रायपुर
देश के कोने कोने में मुझे भागवत कहने का सौभाग्य मिला है किंतु ऐसा दिव्य श्रोता कहीं नहीं मिलता आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि पूज्य महाराज जी जैसे सन्त इस क्षेत्र को प्राप्त हुआ है। एक आसन पर विराजित होकर सुबह से शाम तक कथा सुन रहे हैं बांकी जगह पर आयोजक तो व्यवस्थापन में ही लगे रहते हैं। यह इस स्थान का प्रभाव है यहां महात्माओं ने तपस्या की है। यह बातें श्री दूधाधारी मठ महोत्सव के तहत संगीतमय श्री रामकथा एवं भव्य सन्त सम्मेलन में श्रीधाम अयोध्या से पधारे हुए अनंत श्री विभूषित श्री स्वामी मधुसूदनाचार्य जी महाराज ने अभिव्यक्त की, उन्होंने कहा कि- जो व्यक्ति दूसरों के सुख को देख कर जलते हैं, सहन नहीं कर सकते, वे मानव कहलाने के योग्य नहीं हैं किंतु जो दूसरों के सुख में सुखी और दुख में दुखी होते हैं वे देव तुल्य हैंः। ध्यान रहे जो व्यक्ति आपसे मीठी वाणी में बोलता है, लोगों से निश्चल भाव से मिलता है, दूसरों के सुख को देखकर खुशी होता है और परोपकार में लगा रहता है वह चाहे किसी भी जाति या वर्ण का क्यों ना हो स्वर्ग से आया हुआ जीवात्मा है। इसके विपरीत आचरण करने वाला व्यक्ति नरक से आया हुआ नरक गामी है। मनुष्य का तन पाने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि हम परोपकार कर सकते हैं। पशु योनि में रहकर धर्म का कार्य नहीं कर सकते हैं। गुरु के चरणों से लिया गया जल ही चरणामृत होता है या शालिग्राम का चरणामृत बनता है।
इसे प्रसाद स्वरूप पान करना चाहिए बांकी विग्रहों के स्नान से प्राप्त जल को घरों में छिड़कना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार में सुख कहीं भी नहीं है सुख तो अपने शरीर के अंदर है। परमात्मा ने जो कुछ दिया है उसी में खुश रहने वाला व्यक्ति संसार में सबसे सुखी है। अमूल्य शरीर को नष्ट करके व्यक्ति धन एकत्रित करने में लगा रहता है, जो धन एकत्रित कर लेता है उसे फिर शरीर को ठीक करने में लगाता है अंत में धन भी चला जाता है और शरीर भी ठीक नहीं होता। शरीर का ध्यान रखना भी हमारा धर्म ही है।विद्वान आचार्य ने कहा कि यदि श्रेष्ठ जन सम्मान करते हैं तो हमारा कर्तव्य है कि हम उचित दूरी बनाए रखें एवं अपने कर्तव्यों को ना भूलें नारद जी को भगवान ने अपने गले का माला पहनाया और समीप बैठने के लिए कहा, नारद जी बैठ गए यही उनसे भूल हो गई। संसार में जितने भी साधन बने हैं वे सभी भगवान पर आश्रित हैं।
भगवान को किसी भी साधन से नहीं पाया जा सकता वह तो उनकी कृपा पर ही आधारित है। ध्यान रहे भक्तों का कितना ही पतन क्यों ना हो जाए उसका भगवान पर विश्वास कभी कम नहीं होता। ब्रह्मा जी से मनु और शतरूपा ने जन्म लिया मनु के संतान होने के कारण ही हम मानव कहलाते हैं। यह विचित्र सी बात है कि कभी भी किसी जानवर को नहीं कहना पड़ता कि तुम जानवर बनो, किसी पशु को कभी नहीं कहना पड़ता कि तुम पशु बनो! लेकिन मनुष्य को बार-बार कहना पड़ता है तुम मनुष्य बनो, मानव बनो! दो हाथ और दो पैर मिल जाने से कोई मानव नहीं हो जाता! उसमें मानवीय गुण, सदाचरण का होना आवश्यक है ।
आचार्य श्री ने कहा कि सन्त का आश्रम संसार में कहीं भी हो सकता है एक ही सन्त के हजार आश्रम हो सकते हैं। हमने सुना है छत्तीसगढ़ में भी श्रृंगी ऋषि का आश्रम है। हो सकता है श्रृंगी ऋषि कभी चतुर्मास करने के लिए यहां आए हो! उन्होंने भगवान रघुनाथ जी की जन्म की कथा सुना कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर दिन की तरह श्री दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज अध्यक्ष गौ सेवा आयोग मंच पर यजमान के रूप में विराजित थे। मठ मंदिर के सभी ट्रस्टियों, विद्यार्थियों ,कर्मचारियों तथा श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का बारी-बारी से अभिनंदन किया।
कथा श्रवण के लिए उपस्थित हुए पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल
श्री दूधाधारी मठ सत्संग भवन में आयोजित संगीत मय श्रीराम कथा एवं भब्य सन्त सम्मेलन के पांचवें दिन के दूसरे सत्र में छत्तीसगढ़ राज्य के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, शदाणी दरबार से युधिष्ठिर लाल जी, जैतू साव मठ से अजय तिवारी जी एवं सहयोगी गण, भगवान राजीवलोचन मंदिर राजिम के सभी पुजारी एवं ट्रस्टी गण, गोपी दास मंदिर पुरानी बस्ती रायपुर से राजीव नयन जी महाराज, पूर्व विधायक संतोष पांडे, पुरंदर मिश्रा, संस्कृत मंडलम बोर्ड के सदस्य तोयनिध वैष्णव, पार्थसारथी राव, शिवरीनारायण से निरंजन लाल अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे।














