन
रायपुर, 17 मई 2026: Sushasan Tyohar 2026 at Dhamtari: धमतरी जिले के छोटे से ग्राम कंडेल की बेटी कुमारी कुसुम लता बिप्रे ने अपनी...
स्वीडन में गूंज रहे बापू के शाश्वत विचार, जो हमें बेहतर दुनिया बनाने के...
गुटेनबर्ग (स्वीडन), 17 मई 2026 । PM Modi at Gutenburg Sweden: स्वीडन के गुटेनबर्ग में भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी...
प्रधानमंत्री मोदी के हर दौरे से भारत में आता है अरबों रुपए का निवेश:...
नई दिल्ली, 17 मई । Tarun Chugh Statement on CM Man's comment: भाजपा महासचिव तरुण चुघ ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस...
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का हुआ समाधान
रायपुर, 17 मई 2026: Solution to Drinking Water Problem: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व और त्वरित प्रशासनिक कार्यशैली के परिणामस्वरूप जशपुर जिले के...















