Harekala Hajabba : नंगे पैर इंसान को दे​खिए पैर में चप्पल नहीं, चेहरे पर भाव नहीं मगर हाथ में पद्मश्री

नई दिल्ली

कर्नाटक के संतरे बेचने वाले 65 वर्षीय हरेकाला हजब्बाको पद्मश्री मिलना भारत देश की आत्मा को सम्मानित करने जैसा है. कर्नाटक के मंगलूरू के एक संतरा विक्रेता हरेकाला हजब्बा को भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा। हजब्बा को यह सम्मान ग्रामीण शिक्षा में अपने योगदान के लिए दिया गया है।

हजब्बा आज भी फल बेचकर 150 रुपये दिन कमाते है. एक दिन एक अंग्रेज ने इनसे आरेंज यानि संतरा मांगा जिसे ये अंग्रेजी न जानने की वजह से समझ न सके. उसी दिन फैसला कर लिया कि परिस्थितियों ने भले ही इन्हें स्कूल नहीं जाने दिया लेकिन ये अपने गाँव के बच्चों के लिए स्कूल जरूर खोलेंगे.

इसके बाद उन्होंने संतरे बेचकर अपनी जमा पूंजी से साल 2000 में गांव की सूरत ही बदल दी और एक एकड़ में एक स्कूल बनाया ताकि बच्चे स्कूली शिक्षा हासिल कर सकें. उन्होंने जरूरतमंद बच्चों के लिए एक प्राथमिक स्कूल की स्थापना की. भविष्य में उनका सपना अपने गांव में एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज का है.

राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया. हजारों सेल्यूट हजब्बा को ऐसे ही व्यक्ति मिशाल बनकर लोगों को प्रेरणा देते हैं |