रायपुर
छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने चुनाव प्रसार के दौरान शिमला में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दिए गए वक्तव्य ने अब पुरानी पेंशन योजना एवं नवीन पेंशन योजना में जमा राशि डूबत खाते में जाने का खतरा बढ़ गया है। बिना किसी अधिकार पत्र के एनपीएस की राशि कर्मचारी सीधे जब तक उसके खाते में जमा नहीं होगा, वह छत्तीसगढ़ वित्त संहिता के नियमों के अधीन नहीं होगा तब तक आहरण नहीं कर सकता है।
प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा एवं महामंत्री उमेश मुदलियार ने कहा है कि अब पुरानी पेंशन योजना लागू करना न करना चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। छत्तीसगढ़ राज्य में 1 अप्रैल 2022 से लागू पुरानी पेंशन योजना के 17 हजार करोड रुपए से अधिक राशि कंपनी में जमा होने तथा इस राशि का केंद्र सरकार द्वारा दुरुपयोग करने का आरोप राज्य सरकार लगाकर केंद्र सरकार से 17 हजार करोड मांग रही है। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार 1 अप्रैल 2022 से पुरानी पेंशन योजना लागू तो की है लेकिन 1 नवंबर 2004 से 31 मार्च 2022 तक के कर्मचारियों के कटी हुई जमा राशि एवं सरकार का अंशदान केंद्र और राज्य के झगड़े में फंस गया है। इस राशि को मुख्यमंत्री स्वयं कर्मचारियों को आहरण करने की सलाह दे रहे हैं। जो तब तक संभव नहीं है, जब तक कर्मचारियों के खाते में राशि जमा ना हो जाए। इसलिए स्वयं मुख्यमंत्री कानूनी सलाह लेने की बात कर रहे हैं।
राज्य के कर्मचारियों के पुरानी पेंशन योजना की राशि को मुंबई स्थित मुख्यालय में निजी कंपनी को सौंपने के लिए कौन जिम्मेदार है, और निजी कंपनी माल्या मोदी बनकर पैसा डकारने वालों का अधिकार किस रूप में प्राप्त किया है, यह एक समस्या है। इससे बड़ी समस्या वर्तमान सरकार ने यद्यपि पुरानी पेंशन योजना लागू की है, यदि आगामी चुनाव में सरकार बदल जाती है, तो ऐसी स्थिति में नवीन सरकार इस पर क्या निर्णय लेगी यह भी संदेह के घेरे में है। कुल मिलाकर केंद्र और राज्य सरकार भाजपा और कांग्रेस पार्टी के झगड़े में लाखों कर्मचारियों के खून पसीने की राशि डूबने की कगार पर है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष जी आर चंद्रा, संरक्षक अजय तिवारी, जिला शाखा अध्यक्ष रामचंद्र ताण्डी, सुनील जरौलिया, अरुंधति परिहार, विजय डागा प्रवक्ता, शेखर सिंह ठाकुर, प्रदीप उपाध्याय, काजल चौहान, पीतांबर पटेल, टार्जन गुप्ता, होरीलाल छेदैया, आलोक जाधव, राजकुमार शर्मा, रत्नाकर साहू, प्रवीण ढ़िडवंशी, आदि नेताओं ने कर्मचारियों के खून पसीने की राशि को राजनीतिक झगड़े से बचाने की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से की है।














