उच्च शिक्षा विभाग के आदेश से प्राचार्य परेशान, कॉलेज की बढ़ा दी 25% सीटें

भोपाल
उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के यूजी-पीजी कॉलेजों की 25 फीसदी सीटें बढ़ा दी हैं। सत्र 2021-22 में 12 लाख 65 हजार सीटें हो गई हैं। जबकि गत वर्ष विभाग के पास करीब साढ़े आठ लाख सीटें थीं। सीटें बढ़ने से कॉलेजों में ना ही अतिरिक्त विद्यार्थियों को पढ़ने कमरे हैं और ना ही उन्हें बैठाने की पर्याप्त संख्या में फर्नीचर मौजूद है। इससे विभाग द्वारा जारी होने वाले पहले अलॉटमेंट से प्राचार्य परेशानियों में घिर गए हैं।

कॉलेजों में फर्नीचर और कक्षाओं के साथ अन्य संसाधनों का अभाव चल रहा है, जिससे वर्तमान सीटों पर प्रवेश कराने में प्राचार्यों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा। प्राचार्य पशोपेश में हैं कि उनके कॉलेज में विद्यार्थियों को पढ़ाने और उन्हें बैठाने फर्नीचर और कक्षाएं कहां से तैयार कराएंगे। वर्तमान में प्रदेशभर में कॉलेज और विद्यार्थियों के हिसाब से 50 फीसदी ही स्टाफ कार्य कर रहा है। ऐसे में अतिरिक्त विद्यार्थियों का बोझ जमी हुई अध्ययन व्यवस्था को चौपट कर सकता है।

वर्तमान में यूजी में दस लाख तीस हजार और पीजी में दो लाख 3 हजार सीटें शामिल हैं। आज नौवें दिन यूजी और पीजी के साढ़े तीन लाख पंजीयन और तीन लाख विद्यार्थियों ने च्वाइस लॉक कर दी है। इसमें से दो  लाख 10 हजार ने सत्यापन हो चुका है। यूजी में प्रवेश के लिए दो लाख का सत्यापन हो चुका है, जिसमें से एक लाख का सत्यापन हुआ है। पीजी में प्रवेश के लिए एक लाख बीस हजार पंजीयन हुए हैं, जिसमें 70 हजार विद्यार्थियों सत्यापन किया गया है।

  प्रथम चरण में पीजी के दस्तावेजों के सत्यापन का नौ अगस्त को अंतिम दिन है।  पीजी का अलॉटमेंट 14 अगस्त को जारी किया जाएगा। यूजी में 12 अगस्त तक पंजीयन, सत्यापन 14 अगस्त और अलॉटमेंट 20 अगस्त तक होगा।

प्राचार्यों का कहना है कि हर साल विभाग सीटें बढा देता है। वर्तमान सत्र में सीधे यूजी-पीजी में 25-25% सीटें बढ़ा दी हैं। ऐसे में गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने में काफी कठिनाई होती है। अधिक संख्या में विद्यार्थी होने पर वे गुणवत्ता पर फोकस नहीं करा पाएंगे। प्राचार्यों का कहना है कि स्टाफ, कमरे और फर्नीचर की व्यवस्था होने से सीटें बढ़ोतरी करने सें कोई समस्या नहीं आती है।  

एमपी बोर्ड और सीबीएसई ने 12वीं की कक्षाओं के रिजल्ट जारी कर दिए हैं, जिसमें सीबीएसई में करीब 70 हजार विद्यार्थी पास हुए हैं। वहीं, एमपी बोर्ड के करीब साढ़े सात लाख विद्यार्थी पास होकर कॉलेज में प्रवेश लेने की योग्यता रखते हैं। इसके अलावा संस्कृत बोर्ड के करीब एक विद्यार्थी प्रवेश लेने के लिए कॉलेजों में जोर लगाएंगे।