भगवान जिसके जीवन का जहर पी जाएं वह छोटा नहीं रह जाता वह बड़ा हो जाता है….

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4
Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4

रतनपुर; 14 मार्च । Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4: परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने आज श्रीमद् भागवत कथा में पूतना वध और कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किए।

झूठे प्रेम को पूतना कहते है

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4 : उन्होंने बताया झूठे प्रेम को पूतना कहते है, जब किसी को यह कह देते है कि तुम सबसे प्रिय हो,और समय आने पर रूप बदल लेते है । सब कहने की बातें रह गई,वह पूतना स्वरूप होता है, पूतना सुंदर रूप बनाकर भगवान को दुग्धपान कराने आती है और पूतना अपना माया दिखाने लगती है भगवान स्वयं मायापति है वह सब समझ जाते हैं ।

भगवान ने संकेत दिए 

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4 : भगवान कृष्ण उस समय महादेव को याद करते हैं, प्रार्थना करते है,और शंकर भगवान प्रसन्न हुए विषपान करने को तैयार हुए , क्रोध को बुलाया गया, क्योंकि भगवान के पास कोई क्रोध नामक चीज़ नहीं है । भगवान को क्रोध नहीं होता, और यहां पर भगवान ने संकेत दिए कि सदुपयोग और दुरुपयोग आपको करने आना चाहिए तलवार से चाहे तो किसी की रक्षा कर ले चाहे तो किसी का वध कर दे।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4 : सदुपयोग करने का ज्ञान 

सदुपयोग करने का ज्ञान अगर आ जाएगा तो सब का सदुपयोग होगा,भगवान शिव के लिए काल क्रीड़ा की वस्तु है गले का हार बना हुआ है तो जब ज्ञान होगा बुद्धि होगी विवेक होगा सत्य का ज्ञान होगा सत्य का जीवन होगा तो काल भी हार बन जाएगा।

क्रोध वैसे लोगों ने हमेशा दुरुपयोग ही किया लेकिन भगवान कृष्ण यहां पर सदुपयोग किया क्रोध से कृष्ण ने कहा कि तुम्हे पूतना का प्राण पीना क्रोध में मनुष्य प्राण ही तो पीता है ।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4 : क्रोध स्वयं को खा जाता है 

क्रोध स्वयं को खा जाता है जितना क्रोधित हो गए , अंदर की सरलता समाप्त होगी और अंदर कुटीलता भरेगी कठोरता भरेगी ,स्वयं को ही पहले बर्बाद कर देती है। कृष्ण दांत से दबाया और इसके बाद स्तन पीने लग गए,शंकर भगवान जहर पी लेते है और क्रोध प्राण पीते है, भगवान भी यहां पर शुद्धता को स्वीकार करते हैं पवित्रता को निर्मलता को भगवान ने पकड़ा है ।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4 :  भगवान जिसको पकड़ लेते हैं , उसको कभी नहीं छोड़ते

पूतना चिल्लाने लग गई छोड़ो, भगवान जिसको पकड़ लेते हैं , उसको कभी नहीं छोड़ते मनुष्य भगवान के पास जाकर समय आने पर भगवान को भूल जाते हैं लेकिन यदि भगवान ने हाथ पकड़ लिया तो कभी नहीं छोड़ते साथ निभाते हैं।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4 : इसलिए हमेशा अपना हाथ भगवान को पकड़ा देना चाहिए भगवान ने पकड़ा है छोड़ने को तैयार नहीं पूतना का रूप बदलना आरंभ हो गया क्योंकि जब जीवन से अज्ञान दूर होने लग जाता है तो व्यक्ति का स्वभाव व्यक्ति का शरीर व्यक्ति का चेहरा निखारने लग जाता है और स्वरूप बदलने लग जाता है स्वभाव बदलने लग जाएगा भगवान जिसके जीवन का जहर पी जाएं वह छोटा नहीं रह जाता वह बड़ा हो जाता है। पुतना का आकार विशाल हो जाता है।

Shrimad Bhagvat Katha Ratanpur Day 4 : बड़ी बाजार पंडाल में काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही कथा आयोजक श्रीमती सावित्री संतोष गुप्ता ने बताया कि कल 3:45 बजे कथा आरंभ हो जाएगी ,कल गोवर्धन भगवान की कथा बताई जाएगी।


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