नई दिल्ली
दिल्ली उच्च न्यायालय में आज (30 जुलाई) योग गुरु रामदेव द्वारा एलोपैथिक इलाज को लेकर की गई टिप्पणी पर सुनवाई होगी। इस संबंध में दिल्ली एम्स के सात चिकित्सकों ने याचिका दायर की थी। बता दें कि रामदेव के खिलाफ यह याचिका सोमवार (26 जुलाई) को दायर की गई थी, लेकिन एकल पीठ के न्यायाधीश सी हरिशंकर के नहीं आने के चलते मामले की सुनवाई नहीं हुई थी।
जानकारी के मुताबिक, डॉक्टरों ने योग गुरु रामदेव पर एलोपैथिक उपचार के खिलाफ भ्रम फैलाने और दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया है। दरअसल, रामदेव ने कहा था कि कोरोना वायरस से संक्रमित हजारों लोगों की मौत के लिए एलोपैथी जिम्मेदार है। साथ ही, इन लोगों की मौत का कारण एलापैथिक तरीके से इलाज करने वाले चिकित्सकों को बताया था। याचिका में कहा गया है कि रामदेव लोगों के मन में सिर्फ एलोपैथी को लेकर ही नहीं, बल्कि कोविड-19 रोधी टीकों को लेकर भी भ्रम पैदा कर रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि रामदेव के बयान से लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही, ऐसे लोग भी एलोपैथिक उपचार से किनारा कर सकते हैं, जिन्हें सरकार ने इसके लिए जिम्मेदारी सौंपी है। मेडिकल असोसिएशन ने अपनी दलील में यह आरोप भी लगाया कि रामदेव द्वारा फैलाई जा रही गलत सूचनाएं कुछ और नहीं, बल्कि उनके अपने कोरोनिल जैसे उत्पादों का प्रचार है, जिन्हें वह कोविड-19 का वैकल्पिक उपचार बताते हैं। चिकित्सकों का अनुरोध है कि रामदेव को इस तरह के दुष्प्रचार करने से रोका जाए, क्योंकि अगस्त 2021 तक देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका है और उससे काफी लोग प्रभावित हो सकते हैं।
बता दें कि उच्च न्यायालय ने रामदेव को तीन जून को समन जारी किया था। यह समन एलोपैथिक दवाओं के खिलाफ रामदेव के कथित बयानों और पतंजलि की कोरोनिल किट के दावों के संबंध में दिल्ली मेडिकल असोसिएशन (डीएमए) की याचिका के आधार पर भेजा गया था। इसमें समन में मौखिक रूप से कहा गया था कि रामदेव सुनवाई की अगली तारीख 13 जुलाई तक कोई भड़काऊ बयान न दें और मुकदमे का जवाब दें।















