रायपुर,
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्थापित राजधानी रायपुर के गोकुल नगर गौठान की एक पहल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने यह सिद्ध किया है कि यदि किसी भी काम को लगन से किया जाए तो उसका परिणाम सुखद ही होता है। गौठान में काम कर रही महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बनी है बल्कि विभिन्न मंचों में सम्मान भी पा रही है।
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना “नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी“ के अंतर्गत जिले के गोकुल नगर,जोन 6 में 2.5 एकड़ में गौठान का निर्माण किया गया है। यहां गोबर को बेचा नहीं जाता बल्कि इससे कई प्रकार की सामग्री बनाने का काम महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किया जाता है। इन उत्पादों की बिक्री से गौठान को सालाना 30 लाख की आमदनी होती है। जिससे समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही है और किसी पर निर्भर भी नहीं है। गौठान में 400 से अधिक देशी गाय है जिनसे हर रोज़ करीब 3 हजार किलो गोबर मिलता है इस गोबर का उपयोग करके यहाँ 30 से ज्यादा प्रकार के उत्पाद बनाए जाते है। इन दिनों इस गौठान की स्व-सहायता समूह की महिलाएं गोबर से टाइल्स बनाने के काम में जुटी है।
गौठानों से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई है और साथ ही प्रदेश भर की महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही है। राज्य शासन द्वारा भी गौठानों से आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। जिससे इन महिलाओं के साथ साथ प्रदेश भर की महिलाओं के प्रयासों को बल मिल रहा है। इसी बल के कारण महिलाएं न केवल अपने हुनर को निखार कर अपने लिए आय का श्रोत बना रही है बल्कि देश भर की महिलाओं के लिए मिसाल भी बन रही है।
गौठान ने दिया कठिन वक्त में सहारा
एक पहल स्व सहायता समूह की नोमिन पाल ने बताया कि पति के निधन के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया था। 6 महीने बहुत दिक्कत हुई। अब गौठान के जरिये गोबर से निर्मित कई सामान बना रहे हैं। इससे महीने में लगभग 10 हजार रुपए कमा लेते हैं। जिससे अब वो आर्थिक रूप से सशक्त हुई है और अपने घर की जिम्मेदारियां भी निभा रही है।
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